भारत की कला दुनिया में एक नया इतिहास उस समय बना जब मशहूर चित्रकार Raja Ravi Varma की पेंटिंग यशोदा और कृष्ण को रिकॉर्ड 167.2 करोड़ रुपये में खरीदा गया. इस ऐतिहासिक पेंटिंग को खरीदने वाले शख्स हैं Cyrus S Poonawalla, जो देश ही नहीं बल्कि दुनिया के सबसे बड़े वैक्सीन निर्माता संस्थानों में से एक के संस्थापक हैं. इस खरीद ने भारतीय कला बाजार में एक नया रिकॉर्ड बना दिया है और साइरस पूनावाला एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं.
साइरस पूनावाला भारत के जाने-माने उद्योगपति हैं और उन्होंने Serum Institute of India की स्थापना वर्ष 1966 में की थी. पुणे स्थित यह संस्थान आज दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन निर्माता बन चुका है, जिसने वैश्विक स्वास्थ्य क्षेत्र में भारत की पहचान मजबूत की है. खासतौर पर कोरोना महामारी के दौरान इस संस्थान द्वारा तैयार की गई वैक्सीन ने करोड़ों लोगों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
व्यापार जगत में उनकी पहचान केवल एक सफल उद्योगपति के रूप में ही नहीं बल्कि एक दूरदर्शी नेता के रूप में भी है. विभिन्न वैश्विक सूचियों के अनुसार वह दुनिया के सबसे अमीर लोगों में शामिल हैं. हुरुन ग्लोबल रिच लिस्ट 2023 में उन्हें हेल्थकेयर क्षेत्र का सबसे अमीर अरबपति बताया गया था, जबकि भारत में भी उनका स्थान शीर्ष अमीरों में बना हुआ है. उनकी कुल संपत्ति अरबों डॉलर में आंकी जाती है, जो उनके व्यवसायिक कौशल और निवेश रणनीतियों को दर्शाती है.
शिक्षा और सम्मान की बात करें तो साइरस पूनावाला को University of Oxford द्वारा मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया है. उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें 2005 में पद्मश्री और 2022 में पद्म भूषण से सम्मानित किया, जो देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल हैं. यह सम्मान उनके स्वास्थ्य क्षेत्र में किए गए योगदान और समाज सेवा को मान्यता देते हैं.
उनके परिवार की बात करें तो उनके बेटे Adar Poonawalla वर्तमान में सीरम इंस्टीट्यूट के सीईओ हैं और कंपनी को नई ऊंचाइयों तक ले जा रहे हैं. परिवार का प्रभाव केवल स्वास्थ्य क्षेत्र तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वे मनोरंजन और अन्य क्षेत्रों में भी सक्रिय हैं.
अब बात करें उस पेंटिंग की जिसने यह रिकॉर्ड बनाया है. यशोदा और कृष्ण 1890 के दशक में बनाई गई एक ऑयल पेंटिंग है, जिसमें मां और बच्चे के रिश्ते को बेहद भावनात्मक और कलात्मक तरीके से दर्शाया गया है. इस पेंटिंग को भारतीय कला की सबसे प्रतिष्ठित कृतियों में गिना जाता है. कला विशेषज्ञों के अनुसार यह पेंटिंग न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अत्यधिक मूल्यवान मानी जाती है.
इस ऐतिहासिक खरीद के बाद साइरस पूनावाला ने कहा कि वह खुद को सौभाग्यशाली मानते हैं कि उन्हें इस अमूल्य धरोहर को संरक्षित करने का अवसर मिला है. उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में इस पेंटिंग को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे, ताकि लोग इसे देख सकें और भारतीय कला की महानता को महसूस कर सकें.
यह सौदा भारतीय कला बाजार के लिए एक मील का पत्थर माना जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल भारतीय कलाकारों की वैश्विक पहचान मजबूत होगी, बल्कि कला में निवेश को लेकर भी लोगों की रुचि बढ़ेगी. इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि भारतीय कला अब वैश्विक मंच पर नई ऊंचाइयों को छू रही है और इसमें निवेश करने वाले भी अब इसे एक मूल्यवान संपत्ति के रूप में देखने लगे हैं.
कुल मिलाकर साइरस पूनावाला केवल एक उद्योगपति ही नहीं, बल्कि कला, संस्कृति और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने वाले व्यक्तित्व के रूप में भी सामने आए हैं. उनकी यह पहल आने वाले समय में भारतीय कला को और अधिक सम्मान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

