जबलपुर. ग्वारीघाट रोड स्थित बादशाह हलवाई मंदिर जो कि सैकड़ों साल पुराना है. इस मंदिर की बेशकीमती जमीन पर अब बिल्डरों की नजर पड़ गई है. मंदिर के पुजारी सहित आसपास रहने वाले लोगों ने आरोप लगाया कि स्थानीय अधिकारियों से मिलकर बिल्डरों ने पहले तो नक्शा में हेरफेर किया, उसके बाद रजिस्ट्री करवाई और फिर प्लाटिंग करना शुरू कर दिया.
मंदिर के पास रहने वालों का यह भी आरोप है कि जिस पानी की टंकी से स्थानीय लोगों को पानी दिया जाता है, उससे बिल्डरों को घर बनाया जा रहा है. इधर इस मामले को लेकर एसडीएम का कहना है कि मंदिर से संबधित शिकायत पहले भी मिल चुकी है, जिसका केस सिविल कोर्ट में चल रहा है. गौरतलब है कि शहर का बादशाह हलवाई मंदिर कई साल पुराना है, जो कि वर्तमान में पुरात्तव विभाग के अधीन है. मंदिर में रहने वाले पंडित आनंद दुबे ने आरोप लगाए कि एक समय बादशाह हलवाई मंदिर की साढ़े तीन एकड़ से अधिक जमीन थी, जो कि आज सिर्फ डेढ़ एकड़ रह गई है. 2022 से 2026 तक चार से पांच नक्शे बन चुके है. जैसै-जैसे नक्शे बदल रहे है,
वैसै-वैसे मंदिर की जमीन खिसक रही है. पंडित आनंद दुबे ने बताया कि तेरहवीं शताब्दी का ये गौडकालीन मंदिर है, जिसमें कि भगवान भोलेनाथ, श्रीराम जी स्थापित है. कुछ साल पहले यहां रहने वाले स्थानीय लोगों ने ट्रस्ट बनाया. आरोप है कि ट्रस्ट के लोग बिल्डरों से मिलकर मंदिर की जमीन को बेचने लगे. गोरखपुर एसडीएम अनुराग सिंह का इस मामले में कहना है कि बादशाह हलवाई मंदिर की जमीन पर अतिक्रमण हो रहा है, इसकी शिकायत अभी तक नहीं मिली है. इससे पहले ट्रस्ट के सदस्यों के द्वारा जमीन पर कब्जा करवाए जाने की शिकायत इससे पहले मिली थी, जिसकी जांच कर फाइल सिविल कोर्ट भेज दी गई है. एसडीएम का कहना है कि अगर कोई शिकायत मिलती है कि मंदिर की जमीन पर कब्जा हो रहा है, तो मौके पर जाकर निश्चित रुप से कार्रवाई की जाएगी.
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