जबलपुर. एमपी के जबलपुर में शिक्षा में सुधार के लिए प्रतिवर्ष लाखों रुपए खर्च किए जा रहे है, स्मार्ट क्लास जैसी सुविधाएं भी दी जा रही है इसके बाद भी हालात जस के तस ही है. हाल ही में जारी 10वीं और 12वीं के नतीजों में जबलपुर संभाग के अन्य जिलों की तुलना में फिसड्डी ही रहा है.
12वीं के परिणाम में जबलपुर 8 जिलों में 6वें स्थान पर रहा, जबकि 10वीं में यह सबसे निचले यानी 8वें स्थान पर रहा. इसके विपरीत 12वीं में नरसिंहपुर जिला शीर्ष पर रहा, वहीं 10वीं में मंडला ने पहला स्थान हासिल किया. ऐसे में जबलपुर की स्थिति आदिवासी बहुल जिलों से भी कमजोर दिखाई दी है. इस स्थिति ने सरकारी स्कूलों की पढ़ाई, शिक्षकों की भूमिका और उनकी निगरानी करने वाले शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
हालांकि संभाग का कुल परीक्षा परिणाम बेहतर रहा है. 12वीं (हायर सेकेंडरी) में संभाग का रिजल्ट 86.87 प्रतिशत रहा, जो राज्य के औसत 78.01 प्रतिशत से अधिक है. इस परीक्षा में संभाग के 24 विद्यार्थियों ने राज्य की प्रवीण्य सूची में स्थान बनाया. शासकीय विद्यालयों के परिणाम में नरसिंहपुर (93.94 प्रतिशत) सबसे आगे रहा, इसके बाद मंडला, बालाघाट, डिंडौरी, छिंदवाड़ा, जबलपुर, सिवनी और कटनी का स्थान रहा. डिंडौरी को छोड़कर बाकी जिलों में सरकारी स्कूलों का प्रदर्शन निजी स्कूलों से बेहतर रहा.
10वीं का संभाग में रिजल्ट 85.44 प्रतिशत, जबलपुर सबसे पीछे रहा-
इसी तरह 10वीं (हाई स्कूल) में भी संभाग का रिजल्ट 85.44 प्रतिशत रहा, जो राज्य के औसत 76.80 प्रतिशत से अधिक है. इस परीक्षा में 91 छात्रों ने प्रवीण्य सूची में जगह बनाई. मंडला जिले के शासकीय स्कूलों का परिणाम 90.38 प्रतिशत के साथ सबसे बेहतर रहा, जबकि जबलपुर सबसे पीछे रहा.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

