पश्चिम बंगाल में 7 इलेक्शन ऑब्जर्वर बंधक, सुप्रीम कोर्ट नाराज,कहा, हमें पता है उपद्रवी कौन, वोटर लिस्ट से नाम कटने पर लगातार दूसरे दिन प्रदर्शन

पश्चिम बंगाल में 7 इलेक्शन ऑब्जर्वर बंधक, सुप्रीम कोर्ट नाराज,कहा, हमें पता है उपद्रवी कौन, वोटर लिस्ट से नाम कटने पर लगातार दूसरे दिन प्रदर्शन

प्रेषित समय :16:19:05 PM / Thu, Apr 2nd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

कोलकाता. सुप्रीम कोर्ट ने आज पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में एसआईआर  से जुड़े 7 इलेक्शन ऑब्जर्वर को बंधक बनाए जाने की घटना पर नाराजगी जताई. कोर्ट ने कहा, उन्हें नौ घंटे बंधक बनाकर रखा है, खाना-पानी तक नहीं मिला. यह घटना सोची-समझी और भड़काऊ लगती है. हमें पता है उपद्रवी कौन हैं, इनका मकसद न्यायिक अधिकारियों का मनोबल गिराना और चुनावी प्रक्रिया को बाधित करना है.

सीजेआई सूर्यकांत व जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था ढह गई है. बेंच ने राज्य के गृह सचिव, डीजीपी और अन्य अधिकारियों से उनकी निष्क्रियता पर जवाब मांगा. दरअसल 7 न्यायिक अधिकारी मालदा के बीडीओ ऑफिस पहुंचे थे. इनमें तीन महिलाएं थीं. तभी वोटर लिस्ट में नाम कटने के विरोध में हजारों लोगों ने ऑफिस को घेर लिया. मालदा में लगातार दूसरे दिन भी विरोध प्रदर्शन हो रहा है.

आज नारायणपुर स्थित बीएसएफ कैंप के सामने भीड़ इकठ्ठा हो गई. लोगों ने नेशनल हाईवे-12 को जाम कर दिया. सड़क पर टायरों में आग लगा दी गई. दरअसल सुप्रीम कोर्ट में एसआइआर के खिलाफ लगाई गई याचिका पर सुनवाई हो रही थी. इस मामले में याचिकाकर्ताओं और राज्य की ओर से पेश वकील वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, श्याम दीवान, गोपाल शंकरनारायणन, मेनका गुरुस्वामी, भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और वरिष्ठ अधिवक्ता दामा शेषाद्रि नायडू भारत निर्वाचन आयोग की तरफ से थे.

सीजेआई बोले, मिस्टर एडवोकेट जनरल, अब आप हमें मजबूर कर रहे हैं-

सीजेआई ने कहा कि मिस्टर एडवोकेट जनरल, अब आप हमें मजबूर कर रहे हैं. दुर्भाग्य से, आपके राज्य में आप में से हर कोई राजनीतिक भाषा बोलता है. यह सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात है. हमने कभी इतना ध्रुवीकृत राज्य नहीं देखा. यहां तक कि अदालती आदेशों के पालन में भी राजनीति झलकती है. क्या आपको लगता है कि हमें नहीं पता कि उपद्रवी कौन हैं, कम से कम मैं रात 2 बजे तक सब कुछ मॉनिटर कर रहा था! अगर विरोध अराजनीतिक था तो राजनीतिक नेता क्या कर रहे थे. क्या यह उनका कर्तव्य नहीं था कि वे मौके पर पहुंचें और देखें कि क्या हो रहा है, कि कोई कानून-व्यवस्था को अपने हाथ में लेने की कोशिश कर रहा है.

टीएमसी ने कहा,बाहरी अधिकारी हालात संभालने में सक्षम नहीं-

टीएमसी ने कहा कि मालदा की घटना की जिम्मेदारी अमित शाह की है. वे लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने में बार-बार विफल रहे. कानून-व्यवस्था कमजोर हुई. बंगाल की शांति पर राजनीति हुई. बंगाल इस साजिश को बर्दाश्त नहीं करेगा. अमित शाह को इस्तीफा देना चाहिए.

भाजपा ने कहा, बंगाल में डर का राज

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने एक्स पर लिखा कि श्मालदा के कालियाचक में हिंसक भीड़ ने 7 न्यायिक अधिकारियों को बंधक बना लिया. राष्ट्रीय राजमार्ग जाम कर दिए गए. आवाजाही ठप हो गई और सत्ता की जगह डर का राज छा गया. ममता बनर्जी ने एक दिन पहले कहा था, खेला होबे. क्या उनका इशारा इसी ओर था. बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि ममता बनर्जी सरकार में जंगल राज की स्थिति है. पश्चिम बंगाल सरकार की जिम्मेदारी थी कि वह लोगों की सुरक्षा करे, लेकिन इसके बजाय वह रोहिंग्या के अधिकारों की रक्षा में लगी है. इसी वजह से  एसआइआर प्रक्रिया का विरोध हो रहा है.

बंगाल में 705 न्यायिक अधिकारी अभी भी एसआइआर का काम कर रहे-

पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन का काम अभी भी जारी है. 28 फरवरी को फाइनल वोटर लिस्ट जारी हुई थी. इसमें 7.04 करोड़ वोटर के नाम थे. लगभग 60 लाख नाम न्यायिक जांच के दायरे में रखे गए. इन्हें वोटर लिस्ट में रखने या हटाने पर फैसले के लिए 705 न्यायिक अधिकारियों को नियुक्त किया गया था.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-