होर्मुज में बढ़ते खतरे पर भारत की कड़ी चेतावनी संयुक्त राष्ट्र में जहाजों की सुरक्षा और वैश्विक कार्रवाई की मांग तेज

होर्मुज में बढ़ते खतरे पर भारत की कड़ी चेतावनी संयुक्त राष्ट्र में जहाजों की सुरक्षा और वैश्विक कार्रवाई की मांग तेज

प्रेषित समय :21:45:16 PM / Tue, Apr 28th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने पश्चिम एशिया के संवेदनशील समुद्री क्षेत्र होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते खतरों को लेकर गंभीर चिंता जताई है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तुरंत समन्वित कार्रवाई की अपील की है. वैश्विक व्यापार के सबसे अहम समुद्री मार्गों में शामिल इस क्षेत्र में हाल के समय में व्यापारिक जहाज़ों पर बढ़ते हमलों और सुरक्षा जोखिमों को लेकर भारत ने साफ कहा कि यह स्थिति न केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बल्कि नाविकों की जान के लिए भी सीधा खतरा बनती जा रही है.

सोमवार को हुई खुली बहस में संयुक्त राष्ट्र में भारत की चार्ज डी'अफेयर्स योजना पटेल ने देश का पक्ष रखते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाज़ों की स्वतंत्र और सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है. उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी तरह की बाधा या असुरक्षा वैश्विक सप्लाई चेन, ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक संतुलन को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है. भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह एक स्वतंत्र, खुली और नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था का समर्थक है, जो संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि के सिद्धांतों पर आधारित हो.

भारत ने हाल के महीनों में इस क्षेत्र में व्यापारिक जहाज़ों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं की कड़ी निंदा की. राजदूत पटेल ने कहा कि ऐसी घटनाएं पूरी तरह अस्वीकार्य हैं और इससे निर्दोष नाविकों की जान खतरे में पड़ रही है. उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर चिंता जताई कि इन हमलों में भारतीय नाविक भी प्रभावित हुए हैं और कुछ मामलों में उनकी जान भी गई है. उन्होंने इसे बेहद दुखद बताते हुए कहा कि समुद्री सुरक्षा को लेकर अब और अधिक देरी बर्दाश्त नहीं की जा सकती.

भारत ने वैश्विक स्तर पर सामूहिक प्रयासों की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और मजबूत करना होगा. भारत के अनुसार, यह केवल क्षेत्रीय समस्या नहीं है बल्कि इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ता है. होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाला समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा संभालता है, ऐसे में यहां किसी भी तरह का व्यवधान व्यापक आर्थिक संकट को जन्म दे सकता है.

अपनी बात रखते हुए भारत ने कुछ महत्वपूर्ण सुझाव भी पेश किए. इनमें समुद्री नेविगेशन की सुरक्षा को मजबूत करना, मानवीय सप्लाई चेन को निर्बाध बनाए रखना, समुद्री गतिविधियों को लेकर जागरूकता बढ़ाना और नाविकों के लिए संचार तंत्र को बेहतर बनाना शामिल है. भारत ने कहा कि इन कदमों के जरिए न केवल मौजूदा संकट को कम किया जा सकता है बल्कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने में भी मदद मिलेगी.

भारत ने अपने प्रयासों का उल्लेख करते हुए बताया कि शिपिंग महानिदेशालय द्वारा सभी देशों के नाविकों के लिए 24 घंटे चलने वाली हेल्पलाइन शुरू की गई है. इस हेल्पलाइन पर अब तक हजारों कॉल और ईमेल प्राप्त हो चुके हैं, जो इस मुद्दे की गंभीरता और वैश्विक चिंता को दर्शाते हैं. भारत ने इसे एक महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि इससे संकट में फंसे नाविकों को तत्काल सहायता मिल सकती है और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है.

इसके साथ ही भारत ने सूचना विलय केंद्र-हिंद महासागर क्षेत्र के साथ सहयोग बढ़ाने की भी अपील की. भारत का मानना है कि इस तरह के संस्थागत तंत्र समुद्री सुरक्षा में अहम भूमिका निभा सकते हैं. बेहतर सूचना साझाकरण और निगरानी से न केवल जहाज़ों की सुरक्षा बढ़ेगी बल्कि किसी भी संभावित खतरे का समय रहते पता लगाया जा सकेगा. भारत ने यह भी कहा कि इस तरह के सहयोग से मानवीय सहायता और आपातकालीन प्रतिक्रिया को भी अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है.

भारत ने पर्यावरणीय खतरों को लेकर भी चिंता व्यक्त की. समुद्री जहाज़ों पर हमलों के कारण तेल रिसाव और अन्य प्रदूषण की घटनाएं हो सकती हैं, जिससे समुद्री पारिस्थितिकी को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है. भारत ने इस संदर्भ में वैश्विक निगरानी और समन्वय तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया ताकि ऐसे जोखिमों को कम किया जा सके.

एक प्रमुख समुद्री राष्ट्र के रूप में भारत ने अपनी जिम्मेदारी को भी रेखांकित किया. भारत दुनिया के सबसे बड़े नाविक आपूर्ति करने वाले देशों में शामिल है और वैश्विक नाविक कार्यबल का लगभग 13 प्रतिशत भारतीय हैं. ऐसे में समुद्री मार्गों में किसी भी तरह की असुरक्षा सीधे तौर पर भारतीय नागरिकों और उनके परिवारों को प्रभावित करती है. भारत ने कहा कि वह अपने नाविकों की सुरक्षा और कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है और इस दिशा में हर संभव कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है.

भारत ने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन के तहत सहयोग को और मजबूत करने की अपील करते हुए कहा कि मौजूदा हालात में वैश्विक एकजुटता बेहद जरूरी है. भारत ने सदस्य देशों से उसकी सिफारिशों पर गंभीरता से विचार करने और सामूहिक रूप से समाधान की दिशा में आगे बढ़ने का आग्रह किया.

अपने संबोधन के अंत में भारत ने स्पष्ट किया कि समुद्री सुरक्षा केवल एक क्षेत्रीय या आर्थिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह वैश्विक शांति और स्थिरता से जुड़ा हुआ विषय है. होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में किसी भी तरह की बाधा पूरी दुनिया के लिए चिंता का कारण बन सकती है. भारत ने दोहराया कि सुरक्षित, स्वतंत्र और स्थिर समुद्री मार्ग सुनिश्चित करना आज की सबसे बड़ी वैश्विक प्राथमिकताओं में से एक होना चाहिए.

भारत का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है और समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो इसका असर वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर गहराई से पड़ सकता है. ऐसे में भारत की यह पहल न केवल अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि वैश्विक स्तर पर स्थिरता बनाए रखने की दिशा में भी एक अहम कदम मानी जा रही है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-