अहमदाबाद. गुजरात के अहमदाबाद शहर से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. सोला सिविल अस्पताल में एक महिला मरीज का एक्स-रे करते समय अस्पताल के एक कर्मचारी द्वारा कथित रूप से चोरी-छिपे वीडियो बनाने की घटना ने हड़कंप मचा दिया. हालांकि मामला सामने आने के बाद पीड़िता और उसके परिजनों द्वारा शिकायत दर्ज न कराने के कारण आरोपी के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हो सकी.
जानकारी के अनुसार यह घटना मंगलवार को उस समय हुई जब एक महिला मरीज अस्पताल के एक्स-रे कक्ष में जांच करवा रही थी. उसी दौरान वहां मौजूद एक व्यक्ति ने अपने मोबाइल फोन से उसका वीडियो बनाना शुरू कर दिया. महिला को जब इस हरकत का संदेह हुआ तो उसने तुरंत शोर मचाया और मदद के लिए पुकार लगाई. आवाज सुनकर उसके परिजन मौके पर पहुंचे और आरोपी को पकड़ लिया.
परिजनों ने मौके पर ही आरोपी से पूछताछ की, लेकिन वह अपने कृत्य का कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका. जब उसके मोबाइल फोन की जांच की गई तो उसमें कथित रूप से इस तरह के और भी वीडियो होने की बात सामने आई, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई. इस खुलासे के बाद अस्पताल परिसर में आक्रोश का माहौल बन गया और लोगों ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाने शुरू कर दिए.
घटना की जानकारी मिलने पर अस्पताल प्रशासन हरकत में आया. अस्पताल की मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ दीपिका सिंघल ने इस घटना को “शर्मनाक” करार दिया और कहा कि आरोपी की पहचान कर ली गई है. उन्होंने बताया कि आरोपी जीएमईआरएस मेडिकल कॉलेज के सामुदायिक चिकित्सा विभाग से जुड़ा एक ड्राइवर है और लंबे समय से कार्यरत है. उनके अनुसार, अब तक उसके खिलाफ इस तरह की कोई शिकायत सामने नहीं आई थी.
डॉ सिंघल ने यह भी कहा कि मामले की सूचना संबंधित कॉलेज के डीन को दे दी गई है और आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं. उन्होंने आश्वासन दिया कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त किया जाएगा. एक्स-रे जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में स्टाफ और मरीजों के साथ आने वाले लोगों की आवाजाही पर विशेष निगरानी रखी जाएगी और मानक संचालन प्रक्रियाओं को और मजबूत किया जाएगा.
इस मामले में पुलिस की भूमिका भी सीमित रही. सोला पुलिस स्टेशन के निरीक्षक के.एन. भुखन ने बताया कि न तो अस्पताल प्रशासन की ओर से और न ही पीड़िता या उसके परिवार की ओर से कोई औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है. ऐसे में पुलिस के पास कानूनी कार्रवाई करने का कोई आधार नहीं बन पाया. उन्होंने कहा कि यदि शिकायत दर्ज कराई जाती है तो पुलिस नियमानुसार सख्त कार्रवाई करेगी.
बताया जा रहा है कि घटना के बाद अस्पताल के पुलिस डेस्क और 181 अभयम हेल्पलाइन को भी सूचित किया गया था, लेकिन इसके बावजूद पीड़िता के परिजनों ने मामले को आपसी सहमति से सुलझाने का फैसला किया. इसी कारण आरोपी के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई और वह बिना किसी कानूनी कार्रवाई के वहां से चला गया.
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में महिलाओं की सुरक्षा और निजता को लेकर लगातार बहस चल रही है. अस्पताल जैसे स्थान, जहां मरीज पूरी तरह से भरोसे के साथ इलाज के लिए जाते हैं, वहां इस तरह की घटनाएं बेहद चिंताजनक मानी जा रही हैं. खासकर एक्स-रे रूम जैसे संवेदनशील स्थानों पर इस तरह की हरकत न केवल कानूनन अपराध है बल्कि नैतिक रूप से भी गंभीर उल्लंघन है.
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने इस घटना पर नाराजगी जताई है और मांग की है कि भले ही शिकायत दर्ज नहीं हुई हो, लेकिन प्रशासन को स्वतः संज्ञान लेकर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए. उनका कहना है कि इस तरह के मामलों में समझौता करने से अपराधियों के हौसले बढ़ते हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति हो सकती है.
विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों में सीसीटीवी निगरानी, सीमित प्रवेश और स्टाफ की सख्त स्क्रीनिंग जैसे उपायों को और प्रभावी बनाने की जरूरत है. साथ ही मरीजों और उनके परिजनों को भी जागरूक रहना होगा ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जा सके.
फिलहाल यह मामला कानूनी कार्रवाई के अभाव में ठंडा पड़ता नजर आ रहा है, लेकिन इसने स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर बहस जरूर छेड़ दी है. आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन इस घटना से क्या सबक लेते हैं और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कौन-कौन से ठोस कदम उठाए जाते हैं.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

