भोपाल. पुलिस कमिश्नरेट में सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने और अपराधों पर प्रभावी लगाम कसने के उद्देश्य से पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए 'टू आईसी' (2nd-in-Command) मॉडल लागू कर दिया है. इस नए प्रयोग के तहत अब राजधानी के एक ही थाने में दो निरीक्षकों (TI) की तैनाती की जाएगी, जिससे पुलिसिंग की कार्यक्षमता में आमूलचूल परिवर्तन आने की उम्मीद है.
भोपाल पुलिस कमिश्नर कार्यालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान इस निर्णय पर मुहर लगाई गई, जिसका मुख्य उद्देश्य पुलिस बल पर बढ़ते काम के बोझ को कम करना और जनता को त्वरित न्याय दिलाना है. इस मॉडल के प्रथम चरण में निशातपुरा और हबीबगंज जैसे संवेदनशील और व्यस्त थानों को शामिल किया गया है, जबकि दूसरे चरण में कोहेफिजा और पिपलानी थानों में यह व्यवस्था प्रभावी होगी. आने वाले समय में इसका विस्तार राजधानी के अन्य सभी थानों में करने की योजना है. इस नई व्यवस्था की कार्यप्रणाली को समझाते हुए पुलिस अधिकारियों ने बताया कि थाने में तैनात दो निरीक्षकों में से एक 'थाना प्रभारी' (SHO) की मुख्य भूमिका में होगा.
जबकि दूसरा निरीक्षक उनके सहायक के रूप में काम करेगा. अक्सर देखा जाता है कि एक ही थाना प्रभारी पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने, वीआईपी मूवमेंट संभालने और अपराधों की जांच करने का चौतरफा दबाव होता है, जिससे अनुसंधान की गुणवत्ता प्रभावित होती है. टू आईसी मॉडल इस समस्या का सटीक समाधान पेश करता है क्योंकि इसमें कार्यों का स्पष्ट विभाजन होगा. एक निरीक्षक पूरी तरह से कानून-व्यवस्था और फील्ड मॉनिटरिंग पर ध्यान केंद्रित करेंगे, जबकि दूसरे निरीक्षक का पूरा फोकस पेंडिंग मामलों के निपटारे, केस डायरी तैयार करने और अनुसंधान की गुणवत्ता सुधारने पर होगा.
पुलिस कमिश्नर संजय कुमार का मानना है कि इस व्यवस्था से गंभीर अपराधों की जांच में तेजी आएगी और थानों में वर्षों से लंबित पड़े मामलों की फाइलों पर जमी धूल साफ हो सकेगी. राजधानी भोपाल की तेजी से बढ़ती आबादी और अपराधों के बदलते आधुनिक स्वरूप को देखते हुए स्मार्ट पुलिसिंग की दिशा में यह एक अनिवार्य कदम माना जा रहा है. दो अनुभवी निरीक्षकों की मौजूदगी से न केवल रात्रि गश्त और माइक्रो बीट सिस्टम को मजबूती मिलेगी, बल्कि पुलिस और जनता के बीच सीधा संवाद भी बेहतर हो सकेगा. अक्सर नागरिक थानों में अपनी शिकायतों के समाधान के लिए घंटों इंतजार करते हैं क्योंकि थाना प्रभारी अन्य प्रशासनिक कार्यों में व्यस्त होते हैं, लेकिन अब दूसरे निरीक्षक की उपलब्धता से शिकायतों की सीधी मॉनिटरिंग हो सकेगी और फरियादियों को तुरंत राहत मिल पाएगी.
यह मॉडल पुलिसिंग में जवाबदेही और पारदर्शिता को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्टाफ की कार्यक्षमता को भी कई गुना बढ़ा देगा. कमिश्नर प्रणाली के तहत लिए गए इस फैसले का एक बड़ा लाभ यह भी होगा कि पुलिस अब अपराधियों और हिस्ट्रीशीटरों पर अधिक पैनी नजर रख पाएगी. कानून विशेषज्ञों का कहना है कि शहरी पुलिसिंग में कार्य विभाजन (Division of Labor) एक सफल मॉडल साबित होता रहा है और भोपाल में इसकी शुरुआत पुलिस प्रशासन को आधुनिक बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी. यदि इन चुनिंदा थानों में यह प्रयोग सफल रहता है, तो इसे पूरे भोपाल जिले में अनिवार्य रूप से लागू कर दिया जाएगा. फिलहाल इस स्मार्ट पुलिसिंग मॉडल ने राजधानी में अपराधियों के बीच खौफ और आम जनता के बीच सुरक्षा का नया भरोसा जगा दिया है. पुलिस मुख्यालय अब इस मॉडल के परिणामों पर बारीकी से नजर रख रहा है ताकि इसके आधार पर भविष्य की सुरक्षा रणनीतियां तैयार की जा सकें.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

