टीईटी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट पहुंची रिव्यू पिटीशन से हजारों शिक्षकों को मिली राहत की उम्मीद

टीईटी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट पहुंची रिव्यू पिटीशन से हजारों शिक्षकों को मिली राहत की उम्मीद

प्रेषित समय :20:20:45 PM / Sat, Apr 18th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. मध्य प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा को लेकर लंबे समय से जारी विवाद अब एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया है. राज्य सरकार ने इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाते हुए रिव्यू पिटीशन दायर कर दी है, जिससे प्रदेश के हजारों शिक्षकों और अभ्यर्थियों में राहत की उम्मीद जगी है. सरकार के इस कदम को शिक्षकों के बढ़ते विरोध और लगातार उठ रही मांगों के बीच एक बड़ा निर्णय माना जा रहा है, जिसने पूरे शिक्षक वर्ग का ध्यान अपनी ओर खींचा है.

जानकारी के अनुसार, यह याचिका 17 अप्रैल की शाम को दायर की गई. डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार ने यह कदम उस समय उठाया जब शिक्षक संगठनों द्वारा लगातार इस मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन किए जा रहे थे. हाल ही में मुख्यमंत्री और शिक्षक संघों के प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक में इस विषय पर विस्तार से चर्चा की गई थी. बैठक में शिक्षकों ने टीईटी से जुड़े आदेशों के कारण उत्पन्न हो रही समस्याओं को सामने रखा था, जिस पर मुख्यमंत्री ने सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया था.

बताया जा रहा है कि लोक शिक्षण संचालनालय के आयुक्त अभिषेक सिंह ने मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री जितेंद्र सिंह को इस संबंध में जानकारी दी, जिसके बाद शिक्षक संगठनों में इस निर्णय को लेकर संतोष और उम्मीद का माहौल बना है. संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि यह कदम शिक्षकों के हितों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है.

दरअसल, विवाद की जड़ में वह आदेश है जिसे लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल द्वारा जारी किया गया था. इस आदेश के तहत जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में पांच वर्ष से अधिक समय शेष है, उन्हें टीईटी परीक्षा अनिवार्य रूप से उत्तीर्ण करनी होगी. साथ ही, उन्हें यह परीक्षा दो वर्ष के भीतर पास करनी होगी, अन्यथा उनकी सेवाएं समाप्त की जा सकती हैं. यह निर्देश सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व आदेशों के आधार पर लागू किया गया था, लेकिन इससे हजारों सेवारत शिक्षक असंतुष्ट हो गए थे.

इसी आदेश के विरोध में 9 अप्रैल को राजधानी भोपाल में शिक्षकों ने बड़ा प्रदर्शन किया था. शिक्षक संगठनों ने डीपीआई कार्यालय का घेराव कर टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग उठाई थी. प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने नारेबाजी करते हुए मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भी सौंपा था. उनका कहना था कि यह आदेश पुराने शिक्षकों के लिए अन्यायपूर्ण है और इससे उनकी नौकरी पर संकट उत्पन्न हो गया है.

प्रदर्शनकारियों ने यह भी चेतावनी दी थी कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो 18 अप्रैल को भोपाल में और बड़ा आंदोलन किया जाएगा. इसके साथ ही प्रदेश भर के शिक्षक राजधानी में एकत्र होकर व्यापक विरोध प्रदर्शन करने की तैयारी में थे. इस बढ़ते दबाव के बीच सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर करना एक रणनीतिक और राहत देने वाला कदम माना जा रहा है.

शिक्षक संगठनों ने लगातार यह मांग उठाई थी कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से रखे और टीईटी से जुड़े आदेश पर पुनर्विचार कराया जाए. इस संबंध में स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने भी शिक्षकों को आश्वस्त किया था कि सरकार उनकी समस्याओं के प्रति संवेदनशील है और उचित कदम उठाए जाएंगे. मंत्री से हुई मुलाकात में शिक्षक प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया था कि वर्तमान आदेश के चलते हजारों शिक्षकों की नौकरी खतरे में पड़ सकती है, जिसे लेकर व्यापक असंतोष है.

राज्य कर्मचारी संघ और शिक्षक संघों के अनुसार, सरकार का यह कदम केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि शिक्षकों के हितों की रक्षा का संकेत है. उनका मानना है कि रिव्यू पिटीशन के माध्यम से सरकार सुप्रीम कोर्ट के समक्ष वास्तविक स्थिति और शिक्षकों की कठिनाइयों को प्रभावी ढंग से रख सकेगी, जिससे सकारात्मक निर्णय आने की संभावना बढ़ेगी.

फिलहाल, पूरे प्रदेश में शिक्षक समुदाय की नजर अब सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी हुई है. यह मामला न केवल हजारों शिक्षकों के भविष्य से जुड़ा हुआ है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था और नीतिगत निर्णयों पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है. ऐसे में सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम आने वाले समय में महत्वपूर्ण परिणाम दे सकता है.

इस घटनाक्रम ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि नीति निर्माण में संबंधित वर्गों की समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखना कितना आवश्यक है. अब यह देखना अहम होगा कि सर्वोच्च न्यायालय इस रिव्यू पिटीशन पर क्या रुख अपनाता है और क्या इससे शिक्षकों को वास्तविक राहत मिल पाती है या नहीं.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-