जबलपुर. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में सतना जिले के एक पिता द्वारा अपनी लापता बेटी की तलाश के लिए दायर की गई बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई के दौरान एक बेहद भावुक और चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है. जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ के समक्ष पुलिस ने जो तथ्य और साक्ष्य प्रस्तुत किए, उससे पिता द्वारा लगाए गए अपहरण और बंधक बनाने के आरोपों की पूरी कहानी ही बदल गई. पुलिस जांच में यह तथ्य निकलकर सामने आया है कि जिस बेटी को पिता पिछले कई महीनों से तलाश रहे थे, वह न केवल सुरक्षित है बल्कि दिल्ली के रोहिणी इलाके में अपने पति के साथ वैवाहिक जीवन बिता रही है. अदालत को बताया गया कि युवती वर्तमान में साढे़ आठ महीने की गर्भवती है और स्वास्थ्य कारणों व लंबी दूरी के सफर की कठिनाइयों के चलते वह व्यक्तिगत रूप से जबलपुर हाई कोर्ट में उपस्थित होने में असमर्थ है.
इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि में जाएं तो सतना निवासी पीड़ित पिता ने दिसंबर 2025 में हाई कोर्ट की शरण ली थी. याचिका में आरोप लगाया गया था कि उनकी 22 वर्षीय बेटी मार्च 2025 से लापता है और उनके घर के सामने रहने वाला एक युवक उसे डरा-धमकाकर या बंधक बनाकर ले गया है. पिता ने पुलिस पर भी लापरवाही के आरोप लगाते हुए बेटी की जान को खतरा बताया था. हालांकि, माननीय उच्च न्यायालय के सख्त निर्देशों के बाद जब पुलिस ने तफ्तीश तेज की, तो कड़ी से कड़ी जुड़ती गई और युवती का सुराग दिल्ली में मिला. बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान पुलिस ने अदालत के समक्ष आर्य समाज मंदिर रोहिणी का विवाह प्रमाण पत्र पेश किया, जिससे यह सिद्ध हो गया कि युवती ने 20 मार्च 2025 को अपनी मर्जी से प्रेम विवाह कर लिया था.
न्यायालय की कार्यवाही के दौरान पुलिस ने एक पेन ड्राइव भी पेश की, जिसमें युवती के दर्ज बयानों का वीडियो मौजूद था. अपने बयान में युवती ने स्पष्ट किया है कि वह किसी के दबाव में नहीं है और अपनी मर्जी से ससुराल में रह रही है. उसने यह भी इच्छा जताई कि बच्चे के जन्म के बाद वह अपने पैतृक गांव जाकर परिजनों से मुलाकात करेगी. हाई कोर्ट की खंडपीठ ने युवती के वयस्क होने और स्वेच्छा से विवाह करने के तथ्यों को स्वीकार करते हुए पिता की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को निराकृत कर दिया है. इस फैसले ने साफ कर दिया है कि कानून की नजर में एक बालिग युवती को अपनी पसंद से जीवन जीने और जीवनसाथी चुनने का पूर्ण अधिकार है. सतना से लेकर जबलपुर तक इस मामले की चर्चा बनी हुई है क्योंकि एक पिता की लंबी कानूनी लड़ाई का अंत इस सुखद लेकिन अप्रत्याशित खुलासे के साथ हुआ है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

