वेदांता पावर प्लांट हादसा मृतकों का आंकड़ा 24 तक पहुंचा प्रबंधन और चेयरमैन पर एफआईआर दर्ज

वेदांता पावर प्लांट हादसा मृतकों का आंकड़ा 24 तक पहुंचा प्रबंधन और चेयरमैन पर एफआईआर दर्ज

प्रेषित समय :20:30:55 PM / Sun, Apr 19th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

सक्ती. छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण विस्फोट ने समूचे राज्य को झकझोर कर रख दिया है. इस त्रासदी की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मरने वालों की संख्या निरंतर बढ़ रही है और रविवार 19 अप्रैल 2026 तक यह आंकड़ा 24 तक पहुंच चुका है. हिनौता और आसपास के क्षेत्रों में जहां औद्योगिक विकास की उम्मीदें थीं, वहां अब केवल मातम और चीख-पुकार का माहौल है. 14 अप्रैल की उस मनहूस दोपहर को जब प्लांट में धमाका हुआ, तो किसी को भनक भी नहीं थी कि यह देश के औद्योगिक इतिहास की सबसे दुखद घटनाओं में से एक बन जाएगी. घटना के तुरंत बाद बचाव कार्य शुरू किए गए, लेकिन प्लांट के अंदर की स्थिति इतनी विकट थी कि घायलों को बचाने का संघर्ष अब भी जारी है. वर्तमान में 11 अन्य लोग विभिन्न अस्पतालों में मौत और जिंदगी के बीच जूझ रहे हैं, जिनमें से दो की स्थिति बेहद नाजुक बताई जा रही है. मेडिकल कॉलेज रायगढ़ और अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में इलाज के दौरान एक के बाद एक मजदूरों ने दम तोड़ना शुरू किया, जिससे मृतकों का ग्राफ तेजी से ऊपर चढ़ा है. मृतक सुब्रतो जेना, जो मूल रूप से पश्चिम बंगाल का निवासी था, उसकी मौत की पुष्टि के बाद क्षेत्र में आक्रोश और बढ़ गया है.

इस घटना के बाद उपजे जन आक्रोश और सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ने की खबरों के बीच प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है. पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल, प्लांट प्रमुख देवेंद्र पटेल और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. सक्ती के पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर ने स्पष्ट किया है कि जांच का दायरा केवल एफआईआर तक सीमित नहीं रहेगा और यदि विवेचना के दौरान किसी और की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है, तो उनके नाम भी इस सूची में जोड़े जाएंगे. मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल यानी एसआईटी का गठन किया गया है, जिसकी कमान एडिशनल एसपी पंकज पटेल के हाथों में है. इस टीम में एसडीओपी सुमित गुप्ता और फॉरेंसिक विशेषज्ञ सृष्टि सिंह सहित कई अनुभवी अधिकारियों को शामिल किया गया है, ताकि सबूतों के साथ कोई छेड़छाड़ न हो सके और दोषियों को कठोरतम सजा मिल सके.

हादसे की भयावहता को देखते हुए औद्योगिक सुरक्षा से जुड़ी केंद्रीय जांच टीम भी दिल्ली से सक्ती पहुंच चुकी है. राज्य बॉयलर इंस्पेक्टर की प्रारंभिक रिपोर्ट ने पहले ही सुरक्षा के दावों पर सवाल खड़े कर दिए थे, लेकिन अब केंद्रीय टीम विस्तृत और गहन जांच कर रही है. जांच की पहली कड़ी में यह बात साफ तौर पर उभरकर सामने आई है कि प्लांट के संचालन में सुरक्षा मानकों को पूरी तरह से ताक पर रख दिया गया था. मशीनरी की नियमित मेंटेनेंस की अनदेखी, ऑपरेशनल सेफ्टी प्रोटोकॉल का पालन न करना और दबाव के उतार-चढ़ाव (प्रेशर फ्लक्चुएशन) को पूरी तरह से नजरअंदाज करना—ये वे गंभीर खामियां थीं जिन्होंने इस विनाशकारी आपदा की नींव रखी. एक कुशल प्लांट संचालन के लिए जो अनिवार्य सुरक्षा उपाय किए जाने चाहिए थे, वे नदारद थे. यह केवल एक तकनीकी खराबी का मामला नहीं है, बल्कि प्रबंधन की उस गंभीर लापरवाही का परिणाम है जिसने 24 घरों के चिराग बुझा दिए.

घटनास्थल पर मौजूद केंद्रीय टीम का दो सदस्यीय दल प्लांट के अंदरूनी हिस्सों की जांच में जुटा है, जबकि एक और टीम के जल्द ही पहुंचने की खबर है. जांचकर्ताओं का मानना है कि यदि प्रेशर गेज और सुरक्षा वाल्वों की समय रहते जांच की गई होती, तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था. पीड़ितों के परिजनों का दर्द इस कदर गहरा है कि वे मुआवजे से पहले दोषियों को सलाखों के पीछे देखने की मांग कर रहे हैं. प्लांट के बाहर डेरा जमाए परिजनों का कहना है कि वे केवल एक खानापूर्ति वाली जांच नहीं, बल्कि उच्च स्तरीय न्यायिक जांच चाहते हैं ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को इस पीड़ा से न गुजरना पड़े. स्थानीय प्रशासन के लिए भी यह एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, क्योंकि घटना ने न केवल सक्ती जिले की कानून-व्यवस्था को प्रभावित किया है, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के औद्योगिक संस्थानों में सुरक्षा ऑडिट पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.

इस पूरे घटनाक्रम में एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियां उत्पादन बढ़ाने की होड़ में मानव जीवन की कीमत भूल गई हैं? वेदांता पावर प्लांट में हुई इस घटना ने साबित कर दिया है कि मुनाफे के आगे सुरक्षा की अनदेखी कितनी महंगी पड़ सकती है. जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, प्रबंधन की ओर से बरती गई कोताही की परतें खुलती जा रही हैं. एसआईटी और केंद्रीय टीम की संयुक्त रिपोर्ट अब सरकार के पास जाएगी, जिसके बाद आगे की कड़ी कानूनी कार्रवाई की उम्मीद है. फिलहाल सक्ती का वातावरण गमगीन है और हर कोई यही प्रार्थना कर रहा है कि जो 11 लोग अस्पतालों में भर्ती हैं, वे जल्द स्वस्थ होकर अपने घर लौटें. लेकिन सच यह है कि इस धमाके ने न केवल प्लांट को मलबे में तब्दील किया, बल्कि पूरे सिस्टम पर एक ऐसा धब्बा लगा दिया है जिसे धोना आसान नहीं होगा. यह औद्योगिक आपदा आने वाले दशकों तक याद रखी जाएगी और यह हमेशा एक चेतावनी के रूप में काम करेगी कि सुरक्षा के साथ समझौता करने का परिणाम कितना भयानक हो सकता है. सरकार ने भी इस मामले को अपनी प्राथमिकता में रखा है और मुख्यमंत्री कार्यालय लगातार पूरी स्थिति की निगरानी कर रहा है, ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके और भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति न हो.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-