हैदराबाद. आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले में गुरुवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया, जब एक प्राइवेट स्लीपर-कम-सीटर बस ट्रक से टकराने के बाद भीषण आग की चपेट में आ गई. इस हादसे में कम से कम 13 यात्रियों की जलकर मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए. प्रारंभिक जांच में इस भयावह दुर्घटना के पीछे तकनीकी खराबी को एक प्रमुख कारण माना जा रहा है.
यह हादसा जिले के Markapuram इलाके के पास हुआ, जहां तेज रफ्तार से जा रही बस सामने से आ रहे एक ट्रक से टकरा गई. टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बस का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और कुछ ही मिनटों में उसमें आग लग गई. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग इतनी तेजी से फैली कि यात्रियों को संभलने तक का मौका नहीं मिला.
बताया जा रहा है कि बस एक निजी ट्रैवल कंपनी की थी और उसमें सवार अधिकांश यात्री लंबी दूरी की यात्रा पर थे. बस में स्लीपर और सीटिंग दोनों प्रकार की व्यवस्था थी, जिससे यात्रियों की संख्या अधिक थी. हादसे के समय अधिकांश यात्री गहरी नींद में थे, जिससे वे समय रहते बाहर नहीं निकल सके. कई यात्रियों की मौके पर ही जलकर मौत हो गई, जबकि कुछ लोग खिड़कियां तोड़कर बाहर निकलने में सफल रहे.
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने का प्रयास शुरू किया. हालांकि, आग इतनी भयंकर थी कि उसे पूरी तरह बुझाने में काफी समय लग गया. जब तक आग पर काबू पाया गया, तब तक बस लगभग पूरी तरह जल चुकी थी और अंदर फंसे कई यात्रियों की जान जा चुकी थी. घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है.
इस हादसे के बाद राज्य की गृह मंत्री V Anitha ने मौके का दौरा किया और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस मामले की विस्तृत जांच कराई जाए ताकि हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके. उन्होंने कहा कि प्रारंभिक तौर पर तकनीकी खराबी की बात सामने आ रही है, लेकिन जांच के बाद ही पूरी सच्चाई स्पष्ट हो सकेगी.
गृह मंत्री ने मृतकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और घायलों को हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार इस हादसे को बेहद गंभीरता से ले रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. साथ ही उन्होंने परिवहन विभाग को निर्देश दिए कि सभी निजी बसों की तकनीकी जांच को और सख्त बनाया जाए.
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बस और ट्रक की टक्कर के बाद संभवतः ईंधन टैंक में विस्फोट हुआ, जिससे आग तेजी से फैल गई. तकनीकी खराबी के चलते बस के आपातकालीन निकास प्रणाली भी ठीक से काम नहीं कर पाई, जिससे यात्रियों को बाहर निकलने में दिक्कत हुई. यह भी जांच का विषय है कि बस में सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं.
इस हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और निजी बसों की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि कई निजी बस ऑपरेटर लागत बचाने के लिए वाहनों के रखरखाव में लापरवाही बरतते हैं, जिससे इस तरह की दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है. नियमित जांच और सख्त नियमों के अभाव में ऐसे वाहन यात्रियों के लिए खतरा बन जाते हैं.
स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस मार्ग पर पहले भी कई हादसे हो चुके हैं, लेकिन ठोस कदम नहीं उठाए गए. उन्होंने मांग की कि सड़क सुरक्षा को लेकर ठोस नीति बनाई जाए और वाहनों की नियमित जांच सुनिश्चित की जाए.
हादसे के बाद घटनास्थल का दृश्य बेहद भयावह था. पूरी तरह जली हुई बस, चारों ओर फैला मलबा और मृतकों के अवशेष इस त्रासदी की गंभीरता को बयां कर रहे थे. बचाव कार्य में जुटे कर्मियों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, क्योंकि आग की तीव्रता बहुत अधिक थी.
राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने की घोषणा की है, जबकि घायलों के इलाज का खर्च सरकार वहन करेगी. प्रशासन ने मृतकों की पहचान करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है, हालांकि कई शव बुरी तरह जल चुके हैं, जिससे पहचान में दिक्कत आ रही है.
इस हादसे ने पूरे राज्य में शोक की लहर दौड़ा दी है. लोग सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर दुख और गुस्सा जाहिर कर रहे हैं. कई लोगों ने सरकार से सख्त कदम उठाने और सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देने की मांग की है.
फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और बस ऑपरेटर तथा संबंधित अधिकारियों से पूछताछ की जा रही है. जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि हादसा पूरी तरह तकनीकी खराबी के कारण हुआ या इसमें मानवीय लापरवाही भी शामिल थी.
यह घटना एक बार फिर यह याद दिलाती है कि सड़क पर चलने वाले वाहनों की सुरक्षा और रखरखाव में किसी भी प्रकार की लापरवाही कितनी घातक साबित हो सकती है. सरकार और प्रशासन के साथ-साथ वाहन संचालकों की जिम्मेदारी भी है कि वे यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें, ताकि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं से बचा जा सके.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

