नई दिल्ली. वैश्विक अकादमिक जगत में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज करते हुए प्रोफेसर (डॉ.) शादमा सिद्दीकी को “डिस्टिंग्विश्ड एजुकेटर इन बायोलॉजिकल साइंसेज अवॉर्ड” से सम्मानित किया गया है. यह सम्मान उन्हें शिक्षा, शोध और अकादमिक नेतृत्व के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रदान किया गया. यह प्रतिष्ठित पुरस्कार विश्व स्तर के सम्मेलन वर्ल्ड कांग्रेस ऑन क्लिनिकल मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स एंड हेल्थकेयर साइंसेज 2026 के दौरान दिया गया, जिसमें दुनिया भर से वैज्ञानिक, शोधकर्ता और हेल्थकेयर विशेषज्ञ शामिल हुए.
प्रोफेसर डॉ शादमा सिद्दीकी वर्तमान में सऊदी अरब के बिशा विश्वविद्यालय के कॉलेज ऑफ एप्लाइड मेडिकल साइंसेज में पब्लिक हेल्थ विभाग में कार्यरत हैं. उनके पास एप्लाइड माइक्रोबायोलॉजी में पीएचडी की डिग्री है और साथ ही फॉरेंसिक साइंस और पब्लिक हेल्थ में विशेष प्रशिक्षण भी प्राप्त है. दो दशकों से अधिक के अपने अकादमिक अनुभव में उन्होंने शिक्षा, अनुसंधान और संस्थागत विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है.
डॉ सिद्दीकी एक बहुआयामी विद्वान के रूप में जानी जाती हैं. उन्होंने अब तक दस पुस्तकों का लेखन किया है और उनके कई शोध पत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशित हो चुके हैं. इसके अलावा उन्होंने कई शोधार्थियों का मार्गदर्शन किया है और पीएचडी स्तर के छात्रों को सफलतापूर्वक गाइड किया है. उनका कार्य विज्ञान, फॉरेंसिक और पब्लिक हेल्थ के संगम पर आधारित है, जहां वे जटिल वैज्ञानिक तथ्यों को सरल और प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करने के लिए फॉरेंसिक जर्नलिज्म जैसे उभरते क्षेत्र में भी योगदान दे रही हैं.
यह सम्मान केवल उनके व्यक्तिगत उपलब्धियों का ही प्रतीक नहीं है, बल्कि यह उनके निरंतर प्रयासों और समर्पण को भी दर्शाता है, जिसके माध्यम से वे विज्ञान और समाज के बीच की दूरी को कम करने का कार्य कर रही हैं. उनके कार्यों का प्रभाव न केवल शैक्षणिक संस्थानों तक सीमित है, बल्कि यह समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचता है.
यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 16 से 18 मार्च 2026 तक पंजाब के मंडी में आयोजित किया गया था. इस तीन दिवसीय सम्मेलन और कार्यशाला का आयोजन देश भगत विश्वविद्यालय, पंजाब के फैकल्टी ऑफ एलाइड एंड हेल्थकेयर साइंसेज द्वारा किया गया, जिसमें देहरादून स्थित सीआरआईएस डीएनए लैब्स का सहयोग रहा. कार्यक्रम माइक्रोबायोलॉजिस्ट्स सोसाइटी इंडिया के संरक्षण में आयोजित हुआ, जो वैज्ञानिक शोध और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए जानी जाती है.
सम्मेलन के दौरान क्लिनिकल मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स और हेल्थकेयर साइंसेज के क्षेत्र में हो रहे नवीनतम शोध और तकनीकी प्रगति पर चर्चा की गई. इस मंच ने दुनियाभर के विशेषज्ञों को एक साथ लाकर ज्ञान के आदान-प्रदान और नवाचार को बढ़ावा देने का अवसर प्रदान किया.
17 मार्च 2026 को आयोजित पुरस्कार समारोह में डॉ शादमा सिद्दीकी को यह सम्मान प्रदान किया गया, जो उनके लंबे और सफल अकादमिक करियर में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में जुड़ गया है. यह सम्मान उनके उत्कृष्ट शिक्षण कौशल, शोध में गहराई और छात्रों के मार्गदर्शन में उनके योगदान को मान्यता देता है.
डॉ सिद्दीकी ने अपने करियर में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है. वे पहले भोपाल स्थित सैम ग्लोबल यूनिवर्सिटी में डीन और प्रोफेसर रह चुकी हैं. इसके अलावा वे मुंडस फॉरेंसिक माइक्रोबायोलॉजी काउंसिल की डायरेक्टर, अंशा बायोनिक फाउंडेशन की चेयरपर्सन और ग्लोबल रिसर्च एंड वेलफेयर सोसाइटी की नेशनल कोऑर्डिनेटर भी हैं. इन सभी भूमिकाओं में उन्होंने शिक्षा और समाज के विकास के लिए लगातार कार्य किया है.
इस सम्मान के साथ डॉ शादमा सिद्दीकी ने एक बार फिर यह साबित किया है कि समर्पण, ज्ञान और निरंतर प्रयासों से वैश्विक स्तर पर पहचान बनाई जा सकती है. उनका यह सफर न केवल युवा शोधकर्ताओं और छात्रों के लिए प्रेरणास्रोत है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भारतीय मूल के शिक्षाविद अंतरराष्ट्रीय मंच पर किस तरह अपनी पहचान बना रहे हैं.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

