नर्मदा के बीच सड़क और पुल का मलबा गिराने से जलीय जीवन पर संकट, पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी पर उठे सवाल

नर्मदा के बीच सड़क और पुल का मलबा गिराने से जलीय जीवन पर संकट, पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी पर उठे सवाल

प्रेषित समय :20:09:03 PM / Sat, Apr 18th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. आस्था की प्रतीक नर्मदा नदी एक बार फिर मानवीय लापरवाही और विकास कार्यों की अनदेखी का शिकार होती नजर आ रही है. जमतरा और तिलहरी घाट क्षेत्र से सामने आए मामले ने न केवल पर्यावरण संरक्षण के दावों की पोल खोल दी है, बल्कि यह भी दिखा दिया है कि किस तरह नियमों को दरकिनार कर नदी के अस्तित्व से खिलवाड़ किया जा रहा है. नदी के बीचो-बीच सड़क निर्माण और ऐतिहासिक पुल को काटकर सीधे पानी में गिराने की घटनाओं ने जलीय जीवन और पारिस्थितिकी तंत्र पर गंभीर खतरा पैदा कर दिया है.

प्राप्त जानकारी के अनुसार, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अंतर्गत एक पुराने स्टील ब्रिज को हटाने का कार्य निजी ठेकेदार को सौंपा गया था. उज्जैन की गोमती ट्रेडिंग कंपनी द्वारा इस कार्य को अंजाम दिया जा रहा है. आरोप है कि कंपनी ने निर्धारित मानकों और सुरक्षित तकनीकों का पालन करने के बजाय पुल के हिस्सों को गैस वेल्डिंग के माध्यम से काटकर सीधे नर्मदा नदी में गिरा दिया. इस प्रक्रिया में भारी मात्रा में लोहे के टुकड़े और उनसे निकलने वाले रासायनिक तत्व पानी में मिल गए, जिससे जलीय जीवों के जीवन पर गंभीर असर पड़ा है. स्थानीय स्तर पर यह भी सामने आया है कि बड़ी संख्या में मछलियों और अन्य जलचरों की मृत्यु हुई है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं की गई है.

मामले को और गंभीर बनाता है नदी के भीतर तैयार किया गया अस्थायी मार्ग. पुल के मलबे को बाहर निकालने के नाम पर ठेकेदार ने नर्मदा की मुख्य धारा के बीच मुरुम, पत्थर और बोल्डर डालकर एक कच्ची सड़क बना दी है. इस सड़क पर अब जेसीबी, हाइवा और भारी ट्रकों की आवाजाही लगातार जारी है. नदी के मध्य भाग में इस तरह मशीनों का संचालन और वाहनों से निकलने वाला तेल और ग्रीस सीधे पानी में मिल रहा है, जिससे जल प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है और पानी की शुद्धता पर असर पड़ रहा है.

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी नदी के मुख्य प्रवाह क्षेत्र में इस प्रकार का हस्तक्षेप उसके प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़ सकता है. नर्मदा जैसी संवेदनशील और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नदी के साथ इस तरह की गतिविधियां न केवल पर्यावरणीय दृष्टि से गलत हैं, बल्कि यह धार्मिक भावनाओं के भी विपरीत है. नियमानुसार पुल के टुकड़ों को किनारे पर लाकर काटा जाना चाहिए था, लेकिन लागत बचाने और लापरवाही के चलते पूरा काम नदी के भीतर ही किया जा रहा है.

स्थानीय नागरिकों और नर्मदा भक्तों ने इस पूरे घटनाक्रम पर गहरी आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि यदि निर्माण कार्य के बाद यह अस्थायी सड़क नहीं हटाई गई, तो यह भविष्य में अवैध रेत उत्खनन करने वालों के लिए एक स्थायी रास्ता बन सकती है. इससे नदी का दोहन और अधिक बढ़ेगा और पारिस्थितिक तंत्र को स्थायी नुकसान पहुंचेगा. साथ ही, नदी के प्राकृतिक बहाव में रुकावट आने से किनारों पर कटाव का खतरा भी बढ़ गया है, जिससे आसपास के क्षेत्रों पर भी प्रभाव पड़ सकता है.

यह पूरा मामला नगर निगम सीमा के अंतर्गत आने वाले रानी अवंती बाई वार्ड क्षेत्र का है, जहां खुलेआम पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी की जा रही है. स्थानीय प्रशासन पर भी सवाल उठ रहे हैं कि इतनी गंभीर स्थिति के बावजूद अब तक कोई ठोस और सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की गई. हालांकि मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है.

कार्यपालक मजिस्ट्रेट बरगी रवींद्र पटेल ने बताया कि शिकायत मिलने पर जमतरा और तिलहरी घाट क्षेत्र का निरीक्षण किया गया है. मौके पर मौजूद कंपनी के प्रतिनिधियों ने रेलवे से प्राप्त अनुमति के दस्तावेज प्रस्तुत किए हैं. इसके बावजूद प्रशासन ने कंपनी से एक शपथ पत्र लेने की प्रक्रिया शुरू की है, जिसमें यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कार्य पूरा होने के बाद नदी के भीतर बनाई गई सड़क और सारा मलबा पूरी तरह हटा दिया जाए.

इसके साथ ही अन्य वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा भी पूरे मामले की विस्तृत जांच की जा रही है. हालांकि अब भी यह सवाल बना हुआ है कि यदि अनुमति दी गई थी, तो उसमें पर्यावरण संरक्षण के नियमों का पालन क्यों नहीं किया गया और क्या संबंधित विभागों ने निगरानी की जिम्मेदारी सही ढंग से निभाई.

यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि विकास कार्यों के नाम पर प्राकृतिक संसाधनों के साथ किस हद तक समझौता किया जा रहा है. नर्मदा जैसी जीवनदायिनी नदी केवल जल स्रोत ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और धार्मिक आस्था का केंद्र भी है. ऐसे में इसके संरक्षण को नजरअंदाज करना भविष्य के लिए गंभीर खतरे का संकेत है. अब देखना यह होगा कि प्रशासनिक जांच के बाद इस मामले में क्या कार्रवाई होती है और क्या वास्तव में दोषियों को जिम्मेदार ठहराया जाता है या नहीं.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-