जबलपुर.संस्कारधानी जबलपुर समेत पूरे प्रदेश के लिए आज का दिन भारी चिंता और वैश्विक अनिश्चितता के साये में बीता है क्योंकि ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने खाड़ी देशों में रह रहे भारतीय नागरिकों, विशेषकर जबलपुर के निवासियों की सुरक्षा पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। खाड़ी देशों में रोजगार, व्यापार और पर्यटन के सिलसिले में गए जबलपुर संभाग के सैकड़ों परिवार वर्तमान में वहां उपजे युद्ध जैसे हालात और हवाई क्षेत्र के बंद होने के कारण फंस गए हैं। इस संकट की घड़ी में मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार ने संवेदनशीलता दिखाते हुए नई दिल्ली स्थित मध्य प्रदेश भवन में एक समर्पित 24x7 कंट्रोल रूम स्थापित किया है ताकि फंसे हुए नागरिकों और उनके परिजनों को तत्काल सहायता प्रदान की जा सके। जबलपुर के मदन महल, राइट टाउन, विजय नगर और अधारताल जैसे क्षेत्रों से ताल्लुक रखने वाले कई परिवारों ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी व्यथा साझा की है, जिसमें बताया गया है कि दुबई, दोहा, मस्कट और अबू धाबी जैसे शहरों में उड़ानों के रद्द होने और हवाई हमलों के खतरे के कारण वे अपने घर लौटने में असमर्थ हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वयं इस स्थिति की कमान संभालते हुए स्पष्ट किया है कि प्रदेश सरकार केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय के साथ निरंतर संपर्क में है ताकि हर एक नागरिक की सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित की जा सके। प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर सहायता के लिए टेलीफोन नंबर 011-26772005, व्हाट्सएप नंबर 9818963273 और ईमेल आईडी mphelpdeskgulf@gmail.com जारी किए हैं, जिन्हें सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित किया जा रहा है। जबलपुर जिला प्रशासन और कलेक्टर को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने जिले के उन परिवारों की सूची तैयार करें जिनके सदस्य वर्तमान में खाड़ी देशों में हैं और उन्हें हर संभव मनोवैज्ञानिक और प्रशासनिक ढांचा उपलब्ध कराएं। रिपोर्टों के अनुसार, जबलपुर के कम से कम चार बड़े व्यापारिक घरानों के परिवार और दर्जनों छात्र दुबई में फंसे हुए हैं, जहां मिसाइल हमलों के बाद स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। परिजनों की रातों की नींद उड़ गई है और वे लगातार वीडियो कॉल और सोशल मीडिया के जरिए अपने प्रियजनों का हालचाल जान रहे हैं।
मध्य प्रदेश सरकार के इस त्वरित कदम के तहत सीएम हेल्पलाइन 181 को भी सक्रिय कर दिया गया है, जहां अब तक करीब 50 से अधिक परिवारों ने अपना पंजीकरण कराया है। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार पहले भी यूक्रेन और सूडान जैसे संकटों से भारतीयों को सुरक्षित निकाल चुकी है, इसलिए घबराने की आवश्यकता नहीं है। सरकार न केवल वापसी के प्रबंध कर रही है, बल्कि वहां फंसे लोगों के लिए भोजन और अन्य आवश्यक सुविधाओं हेतु भारतीय दूतावासों के माध्यम से समन्वय स्थापित कर रही है। जबलपुर संभाग के ग्रामीण अंचलों से भी कई युवा जो मजदूरी और तकनीकी कार्यों के लिए खाड़ी देशों में हैं, उनके परिजनों ने भी स्थानीय जनप्रतिनिधियों से मदद की गुहार लगाई है। वैश्विक स्तर पर होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने की खबरों ने तनाव और बढ़ा दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय विमानन सेवाएं ठप हो गई हैं। ऐसी स्थिति में, सरकार का यह कंट्रोल रूम एक आशा की किरण बनकर उभरा है। आने वाले दिनों में यदि स्थिति में सुधार नहीं होता है, तो भारत सरकार विशेष चार्टर्ड उड़ानों के विकल्प पर भी विचार कर सकती है। फिलहाल, जबलपुर के लोग अपने परिजनों की सलामती के लिए दुआएं मांग रहे हैं और सरकारी निर्देशों का पालन करते हुए संयम बनाए हुए हैं।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

