जबलपुर. फर्जी दस्तावेज़ के आधार पर नौकरी पाने और उसके बाद सेवा से हटाए जाने के मामले में गुलाम अंसारी पुलिस सूबेदार ने माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर में याचिका दायर कर न्याय की गुहार लगाई है. याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अजय रायजादा एवं शारिक अकील फारुकी का कहना है कि याचिकाकर्ता को विधिवत चयन प्रक्रिया के तहत नियुक्ति आदेश दिनांक 18 नवंबर 2015 को प्रदान किया गया था और वह पूरी निष्ठा से कार्य कर रहा था.
मामले के अनुसार, कुछ उम्मीदवारों के दस्तावेज़ों की सत्यता को लेकर शिकायतें सामने आने पर विशेष कार्य बल (STF) द्वारा जांच प्रारंभ की गई. इस दौरान याचिकाकर्ता सहित अन्य अभ्यर्थियों ने भी उच्च न्यायालय में याचिकाएं दायर की थीं, जिन पर वर्ष 2018 में अंतरिम आदेश पारित हुआ था. जांच के पश्चात एसटीएफ द्वारा चालान प्रस्तुत किया गया तथा विभाग को कार्रवाई हेतु पत्राचार किया गया. जांच अधिकारी की रिपोर्ट में एक आरोप को प्रमाणित बताया गया, जबकि अन्य आरोपों को सिद्ध नहीं माना गया. इसके बावजूद विभाग द्वारा याचिकाकर्ता को सेवा से हटाने का आदेश पारित कर दिया गया. याचिकाकर्ता ने इस आदेश के विरुद्ध डीआईजी, रीवा रेंज के समक्ष अपील की, जिसे निरस्त कर दिया गया. इसके बाद दया याचिका भी खारिज कर दी गई. इसके पश्चात पुनरीक्षण याचिका भी अस्वीकार कर दी गई.
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि समान परिस्थितियों में अन्य कर्मचारियों के मामलों में विभाग द्वारा के विरद्ध भी याचिकाकर्ता के समान आरोप लगे थे लेकिन उन पर अलग दृष्टिकोण अपनाया गया एवं वे लगातार सेवा कर रहे है, जबकि याचिकाकर्ता को सेवा से पृथक करने का कठोर दंड दिया गया है. याचिकाकर्ता का यह भी कहना है कि उसे किसी आपराधिक न्यायालय द्वारा दोषी नहीं ठहराया गया है, इसके बावजूद सेवा से बर्खास्त कर दिया गया. मामले में सुनवाई के पश्चात माननीय न्यायमूर्ती श्री विशाल धगट ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जबाव मांगा है.
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