आरबीआई का बड़ा एक्शन:150 एनबीएफसी का रजिस्ट्रेशन रद्द, एफडी और लोन वाले ग्राहकों में मची हलचल

आरबीआई का बड़ा एक्शन: 150 एनबीएफसी का रजिस्ट्रेशन रद्द, एफडी और लोन वाले ग्राहकों में मची हलचल

प्रेषित समय :22:41:58 PM / Thu, May 14th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई ने देशभर के वित्तीय क्षेत्र में बड़ा झटका देते हुए एक साथ 150 नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (NBFC) का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद लाखों ग्राहकों के बीच चिंता और असमंजस की स्थिति बन गई है, खासकर उन लोगों में जिन्होंने इन कंपनियों में फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी कर रखी है या फिर उनसे लोन लिया हुआ है। आरबीआई की इस सख्त कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि अब ग्राहकों के पैसे और चल रहे लोन का क्या होगा।

आरबीआई की कार्रवाई में सबसे ज्यादा प्रभावित कंपनियां पश्चिम बंगाल और नई दिल्ली की हैं। जानकारी के मुताबिक पश्चिम बंगाल की 75 और नई दिल्ली की 67 एनबीएफसी कंपनियों का रजिस्ट्रेशन रद्द किया गया है। इसके अलावा तेलंगाना, हरियाणा, मध्य प्रदेश, बिहार, तमिलनाडु और कर्नाटक की कई कंपनियां भी इस कार्रवाई की चपेट में आई हैं। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट कर दिया है कि अब ये कंपनियां गैर बैंकिंग वित्तीय संस्थानों के रूप में काम नहीं कर सकेंगी।

आरबीआई के अनुसार कई कंपनियों ने नियमों का पालन नहीं किया, कुछ कंपनियों ने एनबीएफसी कारोबार बंद कर दिया था, जबकि कुछ कानूनी रूप से समाप्त हो चुकी थीं। इसके साथ ही सात कंपनियों ने स्वेच्छा से अपना रजिस्ट्रेशन भी सरेंडर कर दिया है। केंद्रीय बैंक का कहना है कि वित्तीय क्षेत्र में पारदर्शिता और अनुशासन बनाए रखने के लिए यह कदम उठाना जरूरी था।

हालांकि इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ी चिंता उन लोगों की है जिन्होंने इन कंपनियों से लोन लिया हुआ है। वित्तीय विशेषज्ञों का साफ कहना है कि रजिस्ट्रेशन रद्द होने का मतलब यह नहीं है कि ग्राहकों का लोन माफ हो गया। यदि किसी व्यक्ति ने कार लोन, पर्सनल लोन, बिजनेस लोन या किसी अन्य प्रकार का कर्ज लिया है, तो उसकी ईएमआई पहले की तरह जारी रहेगी। संबंधित कंपनी या उसके द्वारा नियुक्त एजेंसी कानूनी रूप से बकाया राशि की वसूली कर सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी स्थिति में कई बार एनबीएफसी अपने पूरे लोन पोर्टफोलियो को किसी दूसरी बैंकिंग या वित्तीय संस्था को बेच देती हैं। इसका मतलब यह है कि भविष्य में ग्राहकों की ईएमआई किसी दूसरी कंपनी या बैंक के खाते में जा सकती है। आमतौर पर ऐसी स्थिति में ग्राहकों को नई कंपनी की ओर से आधिकारिक सूचना भेजी जाती है।

आरबीआई की इस कार्रवाई के बीच विशेषज्ञों ने ग्राहकों को चेतावनी दी है कि वे यह सोचकर ईएमआई देना बंद न करें कि कंपनी का लाइसेंस रद्द हो गया है। अगर ग्राहक भुगतान रोकता है, तो उसका सीधा असर उसके सिबिल स्कोर पर पड़ेगा। डिफॉल्ट की जानकारी क्रेडिट रिकॉर्ड में दर्ज होती रहेगी, जिससे भविष्य में लोन या क्रेडिट कार्ड लेना मुश्किल हो सकता है।

सबसे ज्यादा चिंता उन जमाकर्ताओं की है जिन्होंने इन एनबीएफसी कंपनियों में एफडी कराई हुई है। वित्तीय जानकारों के अनुसार बैंकों की एफडी की तरह एनबीएफसी की एफडी पर डीआईसीजीसी यानी डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन का पांच लाख रुपये तक का बीमा कवर लागू नहीं होता। यही वजह है कि एनबीएफसी में निवेश हमेशा थोड़ा ज्यादा जोखिम वाला माना जाता है।

यदि किसी ऐसी एनबीएफसी का रजिस्ट्रेशन रद्द हो गया है जिसमें ग्राहकों ने एफडी कर रखी है, तो कंपनी अब नया पैसा नहीं ले सकती और पुरानी एफडी को रिन्यू भी नहीं कर सकती। ऐसे मामलों में कंपनी को अपनी संपत्तियां बेचकर जमाकर्ताओं का पैसा लौटाना पड़ता है। लेकिन यदि कंपनी दिवालिया हो जाती है, तो भुगतान प्रक्रिया लंबी और जटिल हो सकती है। सबसे पहले सुरक्षित लेनदारों को भुगतान किया जाता है और उसके बाद बाकी जमाकर्ताओं की बारी आती है।

आरबीआई की कार्रवाई में जिन प्रमुख कंपनियों के नाम सामने आए हैं उनमें बसेरा निर्माण, एचबीसी फाइनेंस एंड लीजिंग, क्लासिक सिक्योरिटीज, इंड कॉर्प सिक्योरिटीज, एडवांटेज इक्वी फंड, अभिषेक कैपिटल सर्विसेज, एस्ट्यूट फाइनेंस और कल्लारक्कल फिनकॉर्प जैसी कंपनियां शामिल हैं। इसके अलावा दर्जनों निवेश, ट्रेडिंग, फाइनेंस और लीजिंग कंपनियों के रजिस्ट्रेशन भी रद्द किए गए हैं।

वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में आरबीआई लगातार एनबीएफसी सेक्टर पर निगरानी बढ़ा रहा है। केंद्रीय बैंक का फोकस अब केवल रजिस्ट्रेशन जारी करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि कंपनियां लगातार नियमों, गवर्नेंस स्टैंडर्ड और संचालन संबंधी शर्तों का पालन करें। आरबीआई का मानना है कि वित्तीय क्षेत्र में ग्राहकों का भरोसा बनाए रखने के लिए नियमों का कड़ाई से पालन जरूरी है।

इस कार्रवाई के बाद वित्तीय बाजार में भी हलचल देखी जा रही है। कई ग्राहक अब अपनी एफडी और निवेश को लेकर जानकारी जुटाने में लगे हैं। विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि जिन लोगों का पैसा प्रभावित कंपनियों में लगा है, वे घबराने के बजाय कंपनी की आधिकारिक स्थिति, परिसंपत्तियों और भुगतान प्रक्रिया की जानकारी लें। साथ ही भविष्य में निवेश करते समय केवल अधिक ब्याज दर के लालच में जोखिम वाले संस्थानों का चयन करने से बचें।

आरबीआई की इस कार्रवाई ने साफ संकेत दे दिया है कि वित्तीय नियमों की अनदेखी करने वाली कंपनियों के खिलाफ अब सख्त कदम उठाए जाएंगे। वहीं आम ग्राहकों के लिए यह घटना एक बड़ी सीख भी बन गई है कि निवेश और लोन से जुड़े फैसलों में केवल आकर्षक ऑफर नहीं, बल्कि संस्थान की विश्वसनीयता और नियामकीय स्थिति को भी गंभीरता से समझना जरूरी है।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-