जबलपुर के वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार मोहन शशि का निधन शहर में शोक की लहर

जबलपुर के वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार मोहन शशि का निधन शहर में शोक की लहर

प्रेषित समय :21:29:08 PM / Tue, Apr 14th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. शहर ने आज अपने एक ऐसे शब्द-साधक को खो दिया, जिसकी लेखनी ने दशकों तक समाज को दिशा देने का कार्य किया. वरिष्ठ पत्रकार, साहित्यकार और समाजसेवी मोहन शशि का 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया. उनके निधन की खबर मिलते ही पूरे शहर में शोक की लहर दौड़ गई और पत्रकारिता जगत के साथ-साथ सामाजिक व साहित्यिक क्षेत्र में गहरा दुख व्याप्त हो गया. वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे और पिछले कुछ समय से उनका स्वास्थ्य लगातार गिरता जा रहा था.

मोहन शशि को जबलपुर की पत्रकारिता का एक मजबूत स्तंभ माना जाता था. उन्होंने अपने लंबे और समर्पित करियर में कई प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं और अपनी निष्पक्ष, निर्भीक और जनहितैषी पत्रकारिता के लिए विशेष पहचान बनाई. उनके लेखों में हमेशा सच्चाई की झलक मिलती थी और वे समाज के ज्वलंत मुद्दों को पूरी गंभीरता और ईमानदारी के साथ उठाते थे. यही कारण रहा कि उन्होंने पाठकों के बीच एक अलग ही विश्वास और सम्मान अर्जित किया.

एक प्रखर लेखक और विचारक के रूप में मोहन शशि ने सिर्फ खबरें लिखने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्होंने समाज को जागरूक करने का भी महत्वपूर्ण कार्य किया. उनकी लेखनी में जहां एक ओर तीखी दृष्टि और स्पष्टता थी, वहीं दूसरी ओर समाज के प्रति गहरी संवेदनशीलता भी दिखाई देती थी. उन्होंने शहर के विकास, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक सरोकारों को लेकर लगातार लेखन किया और लोगों को सोचने के लिए प्रेरित किया.

जबलपुर की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा. वे विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े रहे और हमेशा सकारात्मक बदलाव के पक्षधर रहे. उनके व्यक्तित्व में सादगी, विचारों में स्पष्टता और कार्यशैली में ईमानदारी झलकती थी, जिसने उन्हें हर वर्ग के लोगों के बीच प्रिय बना दिया.

उनके निधन पर शहर के पत्रकारों, साहित्यकारों और गणमान्य नागरिकों ने गहरा शोक व्यक्त किया है. कई संगठनों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि मोहन शशि का योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा और उनकी कमी कभी पूरी नहीं हो सकेगी. शोक संतप्त परिवार के प्रति भी सभी ने अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त की हैं. उनके जाने से जबलपुर की पत्रकारिता और साहित्य जगत में एक ऐसी रिक्तता उत्पन्न हो गई है, जिसे भर पाना बेहद कठिन होगा..  . 

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-