अमूल ने रचा इतिहास, एक लाख करोड़ का आंकड़ा पार कर देश की सबसे बड़ी एफएमसीजी कंपनी बनी

अमूल ने रचा इतिहास, एक लाख करोड़ का आंकड़ा पार कर देश की सबसे बड़ी एफएमसीजी कंपनी बनी

प्रेषित समय :15:15:10 PM / Sun, Apr 5th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

देश की अग्रणी डेयरी ब्रांड Amul ने वित्त वर्ष 2025-26 में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए अपना ब्रांड टर्नओवर एक लाख करोड़ रुपये के पार पहुंचा दिया है। यह उपलब्धि भारतीय सहकारी आंदोलन के लिए एक बड़ी सफलता के रूप में देखी जा रही है। इस दौरान अमूल के ब्रांड राजस्व में पिछले वर्ष के मुकाबले 11 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो इसकी लगातार बढ़ती लोकप्रियता और मजबूत बाजार पकड़ को दर्शाती है।

अमूल की मूल संस्था Gujarat Cooperative Milk Marketing Federation ने भी इस वित्त वर्ष में शानदार प्रदर्शन किया है। जीसीएमएमएफ का कुल बिक्री कारोबार 73,450 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष के 65,911 करोड़ रुपये की तुलना में 11.4 प्रतिशत अधिक है। इस वृद्धि के साथ ही जीसीएमएमएफ भारत की सबसे बड़ी एफएमसीजी संस्था बनकर उभरी है, जिसने देश के उपभोक्ता बाजार में अपनी मजबूत स्थिति को और सुदृढ़ किया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अमूल की इस सफलता के पीछे उसकी व्यापक उत्पाद श्रृंखला, मजबूत वितरण नेटवर्क और उपभोक्ताओं की बदलती जरूरतों के अनुसार तेजी से ढलने की क्षमता प्रमुख कारण हैं। अमूल के पास वर्तमान में 1200 से अधिक उत्पाद पैक का विशाल पोर्टफोलियो है, जो देश के हर वर्ग के उपभोक्ताओं की जरूरतों को पूरा करता है। इसके साथ ही देशभर में फैला उसका वितरण तंत्र इसे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में समान रूप से मजबूत बनाता है।

अमूल के साथ जुड़े 18 सदस्य जिला सहकारी संघों ने भी इस सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ये सहकारी संस्थाएं स्थानीय स्तर पर दूध उत्पादन और संग्रहण को मजबूत बनाती हैं, जिससे न केवल किसानों को लाभ मिलता है बल्कि उपभोक्ताओं तक उच्च गुणवत्ता वाले डेयरी उत्पाद भी पहुंचते हैं। इस मॉडल ने भारतीय डेयरी उद्योग को एक नई दिशा दी है और इसे वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई है।

इस उपलब्धि के साथ अमूल ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान मजबूत की है। हाल ही में International Cooperative Alliance द्वारा अमूल को दुनिया की नंबर एक सहकारी संस्था के रूप में मान्यता दी गई है। यह सम्मान न केवल अमूल बल्कि पूरे भारतीय सहकारी आंदोलन के लिए गर्व की बात है।

अमूल ने बीते वर्ष के दौरान वैश्विक विस्तार की दिशा में भी कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। कंपनी ने यूरोप और अमेरिका में ताजा दूध की बिक्री शुरू कर अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। यह कदम भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi के उस विजन के अनुरूप है, जिसमें उन्होंने हर वैश्विक भोजन की मेज पर भारतीय खाद्य उत्पादों की उपस्थिति की बात कही थी। अमूल का यह प्रयास भारतीय ब्रांड को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

इस बीच सहकारी मॉडल को और विस्तार देने के उद्देश्य से केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने 6 जुलाई 2025 को सरदार पटेल कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन लिमिटेड की शुरुआत की थी। यह नई संस्था गुजरात के बाहर के गांवों की डेयरी सहकारी समितियों को एक राष्ट्रीय नेटवर्क में जोड़ने का काम करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल देश में दूसरी श्वेत क्रांति का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।

अमूल की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर संगठन के शीर्ष नेतृत्व ने भी खुशी जाहिर की है। जीसीएमएमएफ के अध्यक्ष अशोकभाई चौधरी ने कहा कि एक लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पार करना करोड़ों उपभोक्ताओं के विश्वास और लाखों डेयरी किसानों की कड़ी मेहनत का परिणाम है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि सहकारी आंदोलन की ताकत को दर्शाती है, जिसने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

जीसीएमएमएफ के उपाध्यक्ष गोरधनभाई धामेलिया ने भी इस सफलता को सहकारी भावना की जीत बताया। उन्होंने कहा कि अमूल मॉडल यह साबित करता है कि सामूहिक प्रयास और पारदर्शी व्यवस्था के माध्यम से आर्थिक लोकतंत्र को सशक्त बनाया जा सकता है। उनका मानना है कि इस मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर लागू कर देश के लाखों किसानों की आय में वृद्धि की जा सकती है।

वहीं, जीसीएमएमएफ के प्रबंध निदेशक डॉ. जयन मेहता ने कहा कि अमूल केवल अपने कारोबार का विस्तार नहीं कर रहा है, बल्कि वह यह भी दिखा रहा है कि एक किसान-स्वामित्व वाली संस्था आधुनिक वैश्विक अर्थव्यवस्था में किस तरह प्रतिस्पर्धा कर सकती है। उन्होंने कहा कि तकनीक और वैश्विक व्यापार के लाभ सीधे किसानों तक पहुंचाना अमूल का मुख्य उद्देश्य है।

विश्लेषकों के अनुसार, अमूल की यह उपलब्धि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए भी सकारात्मक संकेत है। यह दर्शाता है कि देश में सहकारी मॉडल के जरिए बड़े पैमाने पर आर्थिक विकास संभव है। साथ ही यह भी साबित करता है कि यदि सही रणनीति और नेतृत्व हो तो भारतीय ब्रांड वैश्विक स्तर पर भी अपनी मजबूत पहचान बना सकते हैं।

अमूल की सफलता ने अन्य सहकारी संस्थाओं और एफएमसीजी कंपनियों के लिए भी एक उदाहरण प्रस्तुत किया है। आने वाले वर्षों में यह देखना दिलचस्प होगा कि अमूल किस तरह अपनी इस उपलब्धि को बनाए रखते हुए नए बाजारों में विस्तार करता है और उपभोक्ताओं की बदलती जरूरतों के अनुसार खुद को ढालता है।

इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ अमूल ने न केवल एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है, बल्कि यह भी साबित कर दिया है कि भारत का सहकारी मॉडल विश्व स्तर पर सफलता का प्रतीक बन सकता है।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-