West Bengal में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो चुकी है और जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, एक अहम ट्रेंड सामने आ रहा है. पिछले दो चुनावों के आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि राज्य में अब मुकाबले कांटे के नहीं, बल्कि बड़े अंतर से तय हो रहे हैं. यही वजह है कि West Bengal Legislative Assembly election 2026 को इस बार और भी निर्णायक माना जा रहा है.
राजनीतिक विश्लेषण में 2016 और 2021 के चुनावी नतीजों की तुलना करने पर साफ दिखाई देता है कि वोटों के अंतर यानी जीत के मार्जिन में बड़ा बदलाव आया है. वर्ष 2016 में ज्यादातर सीटों पर मुकाबला मध्यम अंतर का रहा था, जहां करीब 74 प्रतिशत सीटें 5,000 से 25,000 वोटों के अंतर से तय हुई थीं. वहीं 25,000 से ज्यादा अंतर वाली सीटों की संख्या सीमित थी, जिससे यह संकेत मिलता था कि कई जगहों पर कड़ा मुकाबला मौजूद था.
लेकिन 2021 आते-आते तस्वीर पूरी तरह बदल गई. बड़ी जीत का ट्रेंड तेजी से बढ़ा और 25,000 से ज्यादा वोटों के अंतर से जीतने वाली सीटों की संख्या बढ़कर 132 तक पहुंच गई. यह कुल सीटों का करीब 44 प्रतिशत हिस्सा था, जो दर्शाता है कि मतदाता अब ज्यादा स्पष्ट और मजबूत जनादेश देने लगे हैं. वहीं 10,000 से 25,000 के अंतर वाली सीटें घट गईं और बेहद करीबी मुकाबले यानी 1,000 से कम वोटों का अंतर सिर्फ 7 सीटों तक सिमट गया.
इन आंकड़ों से यह साफ हो जाता है कि West Bengal Legislative Assembly election 2021 में मतदाताओं ने स्पष्ट रूप से अपनी पसंद जाहिर की और परिणाम अधिक निर्णायक रहे. यही पैटर्न 2026 में भी दोहराए जाने की संभावना जताई जा रही है, जिससे यह चुनाव और अधिक एकतरफा हो सकता है.
राजनीतिक समीकरणों की बात करें तो बड़े अंतर से जीतने वाली सीटों का सबसे ज्यादा फायदा All India Trinamool Congress को मिला. 2021 के चुनाव में पार्टी ने 25,000 से ज्यादा वोटों के अंतर से 100 से अधिक सीटें अपने नाम कीं, जिससे उसकी मजबूत पकड़ का अंदाजा लगाया जा सकता है. इसके मुकाबले Bharatiya Janata Party को इस कैटेगरी में सीमित सफलता मिली और वह केवल कुछ ही सीटों पर बड़े अंतर से जीत दर्ज कर सकी.
हालांकि यह भी सच है कि कुछ क्षेत्रों में अब भी कड़ा मुकाबला देखने को मिलता है. 2021 में बालारामपुर, दिनहाटा, घाटाल, कुल्टी, दांतन, तामलुक और जलपाईगुड़ी जैसी सीटों पर बेहद करीबी मुकाबले हुए, जहां जीत का अंतर 1,000 वोट से भी कम रहा. इन सीटों पर दोनों प्रमुख दलों के बीच सीधी टक्कर देखने को मिली, जिससे यह स्पष्ट होता है कि जमीनी स्तर पर प्रतिस्पर्धा पूरी तरह खत्म नहीं हुई है.
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बंगाल के मतदाता अब पहले से ज्यादा निर्णायक रुख अपना रहे हैं. वे न सिर्फ पार्टी चुन रहे हैं, बल्कि बड़े अंतर से जीत दिलाकर स्पष्ट संदेश भी दे रहे हैं. यही वजह है कि 2026 का चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन या सत्ता बरकरार रखने की लड़ाई नहीं, बल्कि जनादेश की ताकत को दिखाने वाला चुनाव बन सकता है.
फिलहाल, जैसे-जैसे प्रचार अभियान तेज हो रहा है, सभी दल अपनी रणनीति को धार दे रहे हैं. लेकिन पिछले आंकड़े इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि इस बार भी मुकाबला भले ही कई जगहों पर दिलचस्प हो, लेकिन अंतिम नतीजे बड़े अंतर से तय हो सकते हैं, जो इसे एक बार फिर निर्णायक चुनाव बना देंगे.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

