जबलपुर. मध्य प्रदेश के कृषि इतिहास में आज का दिन स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया है क्योंकि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सूबे के अन्नदाताओं की झोली खुशियों से भर दी है. संस्कारधानी जबलपुर की पावन धरा से पूरे प्रदेश के किसानों के लिए एक ऐसी घोषणा की गई है जिसने खेती-किसानी के भविष्य को नई दिशा प्रदान कर दी है. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से ऐलान किया है कि इस बार गेहूं की सरकारी खरीदी पर किसानों को प्रति क्विंटल 40 रुपये का अतिरिक्त बोनस दिया जाएगा. यह कदम न केवल किसानों की आय में वृद्धि करेगा बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से और अधिक सशक्त बनाएगा.
बोनस की यह राशि न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी के अतिरिक्त होगी जिससे सीधे तौर पर जबलपुर संभाग सहित पूरे प्रदेश के लाखों किसान लाभान्वित होंगे. केवल गेहूं ही नहीं बल्कि दलहन की खेती करने वाले किसानों के लिए भी मुख्यमंत्री ने दरियादिली दिखाते हुए उड़द की फसल पर प्रति क्विंटल 600 रुपये का भारी-भरकम बोनस देने का निर्णय लिया है. जबलपुर संभाग जो अपनी उपजाऊ भूमि और मेहनतकश किसानों के लिए जाना जाता है वहां गेहूं की सरकारी खरीदी की प्रक्रिया आगामी 23 मार्च से विधिवत रूप से प्रारंभ कर दी जाएगी. प्रशासन ने इस बार खरीदी केंद्रों पर पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं ताकि किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए कतारों में न खड़ा होना पड़े और न ही उन्हें किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना करना पड़े.
मुख्यमंत्री के इस फैसले के बाद पूरे जबलपुर संभाग में उत्साह का माहौल है और ग्रामीण अंचलों में जश्न जैसा दृश्य दिखाई दे रहा है. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि प्रति क्विंटल 40 रुपये का बोनस सुनने में भले ही एक छोटी राशि लगे लेकिन जब इसे व्यापक स्तर पर देखा जाता है तो यह किसानों की लागत और मुनाफे के बीच एक मजबूत सेतु का काम करती है. विशेषकर उड़द पर 600 रुपये का बोनस देना सरकार की उस मंशा को दर्शाता है जिसमें वह पारंपरिक फसलों के साथ-साथ दलहन और तिलहन को भी बढ़ावा देना चाहती है. जबलपुर के संभागीय आयुक्त और कलेक्टर ने मुख्यमंत्री की इस घोषणा के तत्काल बाद खरीदी केंद्रों की समीक्षा शुरू कर दी है. 23 मार्च की तारीख को ध्यान में रखते हुए बारदाना, तौल मशीनें और गोदामों की व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जा रहा है.
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में साफ कहा कि उनकी सरकार किसानों की सरकार है और हरदा से लेकर जबलपुर तक और ग्वालियर से लेकर बस्तर की सीमाओं तक फैला मध्य प्रदेश का हर किसान उनकी प्राथमिकता में है. उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि भुगतान की प्रक्रिया को बेहद पारदर्शी बनाया गया है और किसानों के बैंक खातों में बोनस और एमएसपी की राशि बिना किसी बिचौलिए के सीधे हस्तांतरित की जाएगी. यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब किसान रबी की फसल की कटाई की तैयारी कर रहे हैं और बाजार में उतार-चढ़ाव को लेकर आशंकित थे. सरकार के इस हस्तक्षेप ने बाजार की अनिश्चितता को खत्म कर दिया है. जबलपुर संभाग के अंतर्गत आने वाले जिलों जैसे कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा और सिवनी में भी इस आदेश के बाद कृषि उपज मंडियों में हलचल तेज हो गई है. स्थानीय किसान नेताओं ने सरकार के इस कदम का स्वागत करते हुए इसे खेती को लाभ का धंधा बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम बताया है.
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कड़े लहजे में हिदायत दी है कि खरीदी केंद्रों पर किसानों के बैठने, पीने के पानी और छाया की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए ताकि चिलचिलाती धूप में अन्नदाता को कोई कष्ट न हो. जबलपुर में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने आधुनिक कृषि यंत्रों और उन्नत बीजों के प्रयोग पर भी जोर दिया ताकि भविष्य में उत्पादन लागत को और कम किया जा सके. 23 मार्च से शुरू होने वाली इस महा-खरीदी अभियान की निगरानी के लिए एक कंट्रोल रूम भी स्थापित किया जा रहा है जो सीधे भोपाल से जुड़ा होगा. इस पूरे घटनाक्रम ने यह सिद्ध कर दिया है कि मध्य प्रदेश सरकार का विजन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है और किसानों के पसीने की हर बूंद की सही कीमत चुकाना उनकी नैतिकता का हिस्सा है. जबलपुर की इस ऐतिहासिक घोषणा के बाद अब सभी की निगाहें 23 मार्च पर टिकी हैं जब मंडियों में गेहूं की सुनहरी फसल के साथ खुशहाली की नई इबारत लिखी जाएगी.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

