छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण हादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया है. 14 अप्रैल को बॉयलर ट्यूब फटने से हुए इस विस्फोट में अब तक 20 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि 16 अन्य गंभीर रूप से घायल हैं और अस्पताल में जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे हैं.
इस हादसे ने कई परिवारों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी है. मृतकों में बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के मजदूर शामिल हैं, जो अपने परिवार की आजीविका के लिए यहां काम करने आए थे. कई घरों में कमाने वाले इकलौते सदस्य की मौत से अब रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है.
बिहार के भागलपुर निवासी संतोष कुमार के परिवार पर दुखों का दोहरा वार हुआ है. उन्होंने कुछ दिन पहले ही अपने चाचा को खोया था और अब उनके भाई रितेश कुमार भी इस हादसे का शिकार हो गए. रितेश तीन बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए इस प्लांट में काम कर रहे थे.
वहीं, रायगढ़ के अस्पतालों में अपने भाई की तलाश में भटकते सानी कुमार अनंत को आखिरकार यह दर्दनाक खबर मिली कि उनके 29 वर्षीय भाई रामेश्वर महिलांगे अब इस दुनिया में नहीं रहे. उनके पीछे एक छोटा बच्चा है, जिसकी जिम्मेदारी अब परिवार पर आ गई है.
झारखंड से पहुंचे उदय राम ने अपने दामाद बृजेश कुमार को खो दिया, जो हाल ही में इस प्लांट में काम करने लगे थे. उनके दो छोटे बच्चे हैं, जो अब पिता के साए से वंचित हो गए हैं.
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, धमाका इतना भयावह था कि मानो कोई बड़ा विस्फोट या मिसाइल गिर गई हो. कुछ ही पलों में पूरा क्षेत्र धुएं से भर गया और नीचे काम कर रहे मजदूर बुरी तरह झुलस गए.
पश्चिम बंगाल के शेख सैफुद्दीन, जो जल्द ही घर लौटकर चुनाव में वोट डालने वाले थे, भी इस हादसे में मारे गए. उनके परिवार को पहले उनके बीमार होने की सूचना मिली, लेकिन जब तक परिजन पहुंचे, तब तक बहुत देर हो चुकी थी.
यह हादसा न सिर्फ छत्तीसगढ़, बल्कि कई राज्यों के परिवारों के लिए गहरा घाव बन गया है. अब सभी की नजरें सरकार और प्रशासन पर हैं कि पीड़ित परिवारों को किस तरह सहायता और न्याय मिल पाता है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

