ईरान युद्ध के बीच तेल महंगा होने से इंडिगो ने टिकटों पर लगाया ईंधन शुल्क, यात्रियों पर बढ़ेगा किराए का बोझ

ईरान युद्ध के बीच तेल महंगा होने से इंडिगो ने टिकटों पर लगाया ईंधन शुल्क, यात्रियों पर बढ़ेगा किराए का बोझ

प्रेषित समय :22:13:03 PM / Fri, Mar 13th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल का असर अब विमान यात्रा पर भी दिखाई देने लगा है। देश की प्रमुख विमानन कंपनी इंडिगो ने घोषणा की है कि वह 14 मार्च 2026 से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के टिकटों पर अतिरिक्त ईंधन शुल्क लगाएगी। कंपनी का कहना है कि वैश्विक स्तर पर विमान ईंधन की कीमतों में अचानक आई तेज बढ़ोतरी के कारण यह फैसला लेना पड़ा है।

कंपनी का संचालन करने वाली InterGlobe Aviation ने बताया कि हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, विशेष रूप से Iran से जुड़े संघर्ष के कारण ऊर्जा बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। इस स्थिति के चलते विमान ईंधन की कीमतों में तेज वृद्धि हुई है, जिसका सीधा असर विमानन कंपनियों की लागत पर पड़ा है।

उद्योग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार वैश्विक विमान ईंधन की कीमतों पर नजर रखने वाली संस्था International Air Transport Association के जेट फ्यूल मॉनिटर के मुताबिक हाल के समय में विमान ईंधन की कीमतों में 85 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विमानन क्षेत्र में ईंधन लागत सबसे बड़े खर्चों में से एक मानी जाती है और आमतौर पर यह किसी भी एयरलाइन की कुल परिचालन लागत का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा होती है।

इंडिगो ने कहा कि विमान ईंधन की कीमतों में आई इस अचानक और तेज बढ़ोतरी का कंपनी की लागत संरचना पर सीधा असर पड़ा है। इसी कारण टिकटों पर अतिरिक्त ईंधन शुल्क लगाने का निर्णय लिया गया है। कंपनी ने हालांकि यह भी स्पष्ट किया है कि उसने पूरी लागत यात्रियों पर डालने के बजाय सीमित शुल्क लगाने का फैसला किया है ताकि यात्रियों पर बोझ कम से कम पड़े।

नई व्यवस्था के अनुसार यह शुल्क हर यात्रा खंड के आधार पर अलग-अलग होगा। भारत और भारतीय उपमहाद्वीप के भीतर की उड़ानों पर प्रति यात्रा खंड 425 रुपये का अतिरिक्त ईंधन शुल्क लगाया जाएगा। वहीं मध्य पूर्व के लिए यात्रा करने वाले यात्रियों को लगभग 900 रुपये अतिरिक्त चुकाने होंगे। दक्षिण-पूर्व एशिया और चीन के लिए यह शुल्क लगभग 1800 रुपये रखा गया है। इसी तरह अफ्रीका और पश्चिम एशिया की उड़ानों के लिए भी 1800 रुपये का शुल्क तय किया गया है। यूरोप की उड़ानों पर सबसे अधिक लगभग 2300 रुपये का अतिरिक्त ईंधन शुल्क लिया जाएगा।

कंपनी का कहना है कि यदि विमान ईंधन की कीमतों में आई पूरी बढ़ोतरी को टिकट किराए में शामिल किया जाता, तो आधार किराए में काफी बड़ी वृद्धि करनी पड़ती। इसलिए कंपनी ने अपेक्षाकृत कम ईंधन शुल्क लगाने का विकल्प चुना है ताकि यात्रियों को कम से कम अतिरिक्त खर्च उठाना पड़े और साथ ही उड़ानों का संचालन भी आर्थिक रूप से संभव बना रहे।

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब विमानन क्षेत्र पहले से ही बढ़ती लागत और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं का सामना कर रहा है। विमान ईंधन की कीमतों में तेज वृद्धि के कारण एयरलाइनों के लिए अपने परिचालन को लाभकारी बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ऐसे में कंपनियां अक्सर अतिरिक्त शुल्क या किराए में बदलाव जैसे कदम उठाती हैं।

हाल ही में भारत की अन्य विमानन कंपनियों ने भी इसी तरह के कदम उठाए हैं। कुछ दिन पहले Air India और Air India Express ने भी चरणबद्ध तरीके से उड़ानों पर ईंधन अधिभार लागू करने की घोषणा की थी। कंपनियों का कहना था कि यदि ईंधन लागत में वृद्धि की भरपाई नहीं की गई तो कई उड़ानों का संचालन आर्थिक रूप से कठिन हो सकता है और कुछ सेवाओं को बंद भी करना पड़ सकता है।

इंडिगो वर्तमान में भारत की सबसे बड़ी विमानन कंपनियों में से एक है और उसके बेड़े में 400 से अधिक विमान शामिल हैं। कंपनी के अनुसार वर्ष 2025 में उसने लगभग 12 करोड़ 40 लाख यात्रियों को सेवा प्रदान की। एयरलाइन फिलहाल दुनिया भर के 135 से अधिक गंतव्यों को जोड़ती है और घरेलू बाजार में उसकी मजबूत हिस्सेदारी है।

कंपनी ने कहा है कि वह कच्चे तेल और विमान ईंधन के वैश्विक बाजार पर लगातार नजर रखेगी। यदि भविष्य में कीमतों में बदलाव होता है तो ईंधन शुल्क में भी उसी अनुसार संशोधन किया जा सकता है। फिलहाल यात्रियों को 14 मार्च से टिकट बुक करते समय इस अतिरिक्त शुल्क को ध्यान में रखना होगा।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-