आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा- देशहित के लिए तीन बच्चे जरूरी, पैरेंट्स बच्चों को समय दें

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा- देशहित के लिए तीन बच्चे जरूरी, पैरेंट्स बच्चों को समय दें

प्रेषित समय :10:43:12 AM / Fri, Feb 27th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जालंधर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर संघ प्रमुख मोहन भागवत इन दिनों पंजाब दौरे पर हैं. तीन दिवसीय दौरे के दौरान उन्होंने विभिन्न सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की और समसामयिक मुद्दों पर अपने विचार साझा किए.

देश की बदलती जनसंख्या संरचना पर बोलते हुए भागवत ने कहा कि कई अध्ययनों में यह सामने आया है कि संतुलित डेमोग्राफी के लिए परिवार में तीन बच्चों का होना बेहतर माना गया है. उन्होंने चिंता जताई कि कुछ समुदायों में जन्मदर घट रही है, जबकि अन्य में वृद्धि हो रही है, जो दीर्घकालिक दृष्टि से संतुलन का प्रश्न खड़ा कर सकती है.

पंजाब में नशे पर चिंता

पंजाब में बढ़ती नशे की समस्या पर संघ प्रमुख ने गहरी चिंता व्यक्त की. उनका कहना था कि युवाओं के नशे या आत्महत्या की ओर बढऩे के पीछे अकेलापन एक बड़ा कारण है. उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों को समय दें, उनकी असफलताओं और भावनात्मक संघर्षों को समझें तथा संवाद बनाए रखें. भागवत ने सुझाव दिया कि परिवार और समाज की मजबूत भागीदारी से ही युवाओं को नशे से दूर रखा जा सकता है.

विवाह की उम्र पर राय

संघ प्रमुख ने विवाह की आदर्श आयु पर भी विचार व्यक्त करते हुए कहा कि 19 से 25 वर्ष के बीच विवाह हो जाने से पारिवारिक स्थिरता में मदद मिल सकती है और सामाजिक समन्वय मजबूत हो सकता है. धर्म से जुड़े सवाल पर भागवत ने कहा कि हिंदू कोई संकीर्ण धार्मिक पहचान नहीं, बल्कि जीवन जीने की पद्धति है. उन्होंने कहा कि सिख, जैन और बौद्ध परंपराएं अपनी-अपनी मान्यताओं के साथ स्वतंत्र रूप से विकसित हुई हैं और परस्पर सम्मान ही भारतीय परंपरा की मूल भावना है.

संघ को जानने का आह्वान

अपने संबोधन के अंत में संघ प्रमुख ने कहा कि संघ को समझने के लिए लोग शाखाओं में आएं, प्रकल्पों से जुड़ें या समाज सेवा के कार्यों में भाग लें. उन्होंने कहा कि निस्वार्थ भाव से समाज सेवा करना ही संघ की मूल भावना को समझने का सबसे सरल तरीका है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-