होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा को लेकर 20 देशों की बड़ी वैश्विक एकजुटता ईरान पर बढ़ा दबाव और गहराया अंतरराष्ट्रीय संकट

होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा को लेकर 20 देशों की बड़ी वैश्विक एकजुटता ईरान पर बढ़ा दबाव और गहराया अंतरराष्ट्रीय संकट

प्रेषित समय :22:11:54 PM / Sat, Mar 21st, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

पश्चिम एशिया में लगातार बिगड़ते हालात के बीच अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान के खिलाफ एक बड़ा मोर्चा खुलता नजर आ रहा है. दुनिया के 20 से अधिक देशों ने मिलकर रणनीतिक रूप से बेहद अहम समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा सुनिश्चित करने का ऐलान किया है. यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब इस क्षेत्र में तनाव चरम पर है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर इसका सीधा असर पड़ने लगा है.

संयुक्त बयान में करीब 22 देशों—जिनमें ज्यादातर यूरोपीय देश शामिल हैं, साथ ही संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन जैसे खाड़ी देश भी शामिल हैं—ने ईरान के कदमों की कड़ी आलोचना की है. इन देशों ने आरोप लगाया है कि ईरान ने न केवल व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया है, बल्कि तेल और गैस से जुड़े महत्वपूर्ण ढांचों पर भी हमले किए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति दोनों प्रभावित हो रहे हैं.

यह घटनाक्रम ईरान-इजरायल संघर्ष 2026 के बढ़ते प्रभाव के बीच सामने आया है. 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद स्थिति और ज्यादा गंभीर हो गई थी. इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में जहाजों और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया, जिससे इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए.

आंकड़ों के अनुसार, 1 मार्च से 19 मार्च के बीच इस महत्वपूर्ण मार्ग से केवल 116 जहाज ही गुजर पाए, जो सामान्य स्थिति की तुलना में लगभग 95 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है. यह गिरावट इस बात का संकेत है कि होर्मुज स्ट्रेट अब लगभग ठप स्थिति में पहुंच चुका है, जिससे वैश्विक व्यापार पर गंभीर असर पड़ रहा है.

गौरतलब है कि दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है. ऐसे में इसके बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से उछाल देखा जा रहा है. ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा पड़ सकता है.

संयुक्त बयान में शामिल देशों ने साफ किया है कि वे इस समुद्री मार्ग को सुरक्षित रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाने को तैयार हैं. साथ ही उन्होंने ईरान से मांग की है कि नागरिक ढांचे, खासकर ऊर्जा से जुड़े प्रतिष्ठानों पर हमले तुरंत रोके जाएं और क्षेत्र में शांति बहाल की जाए.

इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि यह संघर्ष अब केवल क्षेत्रीय नहीं रहा, बल्कि वैश्विक चिंता का विषय बन चुका है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय की बढ़ती सक्रियता इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और कड़े कदम उठाए जा सकते हैं.

फिलहाल दुनिया की नजरें इसी बात पर टिकी हैं कि क्या यह संयुक्त प्रयास हालात को नियंत्रित कर पाएगा या फिर यह टकराव एक बड़े वैश्विक संकट का रूप ले लेगा.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-