लॉरेंस बिश्नोई पर बनी डॉक्यूसीरीज़ को हाईकोर्ट की राहत, नाम बदलने की शर्त पर रिलीज का रास्ता साफ

लॉरेंस बिश्नोई पर बनी डॉक्यूसीरीज़ को हाईकोर्ट की राहत, नाम बदलने की शर्त पर रिलीज का रास्ता साफ

प्रेषित समय :22:01:46 PM / Tue, May 12th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

चंडीगढ़। गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के जीवन और अपराध जगत पर आधारित विवादित डॉक्यूसीरीज़ को लेकर लंबे समय से चल रहा कानूनी विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने सोमवार को सुनवाई के दौरान ओटीटी मंच ZEE5 को बड़ी राहत देते हुए कहा कि यदि श्रृंखला के शीर्षक से “लॉरेंस” और “पंजाब” शब्द हटा दिए जाएं तो इसके प्रदर्शन का रास्ता साफ हो सकता है। अदालत ने केंद्र सरकार की उस सलाह को भी निरस्त कर दिया जिसमें कानून-व्यवस्था की आशंका का हवाला देते हुए श्रृंखला के प्रदर्शन पर आपत्ति जताई गई थी।

यह डॉक्यूसीरीज़ पहले “लॉरेंस ऑफ पंजाब” नाम से जारी होने वाली थी। इसका प्रदर्शन अप्रैल के अंतिम सप्ताह में प्रस्तावित था, लेकिन रिलीज से ठीक पहले यह विवादों में घिर गई। पंजाब सरकार और कई राजनीतिक नेताओं ने आरोप लगाया कि यह श्रृंखला संगठित अपराध और गैंगस्टर संस्कृति को महिमामंडित कर सकती है, जिसका नकारात्मक प्रभाव युवाओं पर पड़ सकता है। इसी के बाद केंद्र सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने भी इसके प्रदर्शन पर रोक संबंधी सलाह जारी कर दी थी।

सोमवार को हुई सुनवाई में उच्च न्यायालय ने स्वयं इस डॉक्यूसीरीज़ को देखा और कहा कि पहली नजर में इसमें किसी व्यक्ति का महिमामंडन होता नहीं दिखाई देता। अदालत ने अपने अवलोकन में कहा कि यह श्रृंखला सीधे तौर पर अपराध को बढ़ावा देने वाली प्रतीत नहीं होती। हालांकि अदालत ने यह भी माना कि शीर्षक में प्रयुक्त शब्दों को लेकर संवेदनशीलता और विवाद की स्थिति बनी हुई है। इसी कारण अदालत ने निर्माताओं को निर्देश दिया कि शीर्षक से “लॉरेंस” और “पंजाब” जैसे शब्द हटा दिए जाएं।

मामले में ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अमित झांजी ने अदालत को भरोसा दिलाया कि डॉक्यूसीरीज़ के शीर्षक में अब न तो “लॉरेंस बिश्नोई” और न ही “पंजाब” शब्द का उपयोग किया जाएगा। इसके बाद अदालत ने केंद्र सरकार की सलाह को निरस्त करते हुए प्रदर्शन का रास्ता साफ कर दिया।

दरअसल इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई थी जब पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष Amrinder Singh Raja Warring ने श्रृंखला पर प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। इसके बाद पंजाब के महाधिवक्ता एम एस बेदी ने भी अदालत में दलील दी थी कि इस तरह की सामग्री अपराध और गैंग संस्कृति को सामान्य बनाने का काम कर सकती है। उनका कहना था कि पंजाब पहले से ही नशे और गैंगस्टर गतिविधियों जैसी समस्याओं से जूझ रहा है और ऐसे में इस प्रकार की श्रृंखला सामाजिक प्रभाव डाल सकती है।

केंद्र सरकार ने भी अपनी सलाह में पंजाब पुलिस की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा था कि श्रृंखला में नाटकीय प्रस्तुति, वास्तविक दृश्य और अपराध जगत से जुड़े कई तत्व ऐसे हैं जो संगठित अपराध को आकर्षक रूप में प्रस्तुत कर सकते हैं। सरकार का मानना था कि इससे सामाजिक तनाव और कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित होने की आशंका है।

हालांकि निर्माताओं की ओर से लगातार यह तर्क दिया गया कि डॉक्यूसीरीज़ का उद्देश्य किसी अपराधी का महिमामंडन करना नहीं बल्कि उस सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था को समझना है जिसके बीच एक अपराधी मानसिकता विकसित होती है। निर्माताओं के अनुसार यह श्रृंखला छात्र राजनीति, संगीत उद्योग, मीडिया और अपराध जगत के गठजोड़ को एक अध्ययन के रूप में प्रस्तुत करती है।

विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल एक वेब श्रृंखला का विवाद नहीं बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन की बहस का हिस्सा बन गया है। पिछले कुछ वर्षों में अपराध आधारित फिल्मों और श्रृंखलाओं को लेकर यह सवाल लगातार उठता रहा है कि क्या ऐसे विषय समाज को वास्तविकता से परिचित कराते हैं या अनजाने में अपराधियों को लोकप्रिय बना देते हैं। विशेष रूप से ओटीटी मंचों के बढ़ते प्रभाव के बाद यह बहस और तेज हुई है।

फिल्म और मीडिया विशेषज्ञों का कहना है कि अदालत का यह फैसला एक तरह से संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाता है। एक ओर अदालत ने श्रृंखला के प्रदर्शन पर पूरी तरह रोक लगाने से इनकार किया, वहीं दूसरी ओर संवेदनशील शीर्षक को बदलने का निर्देश देकर सामाजिक प्रभाव को ध्यान में रखने की कोशिश भी की। इससे यह संकेत भी मिलता है कि न्यायपालिका अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का समर्थन करते हुए सामाजिक जिम्मेदारी की सीमाओं को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहती।

उल्लेखनीय है कि लॉरेंस बिश्नोई पिछले कुछ वर्षों में देशभर में चर्चित नाम बन चुका है। वह पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर तब सुर्खियों में आया था जब अभिनेता Salman Khan को कथित धमकियों और काले हिरण शिकार मामले से जुड़े विवादों में उसका नाम सामने आया। फिलहाल वह साबरमती जेल में बंद है और कई आपराधिक मामलों में जांच एजेंसियों के रडार पर बना हुआ है।

अब उच्च न्यायालय की इस राहत के बाद माना जा रहा है कि संशोधित शीर्षक के साथ यह डॉक्यूसीरीज़ जल्द ही दर्शकों के सामने आ सकती है। हालांकि यह विवाद भविष्य में भी यह सवाल उठाता रहेगा कि अपराध और अपराधियों पर आधारित सामग्री को किस सीमा तक रचनात्मक स्वतंत्रता के नाम पर प्रस्तुत किया जाना चाहिए और समाज पर उसके प्रभाव की जिम्मेदारी किसकी होगी।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-