कोलकाता. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं और इसी बीच भारतीय जनता पार्टी ने उम्मीदवारों की तीसरी सूची जारी कर बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है. पार्टी ने इस सूची में कुल 19 उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं, जिसमें सबसे चर्चित नाम आरजी कर मेडिकल कॉलेज की दुष्कर्म और हत्या पीड़िता की मां का है, जिन्हें पनिहाटी विधानसभा सीट से मैदान में उतारा गया है.
यह फैसला न केवल राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि इसे महिला सुरक्षा और न्याय के मुद्दे को चुनावी केंद्र में लाने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है. पीड़िता की मां लंबे समय से अपनी बेटी के लिए न्याय की मांग को लेकर संघर्ष कर रही थीं और अब उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखते हुए चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया है.
पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों के लिए हो रहे चुनाव इस बार दो चरणों में संपन्न होंगे. पहला चरण 23 अप्रैल और दूसरा चरण 29 अप्रैल को आयोजित किया जाएगा, जबकि मतगणना 4 मई को होगी. ऐसे में सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीतियों के तहत उम्मीदवारों की घोषणा कर रहे हैं और चुनावी समीकरण साधने में जुटे हैं.
इससे पहले भाजपा अपनी पहली और दूसरी सूची में क्रमशः 144 और 111 उम्मीदवारों के नाम घोषित कर चुकी है. पहली सूची में राज्य के नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी को नंदीग्राम और भवानीपुर सीट से मैदान में उतारा गया था, जहां उनका मुकाबला ममता बनर्जी से होना तय माना जा रहा है. वहीं दूसरी सूची में पूर्व केंद्रीय मंत्री निशीथ प्रमाणिक और अभिनेत्री से नेता बनी रूपा गांगुली जैसे नाम शामिल थे.
तीसरी सूची में शामिल पीड़िता की मां ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि वह चुनाव लड़ने को तैयार हैं. उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा था कि शुरुआत में वह राजनीति में आने को लेकर संकोच में थीं, लेकिन बाद में उन्हें महसूस हुआ कि राज्य में महिलाओं की सुरक्षा और भ्रष्टाचार के मुद्दे गंभीर हैं और बदलाव के लिए राजनीति में आना जरूरी है. उन्होंने यह भी कहा कि उनकी यह लड़ाई सिर्फ व्यक्तिगत न्याय तक सीमित नहीं है, बल्कि वह चाहती हैं कि भविष्य में किसी और के साथ ऐसा न हो.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य में भ्रष्टाचार हर स्तर पर फैला हुआ है और मौजूदा व्यवस्था से आम जनता संतुष्ट नहीं है. इसी कारण उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है. उनका कहना है कि न्याय की लड़ाई अब और कठिन हो गई है और इसे मजबूती से लड़ने के लिए राजनीतिक मंच जरूरी है.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा का यह कदम भावनात्मक और सामाजिक दोनों स्तरों पर प्रभाव डाल सकता है. महिला सुरक्षा, कानून व्यवस्था और न्याय जैसे मुद्दों को लेकर पहले से ही राज्य में बहस जारी है और ऐसे में पीड़िता की मां को उम्मीदवार बनाना चुनावी माहौल को और गरमा सकता है.
वहीं दूसरी ओर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस भी चुनावी तैयारियों में जुटी हुई है और पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी खुद चुनाव प्रचार की कमान संभाल रही हैं. दोनों प्रमुख दलों के बीच सीधी टक्कर के संकेत मिल रहे हैं, जिससे यह चुनाव और भी दिलचस्प हो गया है.
कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 अब पूरी तरह से राजनीतिक मुकाबले के साथ-साथ सामाजिक मुद्दों की लड़ाई भी बनता जा रहा है. भाजपा की तीसरी सूची ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी इस बार हर स्तर पर मजबूत दावेदारी पेश करने के मूड में है और आने वाले दिनों में चुनावी समीकरण और भी तेजी से बदल सकते हैं.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-




