एमपी के परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह को राष्ट्रीय ध्वज के अपमान मामले में कोर्ट का नोटिस

एमपी के परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह को राष्ट्रीय ध्वज के अपमान मामले में कोर्ट का नोटिस

प्रेषित समय :21:33:21 PM / Fri, Mar 6th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. प्रदेश के परिवहन और स्कूल शिक्षा मंत्री के खिलाफ जबलपुर कोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया है. मामला तिरंगा ध्वज के अपमान से जुड़ा हुआ है, जिस पर परिवाद दायर करते हुए कोर्ट को बताया कि मंत्री राव ने रैली के दौरान अपनी खुली जीप में तिरंगा ध्वज को बोनट पर चिपकाया था, इसके साथ ही एक राष्ट्रीय ध्वज जीप पर खड़े शख्स के पैर में जाकर टच हो रहा था, जो कि अपत्ति और अपमानजनक है. विशेष न्यायालय(सांसद/ विधायक मामले) ने मंत्री राव उदय प्रताप सिंह को 7 अप्रैल 2026 को पेश होने निर्देश दिए है.

कोर्ट ने पूछा- मामला क्यों न दर्ज हो

न्यायाधीश डी पी सूत्रकार की कोर्ट ने महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए मंत्री राव उदय प्रताप सिंह को नोटिस जारी कर उनसे स्पष्टीकरण मांगा है, इसके साथ ही कहा कि राष्ट्रीय ध्वज के अपमान के अपराध में प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश क्यों न दिया जाए. मामला नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव निवासी कोशल द्वारा दायर परिवाद पर आधारित है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2024 आयोजित एक तिरंगा यात्रा के दौरान राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे झंडे का अनादर किया गया.

3 वर्ष की सजा का प्रावधान

मंत्री राव उदय प्रताप सिंह के खिलाफ परिवाद दायर करने वाले कौशल सिलावट निवासी नरसिंहपुर ने बताया कि 11 अगस्त 2024 को गाडरवारा (नरसिंहपुर) में 'तिरंगा यात्रा का आयोजन किया गया था, जिसका नेतृत्व मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने किया. आरोप है कि इस दौरान मंत्री एक खुली जीप के बोनट पर आसीन होकर जनता को संबोधित कर रहे थे, और राष्ट्रीय ध्वज को जीप के बोनट पर इस प्रकार आच्छादित कर दिया गया था कि वह झुक रहा था. और उनके पांव को स्पर्श कर रहा था. यह स्थिति राष्ट्रीय गौरव का अपमान निवारण अधिनियम, 1971 की धारा 2 के स्पष्टीकरण का स्पष्ट उल्लंघन है, जिसके अनुसार वाहन के बोनट, छत या किसी अन्य भाग पर राष्ट्रीय ध्वज को ढकना या इस प्रकार रखना गलत है. यह कृत्य तिरंगे झंडे की गरिमा को प्रभावित करता है. यह अपराध है, जिसमें तीन वर्ष तक का कारावास का प्रावधान है.

थाना प्रभारी ने शिकायत लेने से इंकार किया

परिवादी ने कोर्ट को बताया कि इस घटना की शिकायत थाना गाडरवारा में की है, लेकिन पुलिस ने मंत्री के पद होने के कारण एफआईआर दर्ज नहीं की. इसके बाद पुलिस अधीक्षक, नरसिंहपुर को भी कई बार लिखित शिकायतें भेजी गईं, किन्तु कोई कार्यवाही नहीं हुई और जब पंजीकृत डाक से पुलिस थाना प्रभारी गाडरवारा को शिकायत भेजी गई तो उन्होंने लेने से अस्वीकार कर दिया जो कि उनके वैधानिक कर्तव्यों के विपरीत है.

परिवादी ने ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार (2014) के सर्वोच्च न्यायालय के उस अभिनिर्णय का हवाला दिया, जिसमें यह स्पष्ट किया गया है कि संज्ञेय अपराध की सूचना पर प्राथमिकी दर्ज करना पुलिस का अनिवार्य कर्तव्य है. परिवादी के बयान और प्रस्तुत साक्ष्य के साथ ही घटना की तस्वीरें, मीडिया क्लिपिंग, डाक अस्वीकार की ट्रैकिंग रिपोर्ट और विभिन्न प्राधिकारियों को भेजी गई शिकायतों की प्रतियां शामिल हैं. कोर्ट ने मामले को गंभीरता से विचार करते हुए विशेष न्यायालय ने मंत्री राव उदय प्रताप सिंह को नोटिस जारी करने का आदेश दिया है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-