हाईकोर्ट ने नर्मदा आंदोलन की याचिका पर दिया अल्टीमेटम, कहा, एक सप्ताह में पेश करें जबाव, नहीं तो एसीएस होंगे पेश

हाईकोर्ट ने नर्मदा आंदोलन की याचिका पर दिया अल्टीमेटम, कहा, एक सप्ताह में पेश करें जबाव, नहीं तो एसीएस होंगे पेश

प्रेषित समय :20:29:11 PM / Wed, Apr 29th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. नर्मदा बचाओ आंदोलन की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए एमपी हाईकोर्ट जबलपुर ने सख्ती अपनाई हैं. कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा को निर्देश दिया है कि वे आंदोलन के ज्ञापन पर एक सप्ताह के भीतर जवाब दें, अन्यथा उन्हें स्वयं न्यायालय में उपस्थित होना पड़ेगा. मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह तय की गई है.

ओंकारेश्वर बांध से प्रभावित किसानों के वयस्क पुत्रों को मुआवजा और पुनर्वास लाभ देने को लेकर यह विवाद लंबे समय से जारी है. आंदोलन के अनुसार, राज्य सरकार ने 7 जून 2013 को विशेष पैकेज घोषित किया था, जिसमें भूमिहीन परिवारों और उनके वयस्क पुत्रों को 2.5 लाख रुपए देने का प्रावधान था. बाद में 31 जुलाई 2019 के आदेश से इस राशि पर 15त्न वार्षिक ब्याज भी जोड़ा गया. आरोप है कि सरकार ने उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तुत रुख के बावजूद वयस्क पुत्रों को ये लाभ अब तक नहीं दिए हैं. इसी मुद्दे को लेकर जनहित याचिका दायर की गई थी.

पहले भी दे चुका है कोर्ट आदेश-

हाईकोर्ट ने 10 जुलाई 2023 को राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह वयस्क पुत्रों के अधिकारों पर जल्द निर्णय ले. इसके बाद 29 नवंबर 2024 के आदेश में अदालत ने अपर मुख्य सचिव व नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को 10 फरवरी 2022 के ज्ञापन पर दो माह में निर्णय लेने को कहा था. साथ ही यह भी निर्देश दिया गया था कि निर्णय से पहले याचिकाकर्ता को सुना जाए और विस्तृत आदेश जारी कर सूचित किया जाए.

आदेश का पालन नहीं, पहुंची अवमानना याचिका-

नर्मदा बचाओ आंदोलन के कार्यकर्ता आलोक अग्रवाल का कहना है कि बार-बार प्रयासों के बावजूद कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया. इसके बाद अवमानना याचिका दायर की गई. सुनवाई के दौरान नर्मदा बचाओ आंदोलन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज शर्मा ने कोर्ट को बताया कि 8 सितंबर 2025 को सुनवाई तो हुई, लेकिन सात महीने बाद भी कोई आदेश जारी नहीं किया गया, जो न्यायालय की अवमानना है. वहीं, राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अर्पण पवार ने बताया कि ज्ञापन पर जवाब तैयार है और एक सप्ताह में याचिकाकर्ता को सौंप दिया जाएगा.

कोर्ट ने अब सख्त चेतावनी दी-

इस पर अदालत ने अंतिम अवसर देते हुए स्पष्ट कहा कि यदि तय समय में जवाब नहीं दिया गया, तो अपर मुख्य सचिव को स्वयं कोर्ट में उपस्थित होकर जवाब देना होगा. बता दें कि, यह मामला वयस्क पुत्रों को मुआवजा और विशेष पैकेज देने, पुनर्वास स्थलों के प्लॉट की रजिस्ट्री व नई डूब क्षेत्र का अधिग्रहण संबंधी लंबित हैं.
 

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-