बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व में बाघों की मौतें करंट से हुईं, हाईकोर्ट को रिपोर्ट में साफ़ जवाब जांच में हुआ खुलासा

बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व में बाघों की मौतें करंट से हुईं, हाईकोर्ट को रिपोर्ट में साफ़ जवाब जांच में हुआ खुलासा

प्रेषित समय :20:43:57 PM / Wed, Feb 25th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व और उसके आस-पास के जंगलों में हुए बाघों की मौतों को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में  विस्तृत रिपोर्ट पेश की गई, जिसमें बताया गया कि नवंबर 2025 से अब तक सामने आए मामलों में चार बाघों की मौत करंट लगने (इलेक्ट्रोक्यूशन) से हुई है और चार अन्य प्राकृतिक कारणों से मरे हैं. यह रिपोर्ट बाघों की बढ़ती अप्राकृतिक मौतों पर हाईकोर्ट द्वारा मांगे गए विवरण के क्रम में वन अधिकारियों ने सौंपा. इसके साथ ही यह स्पष्ट किया गया कि इन घटनाओं में अब तक कोई शिकारियों की भूमिका का सबूत नहीं मिला है.

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के पालन में बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व (BTR) के फ़ील्ड डायरेक्टर ने लगभग 30 पृष्ठ की विस्तृत रिपोर्ट दायर की, जिसमें बताया गया कि नवंबर 2025 से 24 फरवरी 2026 तक कुल आठ बाघों की मौत दर्ज हुई. इन आठ मौतों में से चार बाघ रिज़र्व के भीतर और चार बाघ रिज़र्व के बाहरी क्षेत्र यानी जंगलों में निधन हुए. रिपोर्ट के मुताबिक जिस चार बाघों की मौत रिज़र्व के भीतर हुई, उनमें पोस्टमॉर्टम के दौरान यह पता चला कि वे प्राकृतिक कारणों जैसे बीमारी, पारस्परिक लड़ाई या डूबने जैसे कारणों से मरे हैं. जबकि बाकी चार की मौत इलेक्ट्रोक्यूशन का शिकार होने के कारण हुई है. इसमें से तीन बाघ खुले क्षेत्र में लगे लाइव विद्युत तार से करंट लगने से मरे और एक बाघ सोलर पावर इलेक्ट्रिक फेंस में उलझकर करंट की चपेट में आया, जिससे उसकी मौत हुई.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि उन मामलों में कोई तस्करी या शिकार का संकेत नहीं मिला है, जिनका विवरण हाईकोर्ट को दिया गया है. अधिकारियों ने कहा कि प्रारंभिक जांच और साइट वेरिफिकेशन से यह निष्कर्ष निकलता है कि प्राकृतिक मौतों और इलेक्ट्रोक्यूशन को छोड़कर इन मौतों में किसी की लापरवाही या संलिप्तता नहीं पाई गई है. जंगल और रिज़र्व के चारों ओर बिजली के खुले तार और सोलर फेंसिंग के मुद्दों पर वन विभाग ने यह स्वीकारा है कि आवश्यक रोक-थाम के उपायों पर और काम करने की जरूरत है.

वाइल्डलाइफ़ एक्टिविस्ट्स ने रिपोर्ट को नेता दिखा कर कहा है कि निगरानी और इंटेलिजेंस नेटवर्क अभी भी कमजोर है. उनका आरोप है कि तीन बाघों की मौत लाइव विद्युत तार के कारण हुई, और उनमें से एक मामले में उमरिया वन विभाग की लापरवाही के कारण अभियुक्त को डिफ़ॉल्ट जमानत मिल गई थी, जिससे यह मामला और गंभीर हो गया. उन्होंने कहा है कि अगर निगरानी और बुद्धिमत्ता को मजबूत किया जाता तो इन अप्राकृतिक मौतों को रोका जा सकता था.

इस रिपोर्ट को हाईकोर्ट में पेश करने का आदेश एक वाइल्डलाइफ़ एक्टिविस्ट की याचिका पर आया था, जिसमें राज्य में बाघों की मौतों की संख्या पर चिंता जताई गई थी. याचिका में यह बताया गया था कि 2025 में राज्य भर में 54 बाघ मारे गए, जो अब तक किसी भी एक वर्ष में सबसे अधिक मृत्युदर थी. हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता पर ध्यान देते हुए विस्तृत रिपोर्ट और पोस्टमॉर्टम-संबंधित निष्कर्ष मांगे थे.

वन अधिकारियों के अनुसार, रिपोर्ट में जो चार बाघों की मौतें इलेक्ट्रोक्यूशन से हुईं, उनमें दो मौतें उमरिया वन प्रभाग और दो मौतें शहडोल उत्तर वन प्रभाग में हुईं. रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया कि इन मामलों की पड़ताल की जा चुकी है और शवों के पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से यह निष्कर्ष निकला है कि यह हादसे थे, ना कि शिकारियों की कोई साजिश.

बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व और उसके आसपास के जंगलों में बाघों की मौत को लेकर पिछले कुछ महीनों में वन्यजीव संरक्षण समुदाय में गहरी चिंता व्याप्त रही है. विशेषज्ञों ने कहा है कि करंट से मौतें वन्यजीवों के लिए एक गंभीर खतरा हैं, खासकर तब जब खुले बिजली के तार या गलत ढंग से लगाए गए सोलर फेंस जंगल के भीतर स्थापित हों. यह समस्या केवल बांधवगढ़ तक सीमित नहीं है, बल्कि विभिन्न Tiger Reserves में ऐसी अप्राकृतिक मौतों की घटनाएं समय-समय पर सामने आई हैं.

वन विभाग ने हाईकोर्ट को यह भरोसा भी दिया है कि वे आगे के लिए रोक-थाम के उपायों पर काम करेंगे, जिसमें खुले तारों को सुरक्षित करना, सोलर फेंस के मानकों की समीक्षा और जंगल क्षेत्रों में निगरानी को और अधिक प्रभावी बनाना शामिल है. उन्होंने कहा कि भविष्य में इस तरह के हादसों को रोकने के लिए टेक्नोलॉजी और पैट्रोलिंग को मजबूत करने की योजना बनाई जा रही है.

हालांकि एक्टिविस्टों का मानना है कि प्रशासन को ज़्यादा सक्रिय होना चाहिए और सिर्फ़ रिपोर्ट देने भर से काम नहीं चलेगा, क्योंकि बाघों की संख्या में हो रही गिरावट एक चिंता का विषय है. उन्होंने कहा है कि इलेक्ट्रोक्यूशन से हुई मौतों को रोकने के लिए बिजली कंपनियों और वन विभाग के बीच बेहतर तालमेल और साझा जिम्मेदारी की आवश्यकता है.

वन प्रेमियों और स्थानीय समुदायों ने भी इस रिपोर्ट को गंभीरता से लिया है और जंगल के अंदर तथा उसके आसपास के इलाकों में सुरक्षा मानकों और निगरानी को और अधिक क़ायम रखने की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी भी अप्राकृतिक मौत की आशंका को कम किया जा सके.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-