जबलपुर. नगर निगम ने बकाया कर वसूली को लेकर शहर में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए स्पष्ट संदेश दे दिया है कि अब राजस्व मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी. निगमायुक्त रामप्रकाश अहिरवार के निर्देश पर चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत बकाया टैक्स जमा न करने पर अमूल के निर्माणाधीन भवन का कार्य अस्थायी रूप से रोक दिया गया है. संबंधित भवन को तीन दिन का अंतिम नोटिस जारी करते हुए स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित समयसीमा के भीतर भुगतान नहीं होने पर कुर्की की कार्रवाई की जाएगी.
राजस्व विभाग की टीम ने संभाग क्रमांक 15 के अंतर्गत कार्रवाई करते हुए पाया कि निर्माणाधीन भवन से लंबित कर राशि जमा नहीं की गई है. कई बार सूचना और अनुस्मारक भेजे जाने के बावजूद भुगतान नहीं होने पर निगम ने नियमानुसार सख्त कदम उठाया. अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर नोटिस चस्पा किया और निर्माण गतिविधियों को रोकने के निर्देश दिए. इस कार्रवाई के बाद अन्य बड़े प्रतिष्ठानों में भी हलचल देखी जा रही है.
इसी क्रम में पांच अन्य औद्योगिक इकाइयों को भी अंतिम नोटिस जारी किए गए हैं. एम.पी. वेयर हाउस पर 10 लाख रुपये, विकास इलेक्ट्रिकल पर 2 लाख 27 हजार रुपये, विजय उद्योग पर 31 लाख 64 हजार रुपये, जनताउ पंचगव्य सेंटर पर 6 लाख 62 हजार रुपये और महाकाल इंडस्ट्री पर 72 हजार रुपये की बकाया राशि दर्ज की गई है. निगम प्रशासन ने सभी को तीन दिन का अंतिम अवसर देते हुए चेतावनी दी है कि भुगतान न होने पर कुर्की, तालाबंदी और अन्य दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी.
नगर निगम का कहना है कि शहर में कई व्यावसायिक और औद्योगिक प्रतिष्ठान वर्षों से कम आकलन के आधार पर कर जमा कर रहे हैं या बकाया राशि लंबित रखे हुए हैं. इससे निगम के विकास कार्य प्रभावित होते हैं. राजस्व विभाग ने अब वार्डवार और संभागवार सूची तैयार कर ऐसे करदाताओं पर फोकस करना शुरू कर दिया है. जिन मामलों में बार-बार सूचना के बाद भी भुगतान नहीं किया जा रहा, वहां सीधी कार्रवाई की जा रही है.
राजस्व अभियान के तहत संभाग क्रमांक 3 रामपुर अंतर्गत ग्वारीघाट वार्ड स्थित मां नर्मदा मैरिज गार्डन का औचक निरीक्षण भी किया गया. भौतिक सत्यापन में सामने आया कि वास्तविक क्षेत्रफल 81 हजार 992 वर्गफीट है, जबकि रिकॉर्ड में मात्र 3 हजार 120 वर्गफीट निर्मित क्षेत्र और 5 हजार वर्गफीट भूमि दर्ज थी. भारी अंतर पाए जाने पर वर्ष 1997-98 से वास्तविक क्षेत्रफल के आधार पर पुनर्मूल्यांकन किया गया और संपत्ति धारक को 38 लाख 49 हजार 121 रुपये जमा करने का नोटिस जारी किया गया है.
निगमायुक्त रामप्रकाश अहिरवार ने स्पष्ट कहा है कि शहर के विकास के लिए कर वसूली अत्यंत आवश्यक है. यदि सभी संपत्ति धारक अपने वास्तविक क्षेत्रफल और उपयोग के अनुसार कर जमा करेंगे तो सड़कों के सुधार, प्रकाश व्यवस्था, जल निकासी, सफाई और अन्य जनसुविधाओं को बेहतर बनाया जा सकेगा. उन्होंने यह भी कहा कि ईमानदारी से कर जमा करने वाले नागरिकों के साथ न्याय करना निगम की जिम्मेदारी है और कर चोरी या गलत विवरण किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा.
नगर निगम ने शहर के सभी बारात घरों, होटल संचालकों, मैरिज लॉन, अस्पतालों और अन्य व्यापारिक प्रतिष्ठानों से अपील की है कि वे अपने प्रतिष्ठानों की सही नपाई कराकर अद्यतन कर निर्धारण कराएं. यदि जांच के दौरान दर्ज क्षेत्रफल और वास्तविक उपयोग में अंतर पाया जाता है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी. अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि आगामी दिनों में और भी प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण किया जाएगा और जहां भी विसंगति मिलेगी, वहां तत्काल प्रभाव से पुनर्मूल्यांकन और वसूली की प्रक्रिया शुरू की जाएगी.
इस सख्त रुख के बाद शहर के व्यापारिक वर्ग में हलचल तेज हो गई है. कई प्रतिष्ठान अपने दस्तावेजों की समीक्षा और कर अद्यतन प्रक्रिया में जुट गए हैं. वहीं आम नागरिकों का एक वर्ग निगम की इस कार्रवाई को सकारात्मक कदम मान रहा है और इसे शहर के दीर्घकालिक विकास से जोड़कर देख रहा है.
नगर निगम का यह अभियान फिलहाल प्रारंभिक चरण में है, लेकिन जिस प्रकार अमूल के निर्माणाधीन भवन पर रोक और बड़े बकायादारों को अंतिम नोटिस जारी किए गए हैं, उससे स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में राजस्व वसूली को लेकर और भी कड़ी कार्रवाई देखने को मिल सकती है. निगम प्रशासन ने दो टूक शब्दों में कहा है कि समय रहते बकाया जमा करें, अन्यथा कार्रवाई के लिए तैयार रहें.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

