ओएफके में तैयार नई L-70 गन दुश्मन ड्रोन के लिए बनेगी काल, भारतीय सेना को मिलेगी बड़ी ताकत

ओएफके में तैयार नई L-70 गन दुश्मन ड्रोन के लिए बनेगी काल, भारतीय सेना को मिलेगी बड़ी ताकत

प्रेषित समय :19:40:38 PM / Sat, Apr 4th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

 जबलपुर. भारतीय सेना को जल्द ही अत्याधुनिक और अपग्रेडेड L-70 एंटी-एयरक्राफ्ट गन मिलने जा रही है, जिसका निर्माण जबलपुर स्थित ऑर्डिनेंस फैक्ट्री खमरिया में किया जा रहा है. यह नई गन न केवल तकनीकी रूप से पहले से कहीं अधिक उन्नत होगी, बल्कि दुश्मन के ड्रोन और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमानों को पलभर में मार गिराने की क्षमता भी रखेगी. इस प्रोजेक्ट को ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है.

सूत्रों के अनुसार, इस नई L-70 गन को पूरी तरह आधुनिक तकनीकों से लैस किया जा रहा है. इसमें इलेक्ट्रिक ड्राइव सिस्टम लगाया गया है, जो इसे पहले के मुकाबले अधिक तेज और सटीक बनाता है. इसके साथ ही इसमें अत्याधुनिक फायर कंट्रोल सिस्टम और रडार तकनीक को जोड़ा गया है, जिससे यह गन अपने लक्ष्य को स्वतः पहचान कर उस पर सटीक निशाना साध सकती है. यह विशेषता इसे पारंपरिक एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम से कहीं अधिक घातक और प्रभावी बनाती है.

जबलपुर की ऑर्डिनेंस फैक्ट्री खमरिया लंबे समय से भारतीय सेना के लिए हथियार और गोला-बारूद तैयार करती रही है. अब इस फैक्ट्री में L-70 गन के नए संस्करण का उत्पादन शुरू करने की तैयारियां तेजी से चल रही हैं. बताया जा रहा है कि कुछ समय पहले तक इस गन का उत्पादन रुका हुआ था, लेकिन अब इसे दोबारा शुरू करने के लिए आवश्यक मंजूरी प्रक्रिया अंतिम चरण में है. जैसे ही हरी झंडी मिलेगी, बड़े पैमाने पर इसका निर्माण शुरू कर दिया जाएगा.

यह गन खासतौर पर उन खतरों से निपटने के लिए तैयार की जा रही है जो आज के समय में सबसे ज्यादा चुनौती बनकर सामने आए हैं, जैसे कि दुश्मन देशों द्वारा भेजे जाने वाले ड्रोन. हाल के वर्षों में सीमा क्षेत्रों, खासकर पंजाब और जम्मू-कश्मीर में ड्रोन घुसपैठ की घटनाएं बढ़ी हैं. इन ड्रोन का इस्तेमाल हथियार, विस्फोटक और संवेदनशील जानकारी पहुंचाने के लिए किया जाता रहा है. ऐसे में L-70 गन की भूमिका बेहद अहम हो जाती है, क्योंकि यह तेज गति से उड़ने वाले छोटे लक्ष्यों को भी आसानी से नष्ट कर सकती है.

सेना के अधिकारियों का मानना है कि इस गन ने पहले भी अपनी उपयोगिता साबित की है. पुराने संस्करण ने कई बार सीमा पर दुश्मन के ड्रोन को हवा में ही मार गिराया है. अब इसके नए और उन्नत संस्करण के आने से इसकी क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी. नई तकनीक के कारण यह गन अधिक तेजी से प्रतिक्रिया दे सकेगी और एक साथ कई लक्ष्यों पर नजर रख पाएगी.

इस परियोजना की एक और खास बात यह है कि पहले L-70 गन स्वीडन की तकनीक पर आधारित थी, लेकिन अब इसे पूरी तरह स्वदेशी रूप में विकसित किया जा रहा है. भारतीय वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने इसमें कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, जिससे यह न केवल आधुनिक युद्ध की जरूरतों को पूरा करती है, बल्कि विदेशी तकनीक पर निर्भरता भी कम करती है. यह कदम भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है.

जबलपुर में इस गन के उत्पादन से स्थानीय स्तर पर भी बड़ा आर्थिक असर देखने को मिलेगा. फैक्ट्री में उत्पादन शुरू होने से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और आसपास के उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा. इससे न केवल क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी, बल्कि देश की रक्षा उत्पादन क्षमता भी मजबूत होगी. विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की परियोजनाएं भारत को वैश्विक रक्षा बाजार में भी मजबूत स्थिति में ला सकती हैं.

सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, भविष्य के युद्धों में ड्रोन और लो-फ्लाइंग एयरक्राफ्ट की भूमिका काफी बढ़ने वाली है. ऐसे में L-70 जैसी गनें सेना के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच का काम करेंगी. यह गन कम ऊंचाई पर उड़ने वाले लक्ष्यों को बहुत कम समय में पहचान कर उन्हें नष्ट करने में सक्षम है, जिससे सीमा की सुरक्षा और मजबूत हो जाएगी.

सरकार और रक्षा मंत्रालय इस परियोजना को प्राथमिकता दे रहे हैं. तेजी से बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए भारत अपनी रक्षा तैयारियों को लगातार मजबूत कर रहा है. इसी कड़ी में L-70 गन का यह नया संस्करण एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकता है. यह न केवल सेना की ताकत बढ़ाएगा, बल्कि देश के नागरिकों में भी सुरक्षा का विश्वास मजबूत करेगा.

कुल मिलाकर, जबलपुर में बन रही यह नई L-70 गन भारतीय रक्षा प्रणाली के लिए एक गेम चेंजर साबित हो सकती है. आधुनिक तकनीक, स्वदेशी निर्माण और उच्च सटीकता के साथ यह गन दुश्मनों के लिए एक बड़ी चुनौती बनने वाली है. आने वाले समय में इसके सेना में शामिल होते ही भारत की सीमाएं और अधिक सुरक्षित होंगी और दुश्मन की हर नापाक कोशिश को करारा जवाब मिल सकेगा.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-