कर्नाटक में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया हुआ बैन, सीएम सिद्धारमैया ने किया ऐलान

कर्नाटक में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया हुआ बैन, सीएम सिद्धारमैया ने किया ऐलान

प्रेषित समय :19:48:16 PM / Fri, Mar 6th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

बेंगलुरु. कर्नाटक सरकार ने बच्चों में बढ़ती डिजिटल लत और मोबाइल के साइड इफेक्ट्स के लेकर बड़ा कदम उठाया है. कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बजट भाषण के दौरान 16 साल के उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर बैन (प्रतिबंध) लगाने की घोषणा की है.

कर्नाटक विधानसभा में बजट पेश करते हुए सीएम सिद्धारमैया ने कहा कि राज्य सरकार ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर बैन लगाने की दिशा में काम करेगी. उन्होंने कहा कि बच्चों की मानसिक सेहत, पढ़ाई पर असर, और डिजिटल लत को देखते हुए ये फैसला जरूरी हो गया है. सरकार का मानना है कि अनियंत्रित स्क्रीन टाइम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बच्चों के व्यवहार, ध्यान क्षमता और सुरक्षा पर गभीर असर डाल रहा है.  

बच्चों को डिजिटल लत से बचाने की पहल

कर्नाटक सरकार का कहना है कि कम उम्र में सोशल मीडिया का ज्यागा इस्तेमाल बच्चों की सोचने-समझने की क्षमता औपर पढ़ाई पर नकारात्मक प्रभाव डालता है. इसी वजह से सरकार ये सुनिश्चित करना चाहती है कि 16 साल के कम उम्र वाले बच्चे सोशल मीडिया के जोखिमपूर्ण और अनुचित प्रभावों से दूर रहें. सरकार का लक्ष्य बच्चों को सुरक्षित डिजिटल माहौल देना और उन्हे मोबाइल फोल की लत से बचाना है.  

विशेषज्ञों और विश्वविद्यालयों से ली गई राय

सीएम सिद्धारमैया ने बताया कि हाल ही में उन्होंने यूनिवर्सिटियों के वाइस चांसलर के साथ बैठक की थी. इस बैठक में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के मोबाइल फोन इस्तेमाल पर रोक लगाने को लेकर उनकी राय मांगी गई थी. इससे पहले राज्य के हेल्थ मिनिस्टर दिनेश गुंडू राव और  मिनिस्टर प्रियांक खरगे भी बच्चों मे बढ़ती मोबाइल लत को लेकर चिंता जता चुके हैं. इसके बाद सरकार ने इस दिशा में सख्त कदम उठाने का फैसला लिया.  

आंध्र प्रदेश भी कर रहा कड़े नियमों पर विचार

बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को लेकर सिर्फ कर्नाटक तक सीमित नहीं है. आंध्र प्रदेश सरकार भी इस मुद्दे पर सख्त नियम बनाने की तैयारी कर रही है. राज्य मंत्री नारा लोकेश ने कहा था कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भरोसा धीरे-धीरे कम हो रहा है और बच्चे लगातार इसके इस्तेमाल पर फंसता जा रहा है. 

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-