जबलपुर. बढ़ते जल संकट को देखते हुए प्रशासन ने बड़ा और कड़ा फैसला लिया है. कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह ने पूरे जिले को 30 जून तक के लिए ‘जल अभावग्रस्त क्षेत्र’ घोषित कर दिया है. इस आदेश के लागू होते ही अब जिले में बिना पूर्व अनुमति के किसी भी निजी नलकूप या बोरवेल के खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है. प्रशासन का कहना है कि यह कदम भू-जल स्तर में लगातार गिरावट को रोकने और आम नागरिकों को पेयजल की समान उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है.
जारी आदेश के अनुसार, यह प्रतिबंध जिले के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में प्रभावी रहेगा. हालांकि, यह रोक केवल निजी बोरवेल खनन पर लागू होगी और शासकीय कार्यों के लिए आवश्यक जल स्रोतों पर इसका असर नहीं पड़ेगा. यदि किसी व्यक्ति को अपनी निजी भूमि पर बोरवेल खुदवाना है, तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत संबंधित अनुविभागीय राजस्व अधिकारी (एसडीएम) को आवेदन करना होगा. अनुमति देने से पहले लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों से तकनीकी अभिमत लिया जाएगा, जिसके आधार पर ही निर्णय लिया जाएगा.
प्रशासन ने जिले के सभी प्राकृतिक और सार्वजनिक जल स्रोतों को लेकर भी सख्त निर्देश जारी किए हैं. आदेश के तहत नदी, नाले, स्टापडैम और सार्वजनिक कुओं के पानी का उपयोग केवल पेयजल और घरेलू जरूरतों के लिए ही किया जा सकेगा. इन स्रोतों से सिंचाई या अन्य व्यावसायिक उपयोग के लिए पानी निकालने पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा. यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि सीमित जल संसाधनों का उपयोग प्राथमिक जरूरतों के लिए सुनिश्चित किया जा सके और किसी भी प्रकार की कमी से बचा जा सके.
जबलपुर में इन दिनों तापमान में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है, जिससे पेयजल की समस्या और अधिक गंभीर होती जा रही है. कई क्षेत्रों में जलस्तर तेजी से नीचे जा रहा है, जिससे हैंडपंप और कुओं में पानी का स्तर घटने लगा है. लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने भी अपनी रिपोर्ट में इस स्थिति को चिंताजनक बताते हुए तत्काल प्रभाव से नियंत्रणात्मक कदम उठाने की सिफारिश की थी, जिसके बाद कलेक्टर ने यह आदेश जारी किया.
कलेक्टर ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि आदेश का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों और निजी ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. बिना अनुमति बोरवेल खनन करते पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसमें जुर्माना और अन्य कानूनी प्रावधान शामिल हो सकते हैं. प्रशासन ने यह भी कहा है कि इस निर्णय का उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं, बल्कि जिले के सभी नागरिकों को इस भीषण गर्मी में पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना है.
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