न्यायिक कर्मचारियों के वेतनमान मामले में हाई कोर्ट सख्त मुख्य सचिव अनुराग जैन को किया तलब

न्यायिक कर्मचारियों के वेतनमान मामले में हाई कोर्ट सख्त मुख्य सचिव अनुराग जैन को किया तलब

प्रेषित समय :22:07:02 PM / Fri, May 8th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने न्यायिक कर्मचारियों के वेतनमान से जुड़े एक पुराने मामले में राज्य सरकार के ढुलमुल रवैये पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। हाई कोर्ट की एकलपीठ के न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा ने अदालती आदेशों की निरंतर अनदेखी और देरी पर सख्त नाराजगी जाहिर करते हुए मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन को आगामी 14 मई को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का फरमान सुनाया है। यह मामला हाई कोर्ट के ही 100 से अधिक कर्मचारियों के वित्तीय अधिकारों और उनके हक के वेतनमान से जुड़ा है, जो पिछले करीब एक दशक से सरकारी फाइलों और अदालती कार्यवाहियों के बीच अटका हुआ है।

इस कानूनी विवाद की शुरुआत साल 2016 में हुई थी, जब हाई कोर्ट कर्मचारी किशन पिल्लई सहित कुल 109 कर्मचारियों ने एक याचिका दायर कर उन्हें देय उच्च वेतनमान का लाभ न दिए जाने के सरकारी फैसले को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि वे नियमानुसार उच्च वेतनमान के हकदार हैं, लेकिन सरकार की ओर से इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने 28 अप्रैल 2017 को एक स्पष्ट आदेश पारित किया था, जिसमें कहा गया था कि चूंकि यह विषय जून 2015 से सरकार के पास विचाराधीन है, अतः चार सप्ताह के भीतर इसका अंतिम निपटारा कर कर्मचारियों को राहत दी जाए।

अदालत के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद जब शासन स्तर पर कोई निर्णायक कार्रवाई नहीं हुई, तो वर्ष 2018 में कर्मचारियों ने अवमानना याचिका (Contempt Petition) दायर की। पिछले कई वर्षों से चल रही इस अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि सरकार बार-बार समय मांग रही है लेकिन आदेश का क्रियान्वयन नहीं हो रहा है। गत 26 मार्च को हुई सुनवाई में कोर्ट का धैर्य जवाब दे गया और मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया गया था। हालांकि, पिछली तारीख पर सरकार की ओर से बताया गया कि मुख्य सचिव किन्हीं कारणों से उपस्थित नहीं हो सके हैं, लेकिन वे अगली सुनवाई पर निश्चित रूप से हाजिर होंगे।

अब इस मामले की अगली सुनवाई 14 मई 2026 को निर्धारित की गई है, जहाँ मुख्य सचिव को स्वयं उपस्थित होकर यह स्पष्ट करना होगा कि आखिर क्यों 2017 के अदालती आदेश का पालन अब तक नहीं किया जा सका है। हाई कोर्ट की इस सख्ती ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है, क्योंकि यह सीधे तौर पर न्यायपालिका के अपने कर्मचारियों के हितों और अदालती आदेश की अवमानना से जुड़ा विषय है। न्यायिक कर्मचारियों को उम्मीद है कि 14 मई को होने वाली इस सुनवाई से उनके वेतनमान का रास्ता साफ होगा और उन्हें लंबे समय से लंबित अपना आर्थिक हक मिल सकेगा। अब सबकी नजरें हाई कोर्ट की अगली कार्यवाही पर टिकी हैं कि क्या सरकार इस बार कोई ठोस समाधान पेश कर पाती है या फिर मुख्य सचिव को अदालत की और तीखी फटकार का सामना करना पड़ता है।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-