317 किलोमीटर लंबी नागपुर-जबलपुर गैस पाइपलाइन को जल्द मिलेगी संचालन की मंजूरी, गेल को इस हफ्ते अनुमति मिलने की उम्मीद

317 किलोमीटर लंबी नागपुर-जबलपुर गैस पाइपलाइन को जल्द मिलेगी संचालन की मंजूरी, गेल को इस हफ्ते अनुमति मिलने की उम्मीद

प्रेषित समय :19:57:15 PM / Mon, Mar 30th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. औद्योगिक और घरेलू क्षेत्र के लिए  बेहद राहत भरी खबर सामने आई है जहां नागपुर से जबलपुर को जोड़ने वाली 317 किलोमीटर लंबी गैस पाइपलाइन को चालू करने की प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है. भारतीय गैस प्राधिकरण लिमिटेड यानी गेल को इस सप्ताह पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन से परिचालन के लिए महत्वपूर्ण मंजूरी मिलने की पूरी उम्मीद है और सूत्रों के अनुसार अगले एक से दो दिनों के भीतर विभागीय अधिकारी अंतिम निरीक्षण के लिए साइट पर पहुंच सकते हैं. 

इस पाइपलाइन के शुरू होते ही संस्कारधानी के ऊर्जा परिदृश्य में एक क्रांतिकारी बदलाव आने की संभावना है क्योंकि इससे न केवल उद्योगों को निर्बाध ईंधन मिलेगा बल्कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए भी गैस की उपलब्धता बेहद सुगम हो जाएगी. बुनियादी ढांचे के विकास की दृष्टि से यह परियोजना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि गेल ने पहले ही मुंबई से नागपुर तक समृद्धि एक्सप्रेस-वे के साथ 693 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन का निर्माण पूरा कर लिया है जो वर्तमान में पूरी तरह कार्यात्मक है और अब इसी नेटवर्क का विस्तार नागपुर से जबलपुर की ओर किया जा रहा है. इस पूरी ग्रिड की सबसे बड़ी खासियत यह है कि नागपुर से ही एक अन्य पाइपलाइन ओडिशा के झारसुगुड़ा तक भी फैल रही है जो लगभग 692 किलोमीटर की दूरी तय करती है जिससे जबलपुर और आसपास के क्षेत्रों को भारत के पश्चिमी और पूर्वी दोनों तटों से गैस आपूर्ति प्राप्त करने की सुविधा मिल सकेगी. हालांकि पूर्व में इस कार्य को मार्च के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन तकनीकी कारणों और विस्तार की जटिलता को देखते हुए अब गेल ने स्टॉक एक्सचेंज को सूचित किया है कि नागपुर-झारसुगुड़ा खंड को जून के अंत तक पूर्ण रूप से तैयार कर लिया जाएगा. वर्तमान में नागपुर से गोंदिया के बीच 203 किलोमीटर के हिस्से में सुरक्षा मानकों के अनुरूप गहन परीक्षण का काम तेजी से चल रहा है जिसमें पाइपलाइन को उच्च दबाव वाले पानी से भरकर अल्ट्रासाउंड जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि भीतर कोई भी अवांछित कण न रह जाए. एक बार जब इस खंड को गैस से भर दिया जाएगा तो पूर्व और पश्चिम का पूरा नेटवर्क एक साथ क्रियाशील हो जाएगा जो मध्य भारत की अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है.

 इसी बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छिड़े इजरायल और ईरान युद्ध के बीच मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बना हुआ है क्योंकि अबू धाबी में मिसाइल मलबे की चपेट में आने से एक भारतीय की मौत और एक अन्य के घायल होने की खबर ने वैश्विक हलचल पैदा कर दी है. इसके साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य के रणनीतिक कमांडर अलीरेजा तंगसिरी के इजरायली हमले में मारे जाने की अपुष्ट खबरों और बाब अल-मंडेब जैसे चोक पॉइंट्स पर बढ़ते खतरे ने ईंधन की कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला को लेकर भारत जैसे देशों को अपनी आंतरिक पाइपलाइन ग्रिड को मजबूत करने के लिए प्रेरित किया है. ऐसी वैश्विक अस्थिरता के बीच जबलपुर तक सीधी गैस पाइपलाइन का पहुंचना शहर के लिए किसी वरदान से कम नहीं है क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर निर्भरता को कम करते हुए घरेलू वितरण तंत्र को मजबूती प्रदान करेगा. 

झारसुगुड़ा से राजनांदगांव तक का 480 किलोमीटर का हिस्सा पहले ही गैस से भरा जा चुका है और अब केवल गोंदिया-नागपुर खंड के पूरा होने की प्रतीक्षा है जिसके बाद जबलपुर के घरों के चूल्हों से लेकर बड़े कारखानों की भट्टियों तक स्वच्छ ईंधन का प्रवाह शुरू हो जाएगा. गेल इस समय अपनी पूर्वी पाइपलाइन के लिए ओडिशा के धामरा बंदरगाह से गैस प्राप्त कर रहा है और जल्द ही यह नेटवर्क मध्य प्रदेश के हृदय स्थल जबलपुर को ऊर्जा के राष्ट्रीय मानचित्र पर एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित कर देगा. विशेषज्ञों का मानना है कि इस बुनियादी ढांचे के पूर्ण होते ही जबलपुर में नए उद्योगों के आगमन का रास्ता साफ होगा और प्रदूषण मुक्त ऊर्जा के कारण शहर की पर्यावरण स्थिति में भी सुधार देखा जाएगा. आज की इस बड़ी अपडेट ने न केवल निवेशकों बल्कि आम जनता के बीच भी उत्साह भर दिया है क्योंकि विकास की यह जीवन रेखा अब धरातल पर उतरने के बेहद करीब है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-