नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में बनाई जा रही बहुप्रतीक्षित फिल्म 'शतक - 100 इयर्स ऑफ आरएसएस' ने अपनी सांस्कृतिक और कलात्मक यात्रा की ओर एक बड़ा कदम बढ़ाया है. रविवार को राजधानी दिल्ली स्थित केशव कुंज में आयोजित एक गरिमामय और भव्य समारोह के दौरान आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने इस फिल्म के पहले प्रेरणादायक गीत 'भगवा है अपनी पहचान' का आधिकारिक लोकार्पण किया. यह अवसर न केवल भारतीय सिनेमा के लिए बल्कि देश के सांस्कृतिक पटल के लिए भी ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि यह फिल्म संघ की स्थापना से लेकर उसके एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन बनने तक की अनकही कहानियों को पर्दे पर उतारने का प्रयास है. इस विशेष लॉन्च के दौरान मोहन भागवत ने भगवा ध्वज की महत्ता और संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलीराम हेडगेवार के जीवन मूल्यों पर प्रकाश डालते हुए इसे राष्ट्र की सेवा में समर्पित एक महान संगीत श्रद्धांजलि बताया.
गहरी दृष्टि से देखें तो 'भगवा है अपनी पहचान' केवल एक फिल्मी गाना नहीं है, बल्कि यह भारत के उस प्राचीन गौरव और त्याग का आह्वान है जिसे संघ पिछले दस दशकों से आत्मसात किए हुए है. इस गीत को अपनी जादुई और बुलंद आवाज से सजाया है प्रख्यात गायक सुखविंदर सिंह ने, जिनकी आवाज हमेशा से ही राष्ट्रीय गौरव और जोश के गीतों के लिए पहचानी जाती रही है. सुखविंदर सिंह ने इस गीत को अपनी पेशेवर प्रतिबद्धता से ऊपर उठकर एक 'राष्ट्रीय सेवा' करार दिया है. संगीत निर्देशक सनी इंदर द्वारा तैयार की गई ओजस्वी धुन और गीतकार राकेश कुमार पाल के रचे हुए प्रभावशाली शब्द श्रोताओं के भीतर देशभक्ति और सांस्कृतिक गौरव की लहर पैदा करने की क्षमता रखते हैं. गीत के बोल सीधे तौर पर अनुशासन, सामूहिक चेतना और मातृभूमि के प्रति अगाध प्रेम को प्रतिबिंबित करते हैं.
समारोह को संबोधित करते हुए सरसंघचालक मोहन भागवत ने बेहद मार्मिक और वैचारिक बातें साझा कीं. उन्होंने कहा कि डॉ. हेडगेवार का जीवन स्वयं संघ की भावना का जीता-जागता स्वरूप था, जिनका एकमात्र मंत्र 'भारत प्रथम' रहा. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि फिल्म 'शतक' और इसका यह गीत डॉ. हेडगेवार की अटूट देशभक्ति और विषम परिस्थितियों में भी विचलित न होने वाली उनकी आंतरिक शक्ति को दुनिया के सामने लाएगा. भागवत ने स्पष्ट किया कि संघ बदल नहीं रहा है बल्कि वह अपनी जड़ों से जुड़े रहकर विकसित हो रहा है. उन्होंने फिल्म की टीम को इस साहसिक और प्रभावी पहल के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह फिल्म उन गुमनाम कहानियों को उजागर करेगी जो बताती हैं कि कैसे डॉ. साहब ने लोगों को एकजुट किया और जीवन की चुनौतियों को समभाव के साथ स्वीकार किया. यह गीत उसी वैचारिक स्पष्टता का संगीत रूपांतरण है जिसे संघ का प्रत्येक स्वयंसेवक अपने जीवन में उतारता है.
फिल्म 'शतक' की निर्माण प्रक्रिया और इसके उद्देश्यों पर नजर डालें तो यह प्रोजेक्ट केवल मनोरंजन के लिए नहीं बल्कि ऐतिहासिक दस्तावेजीकरण के लिए तैयार किया गया है. अनिल डी. अग्रवाल की संकल्पना पर आधारित इस फिल्म का निर्देशन आशीष मॉल ने किया है, जबकि इसका निर्माण वीर कपूर द्वारा किया गया है. आशीष तिवारी इसके सह-निर्माता हैं. यह फिल्म 1925 में नागपुर की तंग गलियों से शुरू हुए एक छोटे से विचार के 2025-26 तक विश्व के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठन बनने की गाथा को बयां करेगी. फिल्म के माध्यम से उन प्रमुख नेताओं और कालखंडों को चित्रित किया जाएगा जिन्होंने भारत के सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक ताने-बाने को बुनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. फिल्म के निर्माताओं का मानना है कि 'भगवा है अपनी पहचान' गीत फिल्म की आत्मा है, जो भगवा रंग को केवल एक प्रतीक के रूप में नहीं बल्कि एक ऐसी पहचान के रूप में स्थापित करता है जो त्याग, सेवा और एकता का संगम है.
लोकार्पण समारोह में मौजूद गायक सुखविंदर सिंह भी काफी भावुक नजर आए. उन्होंने सरसंघचालक मोहन भागवत की उपस्थिति को अपने लिए एक आशीर्वाद बताया और कहा कि उनके विजन ने इस गीत को गाने के लिए उन्हें नई ऊर्जा दी. सुखविंदर ने निर्देशक के विजन की सराहना करते हुए कहा कि इतिहास को संजोया जाना चाहिए और यह गीत उसी गौरवशाली इतिहास की एक गूंज है. उन्होंने कहा कि जब वे इस गीत को गा रहे थे, तब उन्होंने अपने हृदय की पूरी शक्ति इसमें झोंक दी ताकि यह प्रत्येक भारतीय के दिल तक पहुँच सके. सुखविंदर के अनुसार, यह गीत हिंदुस्तान की उस सच्ची भावना को दर्शाता है जो सबको साथ लेकर चलने और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की सीख देती है.
यह फिल्म 'एडीए 360 डिग्री एलएलपी' द्वारा प्रस्तुत की जा रही है और जल्द ही सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली है. फिल्म विशेषज्ञों का मानना है कि संघ के शताब्दी वर्ष में इस प्रकार की फिल्म का आना न केवल स्वयंसेवकों के लिए बल्कि आम जनता के लिए भी जिज्ञासा का विषय होगा. 'भगवा है अपनी पहचान' गीत की लॉन्चिंग के साथ ही सोशल मीडिया पर भी इसकी चर्चा तेज हो गई है. गीत के बोलों में भगवा ध्वज को त्याग और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक बताया गया है, जो भारत के सभ्यतागत लोकाचार में गहराई से रचा-बसा है. यह गीत लोगों से मतभेदों को भुलाकर एक साझा उद्देश्य और सांस्कृतिक गौरव के तहत एकजुट होने का आह्वान करता है. कुल मिलाकर, मोहन भागवत द्वारा किया गया यह लॉन्च फिल्म 'शतक' के लिए एक शक्तिशाली प्रस्थान बिंदु साबित हुआ है, जिसने राष्ट्रीय और सांस्कृतिक विमर्श में एक नई बहस और उत्साह का संचार कर दिया है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-




