हाईकोर्ट ने पूछा, किसके निर्देश पर सील की गई दुकान, आबकारी आयुक्त-एसपी से मांगा जवाब, एफिडेविट दाखिल करने के निर्देश

हाईकोर्ट ने पूछा, किसके निर्देश पर सील की गई दुकान, आबकारी आयुक्त-एसपी से मांगा जवाब, एफिडेविट दाखिल करने के निर्देश

प्रेषित समय :15:27:58 PM / Thu, May 7th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. एमपी हाईकोर्ट ने जबलपुर सहायक आबकारी आयुक्त और एसपी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए पूछा है कि किस कानून के तहत एक दुकान को सील किया है. हाईकोर्ट ने दोनों ही अधिकारियों को हलफनामान पर जवाब पेश करने के निर्देश दिए है.

सुनवाई को दौरान कोर्ट ने यह भी कहा हा कि जिस दुकान को सील किया गया था, उसे तत्काल खोला जाए. हाईकोर्ट के आदेश पर बुधवार की शाम को आबकारी विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे यह कहकर वापस आ गए कि दुकान की चाबी कहां है, इसकी जानकारी नहीं है. मामले पर अगली सुनवाई 11 मई को होगी. जबलपुर निवासी विवेक त्रिपाठी ने हाईकोर्ट मे याचिका दायर करते हुए बताया कि उनकी स्नेह नगर के पास एक दुकान है. 31 मार्च 2026 की रात को आबकारी विभाग की टीम स्थानीय पुलिस के साथ आई, और बिना किसी सूचना और तत्थ के एक तरफा कार्रवाई करते हुए सील कर दिया.

दुकान के मालिक विवेक त्रिपाठी ने उनसे पूछा,तो आबकारी उप-निरीक्षक रवि शंकर मरावी, जो अदालत में उपस्थित हुए उन्होंने बताया कि, यह सीलिंग की कार्रवाई आबकारी सहायक आयुक्त संजीव कुमार दुबे के मौखिक आदेशों के तहत की गई थी. कोर्ट ने एफिडेविट दाखिल यह स्पष्ट किया जाए कि ऐसी कार्रवाई किस कानूनी प्रावधान के तहत आदेशित किया गया है, यह बताया जाए. मामले पर जस्टिस दीपक खोत की कोर्ट में जब सुनवाई हुई तो याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने बताया कि दुकान को स्थानीय पुलिस की मदद से आबकारी अधिकारियों के द्वारा सील कर दिया गया है.

याचिकाकर्ता का कहना था कि आबकारी अधिकारी और पुलिस ने बिना किसी अधिकार या शो-कॉज नोटिस के, रात में 31.3.2026 को उनकी दुकान को सील कर दिया. बात को प्रमाणित करने के लिए, याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट के समक्ष पेन ड्राइव में सीसीटीवी वीडियो फुटेज भी दिए. याचिकाकर्ता की दलील पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के वकील से पूछा कि अधिकारियों के द्वारा सीलिंग की कार्रवाई किस कानूनी प्रावधान के तहत की गई थी, तो राज्य के वकील ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि आबकारी अधिनियम के अंतर्गत परिसर को सील करने का कोई प्रावधान नहीं है. यह कहा गया कि आबकारी अधिकारियों को सूचना मिली थी कि दुकान एक शराब लाइसेंसी को उनकी दुकान खोलने के लिए दी जा रही है. इसलिए, शिकायतों और कानून-व्यवस्था भंग होने की आशंका के कारण दुकान को सील कर दिया गया.

राज्य सरकार की और से यह भी स्वीकार किया गया है, कि सीलिंग संबंधी किसी कानूनी प्रावधान को प्रस्तुत नहीं किया जा सका, इसलिए प्रतिवादियों को निर्देश दिया जाता है कि यदि दुकान अभी तक अनसील (खोली) नहीं गई है तो उसे तुरंत अनसील कर दिया जाए. अनसीलिंग याचिकाकर्ता की उपस्थिति में की जाए. पंचनामा तैयार किया जाए और अनुपालन दिखाने के लिए उसी के साथ एक एफिडेविट इस अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाए. हाईकोर्ट के आदेश पर बीती  शाम को आबकारी विभाग के अधिकारी दुकान को खोलने के लिए पुहंचे तो जरूर पर तीन घंटे तक इसलिए खड़े रहे कि, उनके पास चाबी नहीं थी, जिस पर दुकान मालिक और याचिकाकर्ता ने अपत्ति जाहिर की.

याचिकाकर्ता ने आबकारी और प्रशासनिक अधिकारियों से इस विषय में चर्चा की, पर जब कहीं सुनवाई नहीं हुई तो हाईकोर्ट की शरण में गए, जहां पर कोर्ट ने कहा कि तत्काल दुकान को खोला जाए. विवके त्रिपाठी ने कहा कि डेढ़ माह से दुकान बंद पड़ी है, अंदर लाइट जल रही है, लाखों रुपए के सामान का नुकसान भी हुआ है, जिसके लिए अलग से कोर्ट में याचिका दायर की जाएगी.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-