हॉलीवुड अभिनेत्री रोसाना अर्क्वेट ()Rosanna Arquette ने मशहूर फिल्म निर्माता Quentin Tarantino की फिल्मों में नस्लीय अपशब्द के बार-बार इस्तेमाल को लेकर कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि निर्देशक अपनी फिल्मों में जिस तरह उस शब्द का उपयोग करते हैं, वह “कला नहीं बल्कि नस्लवादी और डरावना” है। यह बयान उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान दिया, जिसमें उन्होंने 1994 की चर्चित फिल्म Pulp Fiction में काम करने के अपने अनुभव को भी याद किया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, रोसाना अर्क्वेट ने इंटरव्यू में कहा कि भले ही “पल्प फिक्शन” को सिनेमा की दुनिया में एक आइकॉनिक और प्रभावशाली फिल्म माना जाता है, लेकिन वह निर्देशक के संवाद लिखने के तरीके से सहमत नहीं हैं। खास तौर पर फिल्मों में नस्लीय अपशब्द के बार-बार इस्तेमाल को लेकर उन्होंने असहमति जताई। अभिनेत्री का कहना है कि यह शब्द फिल्मों में इतनी बार सुनाई देता है कि अब यह असहज और परेशान करने वाला लगता है।
अर्क्वेट ने कहा कि “पल्प फिक्शन कई मायनों में शानदार और प्रभावशाली फिल्म है, लेकिन व्यक्तिगत तौर पर मैं उस शब्द के इस्तेमाल से पूरी तरह तंग आ चुकी हूं। मुझे यह बिल्कुल पसंद नहीं है।” उन्होंने आगे कहा कि उन्हें यह समझ नहीं आता कि निर्देशक को इस तरह की भाषा के लिए हमेशा छूट क्यों मिलती रही है। उनके अनुसार, “यह कला नहीं है, यह सिर्फ नस्लवादी और डरावना लगता है।”
दरअसल, यह बहस नई नहीं है। पिछले कई वर्षों से क्वेंटिन टारनटिनो की फिल्मों में नस्लीय भाषा के इस्तेमाल को लेकर लगातार चर्चा होती रही है। उनकी कई फिल्मों में यह शब्द बार-बार सुनाई देता है, जिनमें The Hateful Eight, Django Unchained और Jackie Brown जैसी फिल्में शामिल हैं। आलोचकों का कहना है कि निर्देशक इसे जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, जबकि समर्थकों का तर्क है कि यह पात्रों और ऐतिहासिक संदर्भों को वास्तविक बनाने के लिए किया जाता है।
इस मुद्दे पर हॉलीवुड के कई अन्य फिल्मकार भी पहले खुलकर बोल चुके हैं। प्रसिद्ध निर्देशक Spike Lee ने 1997 में ही टारनटिनो की फिल्मों में इस शब्द के इस्तेमाल पर सवाल उठाए थे। उस समय “जैकी ब्राउन” रिलीज हुई थी और उसी दौरान स्पाइक ली ने कहा था कि टारनटिनो को इस शब्द के प्रति एक तरह का आकर्षण है।
स्पाइक ली ने उस समय कहा था कि हर अफ्रीकी-अमेरिकी इस शब्द को “ट्रेंडी” या “स्टाइलिश” नहीं मानता। उन्होंने यह भी कहा कि टारनटिनो की शुरुआती फिल्मों, जैसे Reservoir Dogs और “पल्प फिक्शन”, में भी इस तरह की भाषा का इस्तेमाल देखा गया है। ली का मानना था कि इस शब्द का अत्यधिक प्रयोग अनावश्यक है और इससे नस्लीय संवेदनशीलता पर असर पड़ सकता है।
हाल के वर्षों में भी यह विवाद थमा नहीं है। फिल्म निर्देशक Lee Daniels ने भी टारनटिनो के बयान पर आपत्ति जताई थी। टारनटिनो ने एक इंटरव्यू में कहा था कि यदि किसी दर्शक को उनकी फिल्मों की रचनात्मक पसंद पसंद नहीं है, तो वह उनकी फिल्में देखने के बजाय कुछ और देख सकता है। इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए ली डेनियल्स ने कहा था कि यह जवाब सही नहीं है और निर्देशक को इस मुद्दे पर अधिक संवेदनशील होना चाहिए।
हालांकि टारनटिनो के समर्थन में भी कई लोग सामने आए हैं। अभिनेता Samuel L. Jackson, जिन्होंने “पल्प फिक्शन” और “जैंगो अनचेनड” जैसी फिल्मों में टारनटिनो के साथ काम किया है, ने पहले कहा था कि निर्देशक की आलोचना अक्सर अनुचित तरीके से की जाती है। उनके मुताबिक टारनटिनो अपने पात्रों को वास्तविक बनाने के लिए जिस भाषा का इस्तेमाल करते हैं, वह कहानी और समयकाल के अनुरूप होती है।
सैमुअल एल जैक्सन ने 2022 के एक इंटरव्यू में कहा था कि कई बार अन्य निर्देशकों की फिल्मों में इसी तरह की भाषा का इस्तेमाल होने पर उसे अलग नजरिए से देखा जाता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब कुछ अन्य निर्देशक, जैसे Steve McQueen, अपने प्रोजेक्ट्स में ऐसी भाषा का प्रयोग करते हैं तो उसे “कलात्मक अभिव्यक्ति” के रूप में देखा जाता है, जबकि टारनटिनो को ज्यादा कठोर आलोचना का सामना करना पड़ता है।
क्वेंटिन टारनटिनो लंबे समय से हॉलीवुड के सबसे प्रभावशाली और चर्चित निर्देशकों में गिने जाते हैं। उनकी फिल्मों की पहचान तेज संवाद, अनोखी कहानी कहने की शैली और यादगार किरदारों से होती है। हालांकि उनके काम को लेकर विवाद भी कम नहीं रहे हैं, खासकर हिंसा और भाषा के प्रयोग को लेकर।
रोसाना अर्क्वेट के ताजा बयान के बाद यह बहस एक बार फिर तेज हो गई है कि फिल्मों में रचनात्मक स्वतंत्रता की सीमा क्या होनी चाहिए और क्या ऐतिहासिक या कहानी के संदर्भ में इस्तेमाल की गई विवादित भाषा को स्वीकार किया जाना चाहिए। फिल्म उद्योग में इस मुद्दे पर अलग-अलग राय मौजूद है और यह बहस आने वाले समय में भी जारी रहने की संभावना है।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

