व्यस्त जिंदगी में भी फिट रहना अब आसान, दिनभर छोटे-छोटे कदमों से सेहत बनाए रखने का नया मंत्र

व्यस्त जिंदगी में भी फिट रहना अब आसान, दिनभर छोटे-छोटे कदमों से सेहत बनाए रखने का नया मंत्र

प्रेषित समय :21:27:52 PM / Wed, Apr 22nd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

आज की तेज रफ्तार जिंदगी में फिटनेस को लेकर सबसे बड़ी शिकायत यही सुनने को मिलती है कि समय नहीं है। दफ्तर की मीटिंग्स, घर की जिम्मेदारियां और लगातार बढ़ते काम के दबाव के बीच लोग अक्सर यह मान बैठते हैं कि जब तक रोज कम से कम एक घंटा जिम या एक्सरसाइज के लिए न मिले, तब तक फिट रहना संभव नहीं है। इसी सोच के कारण बड़ी संख्या में लोग अपनी सेहत को नजरअंदाज कर देते हैं। हालांकि अब फिटनेस विशेषज्ञ इस धारणा को पूरी तरह गलत बताते हुए एक नया और आसान तरीका सामने ला रहे हैं, जिसमें दिनभर की छोटी-छोटी गतिविधियों के जरिए भी फिट और एक्टिव रहा जा सकता है।

फिटनेस एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह जरूरी नहीं है कि हर दिन लंबा वर्कआउट किया जाए। यदि व्यक्ति दिनभर में थोड़ी-थोड़ी देर के लिए भी शरीर को सक्रिय रखता है, तो इसका सकारात्मक असर स्वास्थ्य पर साफ देखा जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि असली बदलाव समय की लंबाई से नहीं बल्कि नियमितता से आता है। यानी यदि कोई व्यक्ति दिन में कई बार छोटे-छोटे मूवमेंट करता है, तो यह शरीर के लिए उतना ही लाभकारी हो सकता है जितना कि एक बार में लंबा वर्कआउट करना।

विशेषज्ञों का मानना है कि सबसे पहले लोगों को अपनी सोच में बदलाव लाने की जरूरत है। जब तक एक्सरसाइज को एक अतिरिक्त काम के रूप में देखा जाएगा, तब तक उसे नियमित रूप से अपनाना मुश्किल रहेगा। इसके बजाय इसे रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाना जरूरी है। जैसे लोग बिना सोचे-समझे रोज ब्रश करते हैं या खाना खाते हैं, वैसे ही शरीर को सक्रिय रखना भी आदत में शामिल होना चाहिए। यही सोच फिटनेस को आसान बना सकती है।

इस दिशा में ‘हैबिट स्टैकिंग’ यानी आदतों को जोड़ने का तरीका काफी कारगर माना जा रहा है। इसके तहत व्यक्ति अपनी रोज की आदतों के साथ छोटे-छोटे व्यायाम जोड़ सकता है। उदाहरण के तौर पर टीवी देखते समय हल्की स्ट्रेचिंग करना, फोन पर बात करते हुए टहलना या सुबह ब्रश करने के बाद कुछ मिनट की वॉक करना। इस तरह बिना अतिरिक्त समय निकाले भी शरीर को सक्रिय रखा जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब ये छोटी आदतें नियमित हो जाती हैं, तो लंबे समय में बड़ा असर देखने को मिलता है।

इसके अलावा ‘माइक्रो वर्कआउट’ का कॉन्सेप्ट भी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इसमें दिनभर के अलग-अलग समय में कुछ मिनट के लिए एक्सरसाइज की जाती है। जैसे हर घंटे में 5 मिनट स्ट्रेचिंग, कमरे में प्रवेश करते ही 10 पुश-अप्स या भोजन के बाद 5 से 10 मिनट की वॉक। यह तरीका उन लोगों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रहा है, जिनके पास लगातार बैठकर काम करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता। विशेषज्ञ बताते हैं कि लंबे समय तक बैठे रहने से शरीर की मेटाबॉलिज्म दर कम हो जाती है, जबकि बीच-बीच में छोटे मूवमेंट इसे सक्रिय बनाए रखते हैं।

फिटनेस के इस नए दृष्टिकोण में ‘नीट’ यानी नॉन-एक्सरसाइज एक्टिविटी थर्मोजेनेसिस की भूमिका भी अहम बताई जा रही है। इसका अर्थ है कि रोजमर्रा की सामान्य गतिविधियों के जरिए शरीर कितनी ऊर्जा खर्च करता है। जैसे चलते-फिरते फोन इस्तेमाल करना, घर के कामों को थोड़ी तेजी से करना या लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करना। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इन गतिविधियों को थोड़ा बढ़ा दिया जाए, तो यह कैलोरी बर्न करने में काफी मददगार साबित हो सकता है। कई मामलों में यह एक बार के वर्कआउट से भी ज्यादा प्रभावी हो सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह भी सलाह दे रहे हैं कि लोगों को अपने लिए एक न्यूनतम लक्ष्य तय करना चाहिए। यह लक्ष्य कदमों की संख्या, समय या किसी खास गतिविधि पर आधारित हो सकता है। जैसे रोज 6 से 8 हजार कदम चलना या दिनभर में कुल मिलाकर 20 मिनट सक्रिय रहना। इससे व्यक्ति पर दबाव नहीं बनता और वह नियमित रूप से अपने लक्ष्य को पूरा कर पाता है। धीरे-धीरे यही छोटी उपलब्धियां बड़ी आदतों में बदल जाती हैं।

इसके साथ ही एक सरल और तयशुदा रूटीन तैयार करना भी जरूरी माना जा रहा है। जैसे ऑफिस के दौरान डेस्क पर बैठकर किए जा सकने वाले स्ट्रेच, मीटिंग्स के बीच छोटे वर्कआउट या रात में सोने से पहले हल्की एक्सरसाइज। जब व्यक्ति के पास पहले से तय विकल्प होते हैं, तो उसे सोचने में समय नहीं लगता और वह आसानी से उन्हें अपनी दिनचर्या में शामिल कर लेता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि आज के समय में फिटनेस को जटिल बनाने के बजाय उसे सरल बनाना अधिक जरूरी है। व्यस्त जीवनशैली में बड़े बदलाव लाना मुश्किल हो सकता है, लेकिन छोटे-छोटे कदम उठाकर भी बेहतर स्वास्थ्य पाया जा सकता है। सबसे अहम बात यह है कि व्यक्ति निरंतरता बनाए रखे और हर दिन कुछ न कुछ शारीरिक गतिविधि जरूर करे।

इस बदलते दृष्टिकोण ने यह स्पष्ट कर दिया है कि फिट रहने के लिए घंटों पसीना बहाना जरूरी नहीं है। यदि व्यक्ति अपनी दिनचर्या में थोड़ी जागरूकता और छोटे-छोटे बदलाव शामिल कर ले, तो वह बिना अतिरिक्त समय निकाले भी स्वस्थ और सक्रिय जीवन जी सकता है। ऐसे में अब यह बहाना कि “समय नहीं है” धीरे-धीरे अपनी प्रासंगिकता खोता नजर आ रहा है और फिटनेस हर किसी के लिए पहले से कहीं ज्यादा आसान होती जा रही है।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-