साहित्य और संवाद का अनूठा संगम, उपन्यास का भव्य लोकार्पण और विमर्श संपन्न

साहित्य और संवाद का अनूठा संगम, उपन्यास का भव्य लोकार्पण और विमर्श संपन्न

प्रेषित समय :18:54:34 PM / Sun, Mar 29th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

भोपाल. मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के प्रतिष्ठित दुष्यंत कुमार पांडुलिपि संग्रहालय में शनिवार की शाम एक अभूतपूर्व साहित्यिक समागम की साक्षी बनी. आशा पारस फॉर पीस एंड हारमनी फाउंडेशन (APPHF) इंडिया के तत्वावधान में आयोजित इस गरिमामय समारोह में प्रख्यात लेखिका प्रो. विनीता भटनागर के बहुचर्चित उपन्यास 'ZAIRA: Self and Space' का विधिवत लोकार्पण और उस पर केंद्रित एक उच्चस्तरीय विमर्श का सफल आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं डॉ. बी.आर. अंबेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति एवं फाउंडेशन की प्रबंध निदेशक प्रो. आशा शुक्ला ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में साहित्य की शक्ति को रेखांकित करते हुए कहा कि वर्तमान वैश्विक परिवेश में ऐसे आयोजन समाज में संवाद की नई खिड़कियां खोलते हैं और जागरूकता को एक सकारात्मक दिशा प्रदान करते हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि साहित्य जब 'स्व' और 'स्थान' जैसे गंभीर विषयों पर बात करता है, तो वह सीधे तौर पर मानवीय संवेदनाओं को झकझोरने का काम करता है.

मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित वरिष्ठ साहित्यकार एवं स्वास्थ्य सेवाओं की पूर्व संचालक डॉ. वीणा सिन्हा ने पुस्तकों के सामाजिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पुस्तकें केवल सूचनाओं या ज्ञान का संग्रह नहीं हैं, बल्कि ये विभिन्न संस्कृतियों और विचारधाराओं के बीच सेतु का काम करते हुए समाज को आपस में जोड़ने का सबसे पवित्र माध्यम हैं. कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ कनीज़ ज़हरा रज़ावी के स्वागत वक्तव्य से हुआ, जिन्होंने अकादमिक और रचनात्मक संपादन के नजरिए से पुस्तक की बुनावट पर प्रकाश डाला. विमर्श के सत्र में तीन प्रमुख वैचारिक सहयोगियों ने उपन्यास की गहराई को मापते हुए अपने शोधपरक विचार साझा किए. जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी की डॉ. दीप्ति यादव, आरजीपीवी भोपाल की सहायक प्राध्यापक सुश्री आयुषी पराशर और लिवरपूल यूनिवर्सिटी, यूके के शोधकर्ता एम. अंज़र ने उपन्यास के पात्रों, परिस्थितियों और समकालीन समाज में इसकी प्रासंगिकता पर तकनीकी और भावुक दोनों ही दृष्टिकोणों से अपनी बात रखी. विशेषज्ञों का मानना था कि यह कृति वैश्विक मानकों पर खरी उतरती है और पाठकों को नए मानसिक क्षितिज प्रदान करती है.

इस अवसर पर फाउंडेशन द्वारा लेखिका प्रो. विनीता भटनागर का सार्वजनिक अभिनंदन भी किया गया. आयोजन के अंतिम चरण में आशा पारस फॉर पीस एंड हार्मनी फाउंडेशन के निदेशक प्रो. आर. के. शुक्ला ने सभी अतिथियों और प्रबुद्ध जनों का आभार व्यक्त करते हुए शांति और सद्भाव की दिशा में फाउंडेशन के संकल्प को दोहराया. लव चावड़ीकर द्वारा कुशलतापूर्वक संचालित इस कार्यक्रम में भोपाल के साहित्यिक हलकों के साथ-साथ युवा लेखकों, शोधार्थियों, समाजसेवियों और मीडिया प्रतिनिधियों ने भारी संख्या में उपस्थिति दर्ज कराई. यह समारोह केवल एक पुस्तक विमोचन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने भोपाल के साहित्यिक परिवेश में एक नई बौद्धिक बहस को जन्म दिया है, जो लंबे समय तक साहित्य जगत में याद की जाएगी.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-