मध्य पूर्व में एक बार फिर हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं, जहां होर्मुज जलमार्ग में बढ़ते तनाव ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है. रविवार तड़के उस समय स्थिति और गंभीर हो गई, जब ईरान की ओर से गुजर रहे जहाजों पर फायरिंग की घटनाएं सामने आईं. इस घटनाक्रम के बाद दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक होर्मुज स्ट्रेट पर जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है. इससे न केवल अंतरराष्ट्रीय तेल और गैस आपूर्ति पर खतरा मंडराने लगा है, बल्कि वैश्विक शेयर बाजारों में भी अस्थिरता बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.
ईरान की सरकारी मीडिया और Mehr न्यूज एजेंसी के मुताबिक, फिलहाल कई जहाज ईरानी सेना के निर्देश का इंतजार कर रहे हैं. उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी गई है, जिससे इस रणनीतिक जलमार्ग में जाम जैसे हालात बन गए हैं. ईरान की इस सख्त कार्रवाई ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के साथ तनाव को और बढ़ा दिया है. ईरान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उसके खिलाफ दबाव की नीति जारी रहती है, तो वह होर्मुज जलमार्ग को पूरी तरह बंद करने का कदम भी उठा सकता है.
इस बीच इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी की नौसेना ने जहाजों को फारस की खाड़ी और ओमान सागर में अपनी स्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं. यह भी कहा गया है कि यदि कोई जहाज होर्मुज की ओर बढ़ने की कोशिश करता है, तो उसे दुश्मन के साथ सहयोग माना जाएगा और उस पर कार्रवाई की जाएगी. ब्रिटेन की नौसेना ने भी पुष्टि की है कि एक तेल टैंकर के पास ईरानी गनबोट्स पहुंचीं और उस पर फायरिंग की गई, हालांकि इसमें किसी तरह की जनहानि नहीं हुई और जहाज सुरक्षित बताया गया है. वहीं ओमान के तट के पास एक कंटेनर शिप पर भी अज्ञात हथियार से हमला होने की खबर है, जिसने स्थिति को और अधिक संवेदनशील बना दिया है.
होर्मुज जलमार्ग की अहमियत को देखते हुए इस घटनाक्रम के दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं. यह जलमार्ग दुनिया के कुल तेल और एलएनजी सप्लाई का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा वहन करता है. ऐसे में यहां किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ता है. यदि यह संकट लंबा खिंचता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है, जिसका असर आम उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा.
तनाव की जड़ में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता टकराव बताया जा रहा है. अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी और उससे जुड़े सख्त कदमों के जवाब में ईरान ने आक्रामक रुख अपनाया है. ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने साफ कहा है कि जब ईरान खुद इस जलमार्ग का उपयोग नहीं कर सकता, तो अन्य देशों को भी इसकी अनुमति नहीं दी जाएगी. इस बयान ने संकेत दे दिया है कि आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं.
वहीं अमेरिकी पक्ष भी सख्त नजर आ रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में ईरान से जुड़े तेल टैंकरों को जब्त करने की तैयारी कर रहा है. हालांकि व्हाइट हाउस ने इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह जरूर कहा है कि अमेरिका स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए है और जरूरत पड़ने पर कड़े कदम उठाए जाएंगे. उन्होंने यह भी बताया कि दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है और कुछ मुद्दों पर सहमति बनने के संकेत भी मिले हैं, लेकिन मतभेद अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं.
ईरान के विदेश मंत्रालय ने भी अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा है कि समृद्ध यूरेनियम देश के लिए बेहद अहम है और इसे किसी भी कीमत पर छोड़ा नहीं जाएगा. इस बयान से साफ है कि परमाणु मुद्दे पर दोनों देशों के बीच खींचतान जारी है, जो इस पूरे संकट को और जटिल बना रही है.
इस पूरे घटनाक्रम का असर सिर्फ खाड़ी क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर वैश्विक वित्तीय बाजारों पर भी पड़ सकता है. हाल ही में तेल की कीमतों में गिरावट देखी गई थी और बाजारों में कुछ स्थिरता लौटती नजर आ रही थी, लेकिन होर्मुज में ताजा तनाव ने इस सकारात्मक माहौल को पलटने के संकेत दे दिए हैं. यदि स्थिति नहीं सुधरती है, तो आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और शेयर बाजारों में गिरावट देखने को मिल सकती है.
इसी बीच लेबनान में भी हालात बिगड़ते दिख रहे हैं, जहां इजरायल और स्थानीय समूहों के बीच संघर्ष जारी है. इजरायली सेना ने दावा किया है कि उसने अपने सैनिकों के पास आने वाले संदिग्ध लोगों पर कार्रवाई की है, जिसे सीजफायर का उल्लंघन बताया गया है. इस संघर्ष में अब तक हजारों लोग प्रभावित हो चुके हैं और बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों पर हमले में एक फ्रांसीसी सैनिक की मौत की पुष्टि की है और इसके लिए हिजबुल्लाह को जिम्मेदार ठहराया है.
पर्दे के पीछे कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, एक प्रस्ताव पर चर्चा हो रही है, जिसमें अमेरिका ईरान के करीब 20 अरब डॉलर के फंड जारी कर सकता है, बदले में ईरान अपने समृद्ध यूरेनियम के भंडार को छोड़ देगा. हालांकि इस प्रस्ताव को लेकर दोनों देशों के भीतर मतभेद हैं और इसे लेकर अभी कोई ठोस सहमति नहीं बन पाई है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इस प्रस्ताव को खारिज करने के संकेत दिए हैं, जबकि ईरान के नेताओं का कहना है कि वे अपने अधिकारों से पीछे नहीं हटेंगे.
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कोई समझौता होता भी है, तो वह सीमित और अस्थायी हो सकता है. Bloomberg Economics के विश्लेषकों के अनुसार, मौजूदा हालात में स्थायी शांति की संभावना कम है और तनाव समय-समय पर उभरता रहेगा. ऐसे में होर्मुज जलमार्ग की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है, क्योंकि यहां की हलचल सीधे तौर पर वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

