ममता बनर्जी की नाराजगी के बाद कानून मंत्रालय से हटाए गए टीएमसी नेता मोलॉय घटक कौन हैं

ममता बनर्जी की नाराजगी के बाद कानून मंत्रालय से हटाए गए टीएमसी नेता मोलॉय घटक कौन हैं

प्रेषित समय :21:00:02 PM / Thu, Mar 12th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

कोलकाता. पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम के तहत तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्य सरकार के मंत्री मोलॉय घटक को कानून मंत्रालय से हटा दिया गया है. मुख्यमंत्री Mamata Banerjee के इस फैसले को पार्टी के भीतर अनुशासनात्मक कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है. हालांकि उन्हें पूरी तरह मंत्रिमंडल से बाहर नहीं किया गया है और वे अब भी श्रम विभाग के मंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाते रहेंगे. इस निर्णय के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर मोलॉय घटक कौन हैं और राज्य की राजनीति में उनका क्या प्रभाव रहा है.

करीब 70 वर्षीय Moloy Ghatak पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्धमान जिले के आसनसोल उत्तर से विधायक हैं और लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में गिने जाते रहे हैं. वे पेशे से तीसरी पीढ़ी के वकील हैं और उनका परिवार लंबे समय से कानून के क्षेत्र से जुड़ा रहा है. हाल ही में हुए वेस्ट बंगाल बार काउंसिल चुनाव के दौरान उनके व्यवहार को लेकर मुख्यमंत्री की नाराजगी सामने आई. पार्टी सूत्रों के अनुसार चुनाव से पहले मुख्यमंत्री को शिकायत मिली थी कि घटक चुनाव में वकीलों के विपक्षी गुट को अप्रत्यक्ष समर्थन दे रहे थे. इसी के बाद मुख्यमंत्री ने उन्हें कानून मंत्री पद से हटाने का फैसला लिया.

पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री कुछ समय से घटक के कामकाज से भी संतुष्ट नहीं थीं. आरोप है कि राज्य सरकार से जुड़े कई मामलों को वे सुप्रीम कोर्ट में प्रभावी तरीके से संभालने में असफल रहे. इसके अलावा पार्टी के कुछ ट्रेड यूनियन नेताओं ने भी श्रमिकों से जुड़े मुद्दों के प्रबंधन को लेकर शिकायत की थी. हालांकि विधानसभा चुनाव नजदीक होने के कारण मुख्यमंत्री ने उन्हें पूरी तरह मंत्रिमंडल से हटाने के बजाय केवल कानून मंत्रालय की जिम्मेदारी उनसे वापस ले ली.

मोलॉय घटक का राजनीतिक सफर काफी लंबा और उतार-चढ़ाव भरा रहा है. उनका जन्म 1956 में पश्चिम बर्धमान जिले के उखरा में हुआ था. उन्होंने जलपाईगुड़ी के आनंद चंद्र कॉलेज से राजनीति विज्ञान में स्नातक की पढ़ाई की और इसके बाद 1982 में कलकत्ता विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री हासिल की. उनके पिता फणी भूषण घटक भी वकील थे और उनके चार भाइयों में से तीन भी राजनीति से जुड़े रहे हैं.

राजनीति में आने से पहले मोलॉय घटक आसनसोल की अदालत में वकालत किया करते थे. उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस पार्टी से की थी, लेकिन जब Mamata Banerjee ने 1998 में कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की तो घटक भी उनके साथ नए राजनीतिक दल में शामिल हो गए. इसके बाद उन्होंने पश्चिम बर्धमान जिले और खास तौर पर आसनसोल क्षेत्र में पार्टी संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

तृणमूल कांग्रेस के शुरुआती दौर में घटक उन नेताओं में शामिल थे जिन्होंने आसनसोल और आसपास के क्षेत्रों में पार्टी का आधार तैयार किया. पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के अनुसार वे इलाके के हर क्षेत्र से अच्छी तरह परिचित हैं और संगठन को खड़ा करने में उनका बड़ा योगदान रहा है. इसी वजह से उन्हें लंबे समय तक मुख्यमंत्री का भरोसेमंद सहयोगी माना जाता रहा.

घटक पहली बार 2001 में विधानसभा चुनाव जीतकर विधायक बने थे. हालांकि 2006 के चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा. वाम मोर्चा सरकार के दौर में उन्होंने कई लोकसभा चुनाव भी लड़े, लेकिन जीत हासिल नहीं कर सके. इसके बावजूद उन्होंने क्षेत्र में अपनी राजनीतिक सक्रियता बनाए रखी और पार्टी संगठन में मजबूत पकड़ बनाए रखी.

2011 के विधानसभा चुनाव में जब तृणमूल कांग्रेस ने पहली बार पश्चिम बंगाल में सत्ता हासिल की तो मोलॉय घटक ने आसनसोल उत्तर सीट से जीत दर्ज की. इसके बाद उन्होंने 2016 और 2021 के विधानसभा चुनावों में भी इस सीट को बरकरार रखा. 2012 में उन्हें पहली बार राज्य मंत्रिमंडल में जगह मिली और उन्हें कृषि मंत्री बनाया गया. बाद में 2014 में उनके विभाग में बदलाव करते हुए उन्हें कानून और श्रम विभाग की जिम्मेदारी दी गई.

समय-समय पर उनके विभागों में फेरबदल भी होता रहा. 2021 में तृणमूल कांग्रेस सरकार के तीसरी बार सत्ता में आने के बाद उन्हें लोक निर्माण विभाग की जिम्मेदारी भी दी गई थी, हालांकि बाद में यह विभाग उनसे वापस ले लिया गया और वे केवल श्रम विभाग के मंत्री के रूप में कार्य करने लगे.

राजनीतिक जीवन के दौरान मोलॉय घटक कई विवादों में भी घिरे रहे हैं. 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान आसनसोल सीट को लेकर पार्टी के भीतर उनका मतभेद सामने आया था. उस समय वे खुद उस सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन पार्टी ने डोला सेन को उम्मीदवार बनाया था. बाद में भाजपा उम्मीदवार Babul Supriyo के जीतने के बाद घटक पर यह आरोप भी लगा था कि उन्होंने पार्टी उम्मीदवार के लिए पर्याप्त प्रचार नहीं किया. हालांकि बाद में दोनों नेताओं के बीच मतभेद खत्म हो गए थे.

2022 में कोयला तस्करी से जुड़े एक मामले में भी केंद्रीय जांच एजेंसी ने उनके ठिकानों पर छापेमारी की थी. उस समय केंद्रीय जांच ब्यूरो ने आसनसोल और कोलकाता में उनके कई ठिकानों पर कार्रवाई की थी और उन्हें प्रवर्तन निदेशालय द्वारा पूछताछ के लिए भी बुलाया गया था. हालांकि घटक ने इन सभी आरोपों से इनकार किया था और खुद को निर्दोष बताया था.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मोलॉय घटक पश्चिम बर्धमान जिले की राजनीति में अब भी एक प्रभावशाली नेता माने जाते हैं. उन्होंने लंबे समय तक संगठन को मजबूत करने और चुनावी रणनीति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. हालांकि हालिया घटनाक्रम के बाद यह साफ हो गया है कि पार्टी नेतृत्व उनके कामकाज पर सख्त नजर रखे हुए है.

फिलहाल कानून मंत्रालय से हटाए जाने के बाद भी मोलॉय घटक राज्य मंत्रिमंडल में बने हुए हैं और श्रम विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी में उनकी भूमिका और राजनीतिक स्थिति किस दिशा में आगे बढ़ती है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-