लंदन. ब्रिटेन से एक बेहद अजीबोगरीब कानूनी मामला सामने आया है. यहाँ एक हेल्थकेयर असिस्टेंट इल्डा एस्टेवेस को उनके सहकर्मी द्वारा बार-बार आंटी कहकर पुकारना कानूनी पचड़े में बदल गया. इल्डा ने इसे अपना अपमान माना और मामले को कोर्ट तक ले गईं. वाटफोर्ड एम्प्लॉयमेंट ट्रिब्यूनल ने अब इस मामले में फैसला सुनाते हुए महिला के पक्ष में 1.8 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है.
विरोध के बावजूद किया संबोधन का इस्तेमाल
यह मामला वेस्ट लंदन एनएचएस ट्रस्ट का है. इल्डा एस्टेवेस ने आरोप लगाया कि उनके टीम लीडर चार्ल्स ओपोंग उन्हें बार-बार आंटी कहते थे. इल्डा ने कई बार ओपोंग को टोका और आग्रह किया कि वे उन्हें नाम से बुलाएं, लेकिन ओपोंग ने उनकी बात नहीं मानी. इल्डा का आरोप है कि जब उन्होंने विरोध किया, तो ओपोंग ने उन पर तंज कसते हुए कहा कि वे जवान दिखना चाहती हैं, इसलिए उन्हें यह शब्द पसंद नहीं आ रहा.
संस्कृति की दलील नहीं आई काम
चार्ल्स ओपोंग ने अदालत में अपनी सफाई देते हुए कहा कि वे घाना की संस्कृति से ताल्लुक रखते हैं. उन्होंने दलील दी कि उनकी संस्कृति में उम्र में बड़ी महिलाओं को 'आंटी' कहना सम्मान और आदर का प्रतीक है. हालांकि, जज ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि पेशेवर माहौल में किसी की इच्छा के विरुद्ध ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करना अनुचित है.
कोर्ट का सख्त रुख और फैसला
मामले की सुनवाई के दौरान जज ने टिप्पणी की कि दफ्तर में इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल एक अपमानजनक माहौल बनाता है. अदालत ने स्पष्ट किया कि भले ही किसी संस्कृति में आंटी कहना सम्मानजनक हो, लेकिन अगर सामने वाले व्यक्ति को यह पसंद नहीं है, तो उसे उस पर थोपा नहीं जा सकता. कोर्ट ने इसे उम्र और लिंग के आधार पर किया गया उत्पीडऩ माना.
मुआवजे का आदेश
वाटफोर्ड एम्प्लॉयमेंट ट्रिब्यूनल ने वेस्ट लंदन एनएचएस ट्रस्ट को आदेश दिया कि वे इल्डा एस्टेवेस को मुआवजे के तौर पर £1,425 (लगभग 1.8 लाख रुपये) का भुगतान करें. कोर्ट ने माना कि इल्डा के साथ किया गया व्यवहार उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुँचाने वाला था. इस फैसले ने कार्यस्थल पर भाषा की मर्यादा और व्यक्तिगत पसंद के महत्व को एक बार फिर रेखांकित किया है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-


