वाशिंगटन से लेकर मुंबई और टोक्यो से लेकर लंदन तक दुनिया के प्रमुख शेयर बाजारों में इन दिनों असामान्य उतार-चढ़ाव और बेचैनी का माहौल दिखाई दे रहा है। वैश्विक अर्थव्यवस्था के इस अस्थिर दौर को लेकर जहां आर्थिक विशेषज्ञ अपने-अपने विश्लेषण दे रहे हैं, वहीं ज्योतिषीय दृष्टि से भी इसे एक बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है। ज्योतिषाचार्य पंडित चंद्रशेखर नेमा हिमांशु ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जन्म कुंडली का विस्तृत अध्ययन करते हुए दावा किया है कि वर्तमान समय में उनकी कुंडली में बन रहे दुर्लभ ग्रह योग वैश्विक राजनीति के साथ-साथ विश्व अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर सकते हैं। उनके अनुसार ट्रंप की कुंडली में चंद्र-केतु और सूर्य-राहु का ग्रहण योग बन रहा है, जो बड़े और अप्रत्याशित निर्णयों की स्थिति पैदा कर सकता है।
ज्योतिषीय विश्लेषण के अनुसार जब किसी प्रभावशाली राजनीतिक नेता की कुंडली में राहु और केतु जैसे छाया ग्रह सूर्य और चंद्रमा को प्रभावित करते हैं तो उसके निर्णयों का प्रभाव दूरगामी होता है। पंडित नेमा के मुताबिक यह ग्रहण योग केवल राजनीतिक उथल-पुथल तक सीमित नहीं रहता बल्कि आर्थिक नीतियों और वैश्विक व्यापारिक ढांचे को भी प्रभावित कर सकता है। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में लिए गए फैसले कई बार अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों और आर्थिक संतुलन को अचानक बदल सकते हैं।
विश्लेषण के अनुसार ट्रंप की वृश्चिक राशि का प्रभाव भी उनकी नीतियों को प्रभावित कर रहा है। वृश्चिक राशि को ज्योतिष में तीव्र, निर्णायक और कई बार आक्रामक स्वभाव वाली राशि माना जाता है। पंडित नेमा का कहना है कि इसी कारण आर्थिक नीतियों में संरक्षणवाद यानी ‘प्रोटेक्शनिज्म’ की प्रवृत्ति मजबूत हो सकती है। इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है क्योंकि संरक्षणवादी नीतियों के चलते आयात-निर्यात पर प्रतिबंध और शुल्क बढ़ाए जा सकते हैं। इससे कई देशों के बीच व्यापारिक तनाव और प्रतिस्पर्धा बढ़ने की संभावना बनती है।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार ट्रंप की कुंडली में इस समय शनि का प्रभाव बुद्धि स्थान पर माना जा रहा है। शनि का प्रभाव व्यक्ति को कठोर और दृढ़ निर्णय लेने के लिए प्रेरित करता है। पंडित नेमा के अनुसार यही कारण है कि आर्थिक और व्यापारिक नीतियों में अचानक बदलाव या कड़े कदम उठाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। उनका कहना है कि यदि ऐसी नीतियां लागू होती हैं तो इसका प्रभाव अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक और अन्य वैश्विक वित्तीय संस्थाओं पर भी पड़ सकता है।
इसके साथ ही गुरु ग्रह की स्थिति को भी ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। पंडित नेमा के अनुसार ट्रंप की कुंडली में गुरु का अष्टम स्थान में होना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अस्थिरता का संकेत देता है। अष्टम भाव को ज्योतिष में अचानक परिवर्तन, छिपे संकट और अप्रत्याशित घटनाओं का भाव माना जाता है। ऐसे में शेयर बाजारों में अचानक गिरावट, वित्तीय घोटाले या अंतरराष्ट्रीय आर्थिक विवाद जैसी परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं।
वैश्विक बाजारों के साथ-साथ इस स्थिति का सबसे बड़ा प्रभाव एशियाई अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। एशिया के कई देश निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था पर निर्भर हैं। चीन, भारत, जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे देशों का बड़ा हिस्सा अमेरिकी बाजार से जुड़ा हुआ है। यदि अमेरिका की आर्थिक नीतियों में अचानक बदलाव होता है तो इन देशों के निर्यात और निवेश पर सीधा असर पड़ सकता है।
विशेष रूप से एशियाई शेयर बाजारों में अस्थिरता बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। मुंबई, टोक्यो, सिंगापुर, हांगकांग और शंघाई के बाजारों में विदेशी निवेशकों की बड़ी भूमिका होती है। यदि वैश्विक निवेशकों के बीच अनिश्चितता बढ़ती है तो पूंजी का प्रवाह कम हो सकता है। इससे शेयर बाजारों में गिरावट और निवेशकों के भरोसे में कमी देखने को मिल सकती है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्थिति में एशियाई देशों की केंद्रीय बैंकों को अपनी मौद्रिक नीतियों में सतर्कता बरतनी पड़ सकती है।
सूचना प्रौद्योगिकी और सेवा क्षेत्र में भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है। भारत जैसे देशों की आईटी कंपनियां बड़े पैमाने पर अमेरिकी बाजार पर निर्भर हैं। यदि व्यापारिक नियमों या वीजा नीतियों में बदलाव होता है तो इसका असर इस क्षेत्र की कंपनियों के कारोबार पर पड़ सकता है। इसी तरह चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया के विनिर्माण क्षेत्र पर भी वैश्विक व्यापार युद्ध का असर पड़ सकता है।
पंडित चंद्रशेखर नेमा हिमांशु का कहना है कि यह स्थिति लंबे समय तक नहीं रहने वाली है। उनके अनुसार 11 मार्च के बाद गुरु ग्रह के मार्गी होने से परिस्थितियों में धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिल सकते हैं। गुरु को ज्योतिष में ज्ञान, संतुलन और विवेक का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में इसके मार्गी होने से आर्थिक नीतियों में संतुलन आने की संभावना मानी जा रही है।
हालांकि मार्च से जून तक का समय वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों और वित्तीय संस्थाओं को बाजार की अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए कई कदम उठाने पड़ सकते हैं। निवेशकों के बीच भी इस समय सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है क्योंकि अचानक होने वाले उतार-चढ़ाव से बाजार प्रभावित हो सकते हैं।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार जून 2026 के बाद स्थिति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। पंडित नेमा के अनुसार उस समय ग्रहों का प्रभाव अपेक्षाकृत शांत हो जाएगा और ट्रंप की नीतियों में भी नरमी आने की संभावना बनेगी। इससे वैश्विक व्यापार में स्थिरता और सहयोग का माहौल बनने की उम्मीद की जा सकती है।
जून 2026 के बाद लगभग एक वर्ष का समय वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अपेक्षाकृत सकारात्मक माना जा रहा है। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक प्रतिबंधों में ढील, निवेश के अवसरों में वृद्धि और बाजारों में स्थिरता देखने को मिल सकती है। एशियाई बाजारों के लिए भी यह समय राहत लेकर आ सकता है क्योंकि निवेशकों का भरोसा धीरे-धीरे लौटने की संभावना जताई जा रही है।
फिलहाल वैश्विक निवेशक और आर्थिक विशेषज्ञ आने वाले महीनों की परिस्थितियों पर नजर बनाए हुए हैं। बाजार में उतार-चढ़ाव के इस दौर में सावधानी और रणनीतिक निर्णयों को ही सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि वैश्विक राजनीति और आर्थिक नीतियों के साथ-साथ ग्रहों की चाल को लेकर किए जा रहे ये ज्योतिषीय विश्लेषण किस हद तक सही साबित होते हैं। तब तक दुनिया भर के बाजार अनिश्चितता के इस दौर में संतुलन बनाए रखने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं।
*पंडित चंद्रशेखर नेमा हिमांशु*(9893280184)
मां कामाख्या साधक जन्म कुंडली विशेषज्ञ वास्तु शास्त्री
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

