अहमदाबाद. गुजरात के खेड़ा जिले स्थित पारिएज वेटलैंड ने आर्द्रभूमि संरक्षण के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय उदाहरण पेश किया है. विश्व के सबसे ऊंचे उड़ने वाले पक्षी सारस क्रेन की संख्या यहां पिछले एक दशक में तीन गुना से अधिक बढ़ गई है. वर्ष 2015 में जहां इनकी संख्या लगभग 500 थी, वहीं 2025 तक यह बढ़कर 1,477 दर्ज की गई है. यह वृद्धि लगातार संरक्षण प्रयासों, सरकारी पहल और स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी का परिणाम मानी जा रही है.
जून 2025 में खेड़ा और आनंद जिलों में किए गए सर्वेक्षण के अनुसार कुल 1,477 सारस क्रेन दर्ज किए गए. वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पारिएज वेटलैंड में बेहतर आवास प्रबंधन, जल संरक्षण और स्थानीय किसानों के सहयोग से सारस के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हुआ है. क्षेत्र से जुड़े वनकर्मी एसवाई पठान के अनुसार, 2015 की तुलना में सारस की आबादी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और यह स्थान अब पक्षी प्रेमियों के लिए प्रमुख आकर्षण बन चुका है.
पारिएज वेटलैंड अब 120 से अधिक पक्षी प्रजातियों का घर बन चुका है. शांत वातावरण और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण यह स्थल बर्डवॉचिंग और प्रकृति पर्यटन के लिए तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. देश के विभिन्न हिस्सों से पर्यटक यहां विशेष रूप से सारस क्रेन और अन्य प्रवासी पक्षियों को देखने पहुंच रहे हैं. कई पर्यटकों ने बताया कि उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से इस स्थल के बारे में जानकारी प्राप्त की और यहां की जैव विविधता देखने आए.
पर्यटक झानवी जोशी ने कहा कि यह स्थान बेहद सुंदर और शांतिपूर्ण है, जहां प्रकृति के करीब होने का अनुभव मिलता है. वहीं, एक अन्य आगंतुक मिहिर बारोट ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा उठाए गए संरक्षणात्मक कदमों ने न केवल सारस की संख्या बढ़ाई है, बल्कि क्षेत्र को एक संभावित पर्यटन केंद्र के रूप में भी विकसित किया है.
संरक्षण प्रयासों में वन विभाग के साथ-साथ गैर-सरकारी संगठनों, छात्रों और स्थानीय किसानों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. एनजीओ द्वारा आवास संरक्षण, वैज्ञानिक निगरानी और जन-जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं. श्रोफ्स यूपीएल फाउंडेशन के प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर जतिन पटेल के अनुसार, संस्था नियमित रूप से सारस की आबादी की मॉनिटरिंग करती है और स्कूलों तथा गांवों में जागरूकता अभियान चलाती है. स्थानीय युवाओं को नेचर गाइड के रूप में प्रशिक्षित कर वैकल्पिक रोजगार के अवसर भी प्रदान किए जा रहे हैं, जिससे संरक्षण और आजीविका के बीच संतुलन स्थापित हो सके.
पारिएज वेटलैंड को अब गुजरात की व्यापक ईको-टूरिज्म रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है, जहां संरक्षण, सामुदायिक भागीदारी और पर्यटन विकास को एक साथ जोड़ा गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि सारस क्रेन की बढ़ती संख्या इस बात का संकेत है कि क्षेत्र में आवास प्रबंधन और संरक्षण उपाय प्रभावी साबित हो रहे हैं.
वन अधिकारियों और संरक्षण समूहों का कहना है कि यदि इसी तरह सामूहिक प्रयास जारी रहे तो पारिएज वेटलैंड न केवल गुजरात बल्कि देश के अन्य हिस्सों के लिए भी आर्द्रभूमि संरक्षण का मॉडल बन सकता है. सारस की यह बढ़ती आबादी पर्यावरणीय संतुलन और जैव विविधता संरक्षण की दिशा में सकारात्मक संकेत मानी जा रही है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

