नीट परीक्षा पेपर लीक की आग बिहार तक पहुंची, तीन गिरफ्तार,सात की तलाश, संजीव मुखिया पर फिर गहराया शक

नीट परीक्षा पेपर लीक की आग बिहार तक पहुंची, तीन गिरफ्तार,सात की तलाश, संजीव मुखिया पर फिर गहराया शक

प्रेषित समय :19:49:35 PM / Wed, May 13th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

अनिल मिश्र, पटना

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले ने अब नया और विस्फोटक मोड़ ले लिया है. राजस्थान से शुरू हुई जांच की आंच अब बिहार तक पहुंच गई है और पूरे मामले में एक बार फिर कुख्यात सॉल्वर गैंग तथा कथित मास्टरमाइंड संजीव मुखिया का नाम तेजी से चर्चा में आ गया है. बिहार पुलिस ने इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है जबकि सात अन्य संदिग्धों की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है. जांच एजेंसियों को शक है कि इस बार भी संगठित सॉल्वर गैंग ने परीक्षा प्रणाली में सेंध लगाकर बड़े स्तर पर अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूली और उन्हें परीक्षा पास कराने का दावा किया था. पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी CBI ने भी जांच अपने हाथ में ले ली है.

बताया जा रहा है कि 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा के दौरान कई राज्यों से पेपर लीक की शिकायतें सामने आई थीं. शुरुआती जांच राजस्थान से शुरू हुई लेकिन जैसे-जैसे मामले की परतें खुलती गईं, बिहार के नेटवर्क की भूमिका भी सामने आने लगी. बिहार पुलिस ने अवधेश कुमार, पंकज कुमार और अमन कुमार नामक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इनसे पूछताछ के दौरान पुलिस को ऐसे संकेत मिले हैं कि पेपर लीक गिरोह और पुराने सॉल्वर गैंग नेटवर्क के बीच मजबूत कनेक्शन मौजूद है. हालांकि पुलिस और जांच एजेंसियों ने अभी तक आधिकारिक रूप से इसकी पुष्टि नहीं की है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से कई अहम जानकारियां मिली हैं.

जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार यह गिरोह मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सफलता दिलाने के नाम पर अभ्यर्थियों और उनके परिवारों से 50 से 60 लाख रुपये तक वसूलता था. शुरुआत में 2 से 5 लाख रुपये एडवांस लिए जाते थे और बाद में सॉल्वर गैंग अपने प्रशिक्षित लोगों को उम्मीदवारों की जगह परीक्षा केंद्रों पर बैठाने या पहले से प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने की व्यवस्था करता था. एजेंसियों को शक है कि इस नेटवर्क में मेडिकल कॉलेजों के कुछ छात्र, दलाल, तकनीकी जानकार और संगठित गिरोह के सदस्य शामिल हो सकते हैं. यही वजह है कि पुलिस अब पुराने मामलों के रिकॉर्ड भी खंगाल रही है.

इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक बार फिर संजीव मुखिया का नाम सामने आने से मामला और ज्यादा संवेदनशील हो गया है. संजीव मुखिया पहले भी कई प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक मामलों में आरोपी रह चुका है. वर्ष 2024 में हुए चर्चित NEET पेपर लीक कांड में भी उसका नाम सामने आया था. उस समय बिहार पुलिस ने परीक्षा के दिन 5 मई 2024 को गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए सिकंदर यादवेंदु और उसके ड्राइवर को गिरफ्तार किया था. पुलिस को सूचना मिली थी कि एक वाहन में पेपर लीक गिरोह से जुड़े कुछ संदिग्ध घूम रहे हैं. गिरफ्तारी के बाद जब सिकंदर से पूछताछ की गई तो कई चौंकाने वाले खुलासे हुए.

बाद में पुलिस ने उसके कथित सेफ हाउस पर छापा मारा जहां से जले हुए प्रश्नपत्र, मोबाइल फोन और कई परीक्षार्थियों के एडमिट कार्ड बरामद किए गए थे. जांच में सामने आया था कि सिकंदर बिचौलिए की भूमिका निभा रहा था. उसका भांजा अनुराग यादव भी परीक्षा में शामिल था और कथित रूप से छात्रों तथा पेपर लीक गिरोह के बीच संपर्क का काम कर रहा था. उसने कई छात्रों तक पेपर पहुंचाने की बात स्वीकार की थी. सिकंदर के बयान के आधार पर अमित आनंद और नीतीश कुमार की गिरफ्तारी हुई थी. जांच एजेंसियों के अनुसार दोनों आरोपी संजीव मुखिया गिरोह से जुड़े हुए थे. पूछताछ के दौरान दोनों ने संजीव मुखिया का नाम लिया था जिसके बाद उसे इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड माना जाने लगा.

अब ताजा मामले में संजीव मुखिया को लेकर नया शक इसलिए भी गहराया है क्योंकि जानकारी मिली है कि NEET-UG 2026 परीक्षा से ठीक एक सप्ताह पहले उसे पटना के बेऊर जेल से बक्सर जेल स्थानांतरित किया गया था. इस घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. हालांकि जेल प्रशासन की ओर से इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बताया जा रहा है, लेकिन जांच एजेंसियां इस बदलाव को भी गंभीरता से देख रही हैं. सूत्रों का कहना है कि जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा से पहले जेल बदले जाने और नेटवर्क की सक्रियता के बीच कोई संबंध तो नहीं था.

गौरतलब है कि संजीव मुखिया को 2024 के NEET पेपर लीक मामले में जमानत मिल चुकी थी क्योंकि समय पर उसके खिलाफ CBI चार्जशीट दाखिल नहीं कर पाई थी. हालांकि वह पुलिस भर्ती परीक्षा और शिक्षक भर्ती परीक्षा पेपर लीक जैसे कई अन्य मामलों में आरोपी होने के कारण अब भी जेल में बंद है. यही वजह है कि उसका नाम सामने आते ही पूरे मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है.

2024 के NEET पेपर लीक मामले में बिहार पुलिस ने कुल 45 लोगों को गिरफ्तार किया था. इनमें कई मेडिकल छात्र भी शामिल थे. बाद में CBI ने जांच अपने हाथ में लेकर अगस्त 2024 में पहली चार्जशीट दाखिल की थी जिसमें 13 आरोपियों के नाम शामिल थे. सितंबर 2024 में दूसरी चार्जशीट दाखिल हुई और अब तक एजेंसी पांच चार्जशीट पेश कर चुकी है. इन चार्जशीटों में 45 आरोपियों को नामजद किया गया है. CBI अब पुराने नेटवर्क और नए मामले के बीच संबंधों की भी जांच कर रही है.

ताजा जांच में बिहार के नालंदा जिले और पावापुरी क्षेत्र का नाम भी सामने आ रहा है. सूत्रों के अनुसार पुलिस उज्जवल उर्फ राजा बाबू नामक युवक की तलाश कर रही है जो पावापुरी मेडिकल कॉलेज में MBBS सेकेंड ईयर का छात्र बताया जा रहा है. जांच एजेंसियों को शक है कि वह इस नेटवर्क का अहम सदस्य है और कई अभ्यर्थियों तथा गिरोह के बीच संपर्क का काम करता था. पुलिस उसकी तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है लेकिन फिलहाल वह फरार बताया जा रहा है.

इधर परीक्षा रद्द होने के बाद देशभर के लाखों छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी है. छात्रों का कहना है कि मेहनत से तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों का भविष्य बार-बार पेपर लीक माफियाओं की वजह से बर्बाद हो रहा है. कई छात्र संगठनों ने इस मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. विपक्षी दलों ने भी सरकार पर हमला बोलते हुए परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.

फिलहाल पूरे देश की नजर अब CBI जांच पर टिकी हुई है. माना जा रहा है कि एजेंसी जल्द ही बिहार पहुंचकर सॉल्वर गैंग के नेटवर्क, आर्थिक लेनदेन, मेडिकल कॉलेज कनेक्शन और जेल लिंक समेत कई अहम बिंदुओं पर गहराई से जांच करेगी. यदि जांच में पुराने नेटवर्क और 2026 के पेपर लीक मामले के बीच सीधा संबंध सामने आता है तो यह देश के सबसे बड़े संगठित परीक्षा घोटालों में से एक साबित हो सकता है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-