जबलपुर. जेईई मेन 2026 के परिणामों की घोषणा के बाद देश भर के इंजीनियरिंग संस्थानों में प्रवेश की प्रक्रिया को लेकर छात्रों और अभिभावकों के बीच भारी गहमागहमी बनी हुई है। इस बीच, मध्य प्रदेश के प्रतिष्ठित संस्थान भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी, अभिकल्पना एवं विनिर्माण संस्थान (IIITDM) जबलपुर के पिछले वर्ष के कटऑफ रैंक के आंकड़े सोशल मीडिया और शैक्षणिक मंचों पर तेजी से ट्रेंड कर रहे हैं। इंजीनियरिंग की सीटों के लिए होने वाली काउंसिलिंग से पहले छात्र अपनी रैंक की तुलना पिछले साल के ट्रेंड्स से कर रहे हैं, जिससे उन्हें यह अंदाजा मिल सके कि इस बार उन्हें किस ब्रांच में दाखिला मिलने की संभावना है।
आईआईटीडीएम जबलपुर अपनी अनूठी डिजाइन-आधारित इंजीनियरिंग शिक्षा और आधुनिक तकनीकी पाठ्यक्रम के लिए छात्रों की पहली पसंद बना हुआ है। शैक्षणिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले वर्ष के कटऑफ डेटा का महत्व इसलिए बढ़ गया है क्योंकि इस बार जेईई मेन के अंकों और रैंक के पैटर्न में मामूली बदलाव देखने को मिले हैं। वर्ष 2025 के आंकड़ों के अनुसार, कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग (CSE) और इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग (ECE) जैसी शाखाओं के लिए छात्रों में सबसे अधिक प्रतिस्पर्धा देखी गई थी। संस्थान द्वारा जारी किए गए पिछले आंकड़ों के अनुसार, सामान्य वर्ग से लेकर आरक्षित श्रेणियों तक के लिए विभिन्न ब्रांचों में कटऑफ रैंक काफी प्रतिस्पर्धी रही थी।
छात्रों के बीच इन आंकड़ों को लेकर चल रही उत्सुकता का मुख्य कारण प्रवेश के प्रति उनकी स्पष्टता की चाह है। जेईई मेन में मिली अपनी परसेंटाइल और रैंक के आधार पर छात्र यह जानने के लिए आतुर हैं कि क्या वे जबलपुर स्थित इस संस्थान के कैंपस का हिस्सा बन पाएंगे। विशेष रूप से उन छात्रों के लिए यह डेटा महत्वपूर्ण है जो रिमोट सेंसिंग, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग और साइबर-फिजिकल सिस्टम्स जैसे उभरते क्षेत्रों में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। शैक्षणिक जानकारों का कहना है कि कटऑफ रैंक केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि यह संस्थान की शैक्षणिक गुणवत्ता और छात्रों की बढ़ती रुचि को दर्शाने वाला एक महत्वपूर्ण पैमाना है।
संस्थान ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से प्रवेश संबंधी सभी आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं, लेकिन छात्रों का रुझान पिछले साल के ट्रेंड्स को समझने में अधिक है। वर्तमान में जो आंकड़े चर्चा में हैं, वे दर्शाते हैं कि कैसे बीते एक साल में छात्रों की प्राथमिकताएं बदली हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग जैसे कोर्सेज ने कटऑफ को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया है। काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू होने से ठीक पहले, कटऑफ आंकड़ों का विश्लेषण करने से छात्रों को अपने विकल्प चुनने में सहूलियत मिल रही है।
विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि छात्रों को केवल पिछले साल के कटऑफ पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहिए, क्योंकि हर साल परीक्षा की कठिनाई का स्तर और छात्रों की कुल संख्या प्रवेश समीकरण को बदल देती है। आईआईआईटीडीएम जबलपुर के कैंपस प्लेसमेंट और अनुसंधान के अवसरों को देखते हुए, संस्थान में प्रवेश पाने की होड़ काफी अधिक है। अगले कुछ दिनों में जब संयुक्त सीट आवंटन प्राधिकरण (JoSAA) की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, तब यह स्पष्ट हो जाएगा कि इस बार जबलपुर स्थित इस संस्थान के लिए मेरिट का स्तर क्या रहता है। फिलहाल, छात्र और उनके परिजन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पुराने कटऑफ आंकड़ों को साझा कर रहे हैं और विशेषज्ञ अपनी राय दे रहे हैं कि किन रैंकों पर किस विशेष ब्रांच में दाखिले की प्रबल संभावनाएं बनी हुई हैं। यह दौर छात्रों के लिए अपने करियर के चयन की दिशा में बेहद निर्णायक साबित होने वाला है।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

