राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा, ब्रिटिश नागरिकता की जांच करे सीबीआई

राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा, ब्रिटिश नागरिकता की जांच करे सीबीआई

प्रेषित समय :18:00:33 PM / Fri, Apr 17th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

लखनऊ. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है. दोहरी नागरिकता से जुड़े मामले में आज लखनऊ बेंच में सुनवाई हुई. यह मामला निचली अदालत के उस फैसले के खिलाफ है, जिसमें राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग को खारिज कर दिया था.

उत्तरप्रदेश सरकार की ओर से वकील ने कहा कि इस पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई करे. इस पर जज ने मंजूरी देते हुए कहा कि एफआईआर दर्ज करके मामले को सीबीआई को ट्रांसफर किया जाए. अब एफआईआर दर्ज होने के बाद प्रकरण की जांच सीबीआई करेगी. यह मामला पहली बार इस स्तर पर लखनऊ बेंच में विस्तार से सुना जा रहा है, जिसमें केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने आधिकारिक रूप से अपना पक्ष रखा है. याचिकाकर्ता की ओर से दावा किया गया है कि दाखिल हलफनामा उनके आरोपों के समर्थन में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है.

कोर्ट ने मंत्रालय से टॉप सीक्रेट फाइलें ली-

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने गृह मंत्रालय के फॉरेनर्स डिवीजन को निर्देश थे कि मामले से संबंधित सभी जरूरी दस्तावेज पेश करें. मंत्रालय ने केस से जुड़ी सभी फाइलें हाईकोर्ट में पेश कीं. मामले में याचिका दायर करने वाले विग्नेश शिशिर ने दावा किया है कि उन्होंने कोर्ट के समक्ष ऐसे दस्तावेज और साक्ष्य पेश किए हैं, जिनसे यह संकेत मिलता है कि राहुल गांधी यूनाइटेड किंगडम में मतदाता रहे हैं. वहां चुनावों में भागीदारी से जुड़े रिकॉर्ड मौजूद हैं.

निचली अदालत के आदेश को चुनौती-

यह याचिका आपराधिक प्रार्थना पत्र (क्रिमिनल एप्लिकेशन) के रूप में दाखिल की गई है, जिसमें 28 जनवरी 2026 को स्पेशल एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट द्वारा दिए गए आदेश को चुनौती दी गई है. निचली अदालत ने कोतवाली थाना, रायबरेली को एफआईआर दर्ज करने के निर्देश देने से इनकार कर दिया था, जिसे अब हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी. जिसे हाईकोर्ट ने मान लिया है और एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं.

कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज करने की मांग-

याचिका में राहुल गांधी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट 1923, पासपोर्ट एक्ट 1967 और फॉरेनर्स एक्ट 1946 के उल्लंघन के आरोप लगाए हैं. याचिकाकर्ता का कहना है कि यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिकता से जुड़ा गंभीर विषय है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-