बड़ी खबर : शीघ्र खत्म होगा मिडिल ईस्ट में तनाव, USA के जंग रोकने के प्रस्ताव के बाद ईरान ने रखीं ये शर्तें

बड़ी खबर : शीघ्र खत्म होगा मिडिल ईस्ट में तनाव, USA के जंग रोकने के प्रस्ताव के बाद ईरान ने रखीं ये शर्तें

प्रेषित समय :11:22:44 AM / Wed, Mar 25th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है. इस बीच युद्ध को समाप्त करने की मांग तेज हो गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान पर हमलों में विराम देने की बात कही और संकेत दिया कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत जारी है. हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि ईरान की ओर से किन प्रतिनिधियों को वार्ता के लिए शामिल किया गया है.

दूसरी ओर, ईरान ने भी युद्ध समाप्त करने के लिए अमेरिका के सामने कई शर्तें रखी हैं. रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बंद करने, सभी आर्थिक प्रतिबंध हटाने और हिज्बुल्लाह के खिलाफ इजरायली कार्रवाई रोकने की मांग की है. इसके अलावा, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क वसूलने का अधिकार भी मांगा है.

ईरान की प्रमुख शर्तें

-अमेरिका भविष्य में ईरान पर हमला नहीं करेगा, इसकी ठोस सुरक्षा गारंटी.
-होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण के लिए नई समुद्री व्यवस्था.
-पूरे पश्चिम एशिया से अमेरिकी सैन्य ठिकानों को हटाना.
-युद्ध में हुए नुकसान के लिए वित्तीय मुआवजा.
-पांच वर्षों तक बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर रोक और यूरेनियम संवर्धन में कमी.
-60 प्रतिशत तक संवर्धित यूरेनियम के भंडार पर बातचीत के लिए सहमति.
-अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी को निरीक्षण की अनुमति.
-क्षेत्र में प्रॉक्सी समूहों को मिलने वाली फंडिंग रोकना.

पहले भी रखी थीं शर्तें

इससे पहले 12 मार्च को ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा था कि युद्ध तभी समाप्त होगा जब ईरान के वैध अधिकारों को मान्यता दी जाएगी, हर्जाना दिया जाएगा और भविष्य में हमलों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय गारंटी सुनिश्चित की जाएगी. उन्होंने यह बयान रूस और पाकिस्तान के नेताओं से बातचीत के बाद दिया था. उल्लेखनीय है कि इससे पहले ईरान के कई वरिष्ठ राजनयिक, जिनमें विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी शामिल हैं, अमेरिका के साथ बातचीत की संभावना से इनकार कर चुके थे. उनका आरोप था कि परमाणु वार्ता के दौरान ही ईरान के साथ विश्वासघात हुआ.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-