नई दिल्ली. पश्चिम एशिया में जारी तनावपूर्ण हालात के बीच भारत ने एक बार फिर सक्रिय कूटनीतिक पहल करते हुए क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है. इसी क्रम में भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi ने शनिवार को सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस Mohammed bin Salman से फोन पर विस्तृत बातचीत की. इस बातचीत में दोनों नेताओं ने मौजूदा हालात की गंभीरता को देखते हुए समुद्री मार्गों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लाइनों को खुले और सुरक्षित बनाए रखने पर सहमति जताई.
यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब West Asia में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. फरवरी के अंत में Israel और United States द्वारा Iran पर किए गए सैन्य हमलों के बाद क्षेत्र में अस्थिरता गहरा गई है. इस संघर्ष का असर केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक मार्गों पर भी पड़ने लगा है.
प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत के बाद सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी साझा करते हुए बताया कि दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है. उन्होंने कहा कि शिपिंग लाइनों को सुरक्षित और निर्बाध बनाए रखना अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद जरूरी है. यह सहमति ऐसे समय में आई है जब प्रमुख समुद्री मार्गों पर खतरे की आशंका लगातार बनी हुई है.
भारत ने इस पूरे घटनाक्रम में संतुलित और जिम्मेदार भूमिका निभाई है. प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत क्षेत्र में ऊर्जा ढांचे पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा करता है. उन्होंने यह भी दोहराया कि ऐसे हमले न केवल क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा हैं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर प्रभाव डाल सकते हैं. भारत का यह रुख उसके दीर्घकालिक हितों और अंतरराष्ट्रीय शांति के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है.
इस फोन कॉल की खास बात यह भी रही कि यह दोनों नेताओं के बीच हाल के दिनों में दूसरी बातचीत थी. इससे पहले भी दोनों के बीच संपर्क बना रहा है, जो इस बात का संकेत है कि भारत इस संकट को लेकर लगातार सक्रिय और सजग है. भारत ने न केवल सऊदी अरब बल्कि खाड़ी देशों के समूह, ईरान और इजराइल के नेताओं से भी बातचीत की है, ताकि स्थिति को शांत किया जा सके और तनाव कम करने के प्रयास तेज किए जा सकें.
भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि पश्चिम एशिया क्षेत्र में लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं. इनमें से बड़ी संख्या सऊदी अरब में है, जहां करीब 40 लाख भारतीय प्रवासी रहते हैं. ऐसे में उनकी सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करना भारत सरकार की प्राथमिकता बनी हुई है. हाल ही में सऊदी अरब की राजधानी रियाद में ड्रोन और मिसाइल हमलों के दौरान एक भारतीय नागरिक की मौत ने स्थिति की गंभीरता को और बढ़ा दिया है.
इसके अलावा, भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से पूरा होता है. खास तौर पर Strait of Hormuz के जरिए देश के लगभग 50 प्रतिशत तेल आयात की आपूर्ति होती है. यदि यह मार्ग बाधित होता है, तो इसका सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है. इसी कारण भारत लगातार यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर आवाजाही सुचारु बनी रहे.
प्रधानमंत्री मोदी और सऊदी क्राउन प्रिंस के बीच हुई बातचीत में द्विपक्षीय संबंधों पर भी चर्चा हुई. दोनों देशों के बीच पहले से ही मजबूत रणनीतिक साझेदारी है, जो ऊर्जा, व्यापार, निवेश और सुरक्षा के क्षेत्रों में फैली हुई है. मौजूदा हालात में इन संबंधों का और मजबूत होना दोनों देशों के लिए फायदेमंद माना जा रहा है.
इस बीच भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रियता दिखाते हुए सऊदी अरब के अपने समकक्ष से मुलाकात की. यह मुलाकात फ्रांस में आयोजित जी7 देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान हुई, जहां दोनों पक्षों ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की. इस बातचीत में द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने के तरीकों पर भी विचार किया गया.
भारत की इस पूरी कूटनीतिक रणनीति का उद्देश्य स्पष्ट है—क्षेत्र में शांति बनाए रखना, ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखना और अपने नागरिकों के हितों की रक्षा करना. मौजूदा संकट ने यह भी दिखा दिया है कि वैश्विक स्तर पर जुड़े हुए आर्थिक और रणनीतिक तंत्र कितने संवेदनशील हैं और किसी एक क्षेत्र में उत्पन्न तनाव का असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह संतुलित दृष्टिकोण उसे एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करता है. एक ओर जहां भारत ने किसी पक्ष का समर्थन करने से बचते हुए शांति की अपील की है, वहीं दूसरी ओर उसने अपने राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम भी उठाए हैं.
आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की स्थिति किस दिशा में जाती है, यह काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और प्रमुख देशों के प्रयासों पर निर्भर करेगा. फिलहाल भारत की कोशिश यही है कि बातचीत और सहयोग के जरिए हालात को नियंत्रित किया जाए और किसी बड़े संकट को टाला जा सके. प्रधानमंत्री मोदी और सऊदी क्राउन प्रिंस के बीच हुई यह बातचीत उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

